इलाज के अभाव में अधेड़ की मौत, शव से बदबू आने पर टूटी अस्पताल प्रशासन नींद

Updated at : 04 Nov 2016 7:08 AM (IST)
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इलाज के अभाव में अधेड़ की मौत, शव से बदबू आने पर टूटी अस्पताल प्रशासन नींद

सुपौल : शहर के भीमपुर चौक पर मशरथ यदुवंशी रथ नामक बस संख्या बीआर19सी/2433 में एक यात्री सवार हुआ़ बस में भीड़ के कारण वह गेट पर खड़ा हो कर सफर करने को मजबूर था़ इसी दौरान हादसा हुआ और वह बस से गिर गया़ उसे चोट लगी और बसचालक व उसके कर्मचारी पीएचसी के […]

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सुपौल : शहर के भीमपुर चौक पर मशरथ यदुवंशी रथ नामक बस संख्या बीआर19सी/2433 में एक यात्री सवार हुआ़ बस में भीड़ के कारण वह गेट पर खड़ा हो कर सफर करने को मजबूर था़ इसी दौरान हादसा हुआ और वह बस से गिर गया़ उसे चोट लगी और बसचालक व उसके कर्मचारी पीएचसी के गेट पर छोड़ कर चले गये. जैसे-तैसे अस्पताल में इलाज के पहुंचा, लेकिन सूचना देने के बाद भी पुलिस नहीं पहुंची़ इसके बाद उसे सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया़ इसके बाद वहां भी किसी ने ध्यान नहीं दिया़ घायल की पहचान नहीं होने के कारण सदर अस्पताल प्रशासन ने भी उसके साथ लावारिस जैसा व्यवहार किया और ऐसे ही छोड़ दिया़
इलाज के अभाव के कारण
उसकी मौत हो गयी़ इतना ही नहीं, जेनरल वार्ड में 24 घंटे से भी अधिक समय तक शव पड़ा रहा. उसकी मौत की खबर अस्पताल के किसी डॉक्टर व कर्मचारी को नहीं लगी़ शव से दुर्गंध आने लगी. इतना ही नहीं वार्ड में पहले से भरती मरीज व उनके परिजन वहां से भागने लगे़ अधेड़ की पहचान बलुआ बाजार थाने क्षेत्र की बिशनपुर शिवराम पंचायत स्थित नाथपट्टी गांव के सीताराम राम के पुत्र मशरथ राम के रूप में की गयी है.
15 घंटे तक जिंदगी व मौत के बची झूलता रहा मशरथ : अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने जख्मी को देखते ही इलाज करने से हाथ खड़े कर दिये. चिकित्सक ने साफ शब्दों में कहा कि यहां उपचार के लिए आवश्यक संसाधन और दवा उपलब्ध नहीं है. हालांकि, अज्ञात मरीज रहने के कारण मशरथ राम को एक स्लाइन लगा कर जेनरल वार्ड के कोना में स्थित बेड पर मरने के लिए छोड़ दिया गया. इस दौरान अस्पताल के कर्मियों ने मशरथ के चेहरे और शरीर पर लगे खून को साफ तक करना मुनासिब नहीं समझा. मंगलवार की संध्या करीब 05:00 बजे से लेकर बुधवार की सुबह 09:00 बजे तक उपचार और दवा के अभाव में मशरथ तड़पता रहा.
थानेदार आये और खानापूर्ति कर चले गये
ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक द्वारा मशरथ राम का प्राथमिक उपचार कर उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल छातापुर थानाध्यक्ष को सूचित किया गया. चिकित्सक की सूचना पर पहुंची पुलिस ने जख्मी का मुआयना किया और उसे चिकित्सक के भरोसे छोड़ कर चलते बने. उसके बाद मशरथ राम की पल-पल होती गंभीर स्थिति को देख कर चिकित्सक ने उसे बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल भेज दिया. जानकारी अनुसार छातापुर से जख्मी अधेड़ को एंबुलेंस से सदर अस्पताल लाया गया था. लेकिन साथ आये लोग जख्मी को सदर अस्पताल में भगवान भरोसे छोड़ कर चले गये.
सदर अस्पताल में कर्मी और संसाधन का अभाव है. जख्मी मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर किया जाता है. लेकिन, अज्ञात जख्मी के साथ कोई भी नहीं था. इस वजह से उसे बाहर नहीं भेजा जा सका. अज्ञात जख्मी के उपचार की जिम्मेदारी संबंधित थाने की पुलिस की होती है. पुलिस रहती, तो अस्पताल प्रशासन मरीज को रेफर कर देता.
डॉ एन के चौधरी, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल
डॉक्टरों की सूचना पर भी आखिर छातापुर के थानाध्यक्ष ने अज्ञात जख्मी के साथ पुलिसकर्मियों को क्यों नहीं सदर अस्पताल भेजा. यह गंभीर मामला है, जिसमें लापरवाही दिखती है. मामले की जांच पुलिस के वरीय अधिकारियों करायी जायेगी. जांच के बाद इसमें दोषी पाये जाने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कड़ी-से-कड़ी कार्रवाई की जायेगी.
डॉ कुमार एकले, एसपी, सुपौल
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