Aadhar Card: आधार में होने जा रहा है सबसे बड़ा बदलाव, अब आपका चेहरा ही बनेगा आपकी पहचान

Updated at : 26 Jan 2026 2:21 PM (IST)
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Aadhar Card

AI से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर

Aadhar Card: आधार की पहचान अब उंगलियों से नहीं, चेहरे से होगी. देश की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान प्रणाली एक नई तकनीकी क्रांति की दहलीज पर खड़ी है, जहां हर महीने 100 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन का लक्ष्य रखा गया है.

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Aadhar Card: आधार के तकनीकी ढांचे में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव होने जा रहा है. ‘आधार विजन 2032’ नाम से तैयार हो रहे रोडमैप में फिंगरप्रिंट आधारित पहचान की जगह फेशियल रिकग्निशन को प्राथमिक माध्यम बनाने की तैयारी है.

इससे न केवल ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि तकनीकी फेलियर और धोखाधड़ी की आशंका भी काफी हद तक कम हो जाएगी.

आधार विजन 2032- नई तकनीकी सोच की शुरुआत

करीब चार महीने के मैराथन मंथन के बाद गठित विशेषज्ञ समिति ने ‘आधार विजन 2032’ का प्रारूप तैयार किया है. इसे अगले महीने अंतिम रूप देकर मार्च में यूआईडीएआई को सौंपा जाएगा. इसके आधार पर अगले पांच वर्षों के लिए आधार का नया तकनीकी ढांचा तैयार किया जाएगा.

इस विजन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने की सिफारिश की गई है. उद्देश्य आधार को अधिक सुरक्षित, तेज और यूजर फ्रेंडली बनाना है.

अब चेहरे की पहचान पर फोकस

देश में रोज करीब 9 करोड़ आधार ऑथेंटिकेशन होते हैं, जिनमें लगभग 1 करोड़ फेशियल रिकग्निशन से किए जाते हैं. सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हर महीने 100 करोड़ आधार ऑथेंटिकेशन फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए हों.

एआई आधारित फेशियल सिस्टम समय-समय पर खुद को अपडेट करता रहेगा. इससे लोगों को बार-बार बायोमेट्रिक देने की परेशानी से छुटकारा मिलेगा और पहचान प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगी.

बच्चों के बायोमेट्रिक अपडेट पर भी जोर

सरकार 18 करोड़ बच्चों और किशोरों के बायोमेट्रिक अपडेट को लेकर भी गंभीर है. दिसंबर तक लगभग 5 करोड़ अपडेट पूरे हो चुके हैं. यह सुविधा सितंबर 2026 तक पूरी तरह निशुल्क जारी रहेगी. इससे आधार डाटाबेस ज्यादा सटीक और भरोसेमंद बनेगा.

2032 तक का नया अनुबंध

यूआईडीएआई के साथ सरकार का मौजूदा तकनीकी अनुबंध 2027 में खत्म होगा. अब 2032 तक के लिए नए अनुबंध की तैयारी चल रही है, ताकि आधार को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक मजबूत किया जा सके.

देश के दिग्गज तकनीकी विशेषज्ञों ने तैयार किया रोडमैप

इस दस्तावेज को तैयार करने के लिए यूआईडीएआई के चेयरमैन नीलकांत मिश्रा की अध्यक्षता में समिति बनी थी. इसमें सर्वम् एआई के सह-संस्थापक विवेक राघवन, न्यूटनिक्स के संस्थापक धीरज पांडेय, अमृता यूनिवर्सिटी के डॉ. पी. पूर्णचंद्रन, मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अनिल जैन और आईआईटी जोधपुर के मयंक वत्स जैसे दिग्गज शामिल थे.

आधार विजन 2032 सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल पहचान व्यवस्था को भविष्य के लिए तैयार करने की बड़ी पहल है. चेहरे से पहचान की यह व्यवस्था आधार को और ज्यादा स्मार्ट, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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