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बिहार में चार हजार आंगनबाड़ी केंद्रों के बनेंगे भवन, मनरेगा की ओर से होगा निर्माण, जानें कितने रुपए होंगे खर्च…

Updated at : 27 Aug 2024 7:47 AM (IST)
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Bihar News: Anganwadi centers of Bihar will be developed on the lines of play schools, swings will be installed for children.

Aanganbadi Kendra: राज्यभर में 4000 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन बनाए जाएंगे. मनरेगा की ओर से इन आंगनबाड़ी केंद्रो के भवन का निर्माण किया जाएगा. इस पर कुल चार अरब 80 करोड़ रुपए खर्च होंगे.

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Aanganbadi Kendra: राज्यभर में 4000 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन बनाए जाएंगे. मनरेगा की ओर से इन आंगनबाड़ी केंद्रो के भवन का निर्माण किया जाएगा. इस पर कुल चार अरब 80 करोड़ रुपए खर्च होंगे. जिलावार लक्ष्य निर्धारित कर भवन निर्माण होंगे. एक आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण पर 12 लाख रुपए खर्च किया जाएगा. इसमें आठ लाख मनरेगा, दो लाख पंचायती राज और दो लाख समाज कल्याण विभाग से खर्च होंगे.

इस राशि में बढ़ोत्तरी का भी प्रस्ताव है. फिलहाल 12 लाख रुपए की ही स्वीकृति है. विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि लागत बढ़ने के कारण इसमें लगभग दो लाख रुपए और बढ़ाये जाने की संभावना है.

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जमीन उपलब्ध होना बड़ी चुनौती होगी

चार हजार आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण में जमीन उपलब्ध होना टेढ़ी खीर है. पहले ही जमीन के अभाव में आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण कार्य बड़े पैमाने पर पेंडिंग है. अब इन चार हजार आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए जमीन मुश्किल से ही उपलब्ध हो पाएगी. जिलाधिकारियों को जमीन उपलब्ध करवानी है.

नौ साल में दो हजार में सात सौ भवन बने

वर्ष 2015-16 में मनरेगा से दो हजार आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण होना था. इसमें अब तक लगभग सात सौ आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन ही बनकर तैयार हुए हैं. कहीं जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई तो कहीं जमीन अधिक गड्ढे में रहने के कारण आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन का निर्माण नहीं हो सका.

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सेविका-सहायिका भी नहीं चाहतीं सरकारी केंद्र

ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि केंद्र की स्वीकृति मिल जाने के बाद सेविका-सहायिका सरकारी भवन में केंद्र का संचालन नहीं चाहती हैं. सरकारी भवन में केंद्र संचालित होने से नियम से खोलना और बंद करना पड़ेगा. कई केंद्र सहायिका-सेविका के घर में ही चलते हैं, इससे किराया का पैसा अलग से मिल जाता है. इन्हीं कारणों से वे सरकारी भवन में केंद्र संचालित होने के लिए सक्रिय नहीं होती हैं.

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Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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