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DNA चुनावी मुद्दा नहीं, बयान वापस लें PM: नीतीश

Updated at : 05 Aug 2015 10:59 AM (IST)
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DNA चुनावी मुद्दा नहीं, बयान वापस लें PM: नीतीश

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बुधवार को मांग करते हुए कहा कि पीएम अपना डीएनए वाला बयान वापस लें. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विषय हमारे लिए कोई चुनावी मुद्दा नहीं है, बल्कि बिहार की अस्मिता से जुड़ा सवाल है. इसके साथ ही पीएम मोदी द्वारा व्यक्तिगत तौर पर […]

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पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बुधवार को मांग करते हुए कहा कि पीएम अपना डीएनए वाला बयान वापस लें. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विषय हमारे लिए कोई चुनावी मुद्दा नहीं है, बल्कि बिहार की अस्मिता से जुड़ा सवाल है. इसके साथ ही पीएम मोदी द्वारा व्यक्तिगत तौर पर टारगेट किये जाने संबंधी खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए नीतीश ने कहा कि मोदी की वो जाने, व्यक्तिगत तौर पर किसी को टारगेट करना मेरा स्वभाव नहीं है. गौर हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों बिहार के मुजफ्फरपुर में एक रैली को संबोधित करने के दौरान नीतीश कुमार की आलोचना करते हुए उनके डीएनए पर टिप्पणी की थी. उस वक्त भी नीतीश ने कहा था कि डीएनए पर टिप्पणी करना सभी बिहारियों का अपमान है. नीतीश ने बुधवार को ट्वीटर पर इससे जुड़े तथा कई अन्य मुद्दों पर अपनी बेबाक राय दी.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुली चिट्ठी लिखी और उस चिट्ठी को ट्विटर पर पोस्ट भी किया. नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री को यह पत्र अंग्रेजी में लिखा है. इस पत्र में उन्होंने लिखा है कि अपने मुजफ्फपुर दौरे के दौरान अपने मेरे डीएनए को लेकर जो कमेंट किया है, उससे मैं और बिहार की जनता काफी आहत हुई है. चूंकि आप फिर बिहार आने वाले हैं, इसलिए मैं उन लोगों की तरफ से आपको यह पत्र लिख रहा हूं, जो आपके बयान से आहत हुए हैं. इसके साथ ही नीतीश ने अपने इस ट्वीट पर पहली बार लाइव चैट करने का एलान किया है. लाइव चैट के लिये आज शाम 5 बजे से लेकर 7 बजे तक समय निर्धारित किया गया. लाइव चैट के शुरु होते ही आम जनता, पत्रकार समेत जाने माने बुद्घिजीवियों ने नीतीश से कई सवाल किये. इनमें से ज्यादातर सवाल जदयू-राजद गठबंधन, जाति आधारित राजनीति, बिहारी शब्द के इस्तेमाल व डीएनए को लेकर किया गया.

डीएनए चुनावी मुद्दा नहीं, बिहारी अस्मिता का सवाल
नीतीश ने कहा कि यह चुनावी मुद्दा नहीं है बल्किबिहारी अस्मिता का सवाल है. उन्होंने कहा कि मैं बिहार का बेटा हूं और बॉयोलौजिकली मेरा डीएनए भी बिहार के लोगों की तरह ही है. मैं ऐसे लोगों का प्रतिनिधित्व करता हूं जिनको लेकर कंमेंट किये जाते है. सीएम ने कहा कि मैं हमेशा नयी चीजों को सीखने की कोशिश करता हूं. उन्होंने कहा कि माफीनामा नहीं, हम चाहते हैं शब्द वापस लिये जाये. डीएनए के बहाने बाल ठाकरे की तरह जय महाराष्ट्र की तरह जय बिहार की ओर राज्य को ले जाने संबंधी एक सवाल के जवाब में नीतीश ने कहा कि बिहार के गौरवशाली अतीत पर मुङो गर्व है और हमें बहाने की जरु रत नहीं है. पीएम मोदी द्वारा व्यक्तिगत तौर पर टारगेट किये जाने को लेकर पूछे गये एक सवाल के जवाब में नीतीश ने कहा, अपनी वो जाने, व्यक्तिगत तौर पर टारगेट करना मेरा स्वभाव नहीं है. मोदी को लिखे पत्र में मंैने अपनी भावनाएं को जाहिर किया है. अब जनता को तय करना है कि सही और गलत क्या है.

बचाव के प्रयास में जुटी भाजपा
एक सवाल में जब नीतीश से पूछा गया कि बीजेपी के नेता कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री ने आपके नहीं आपके राजनैतिक डीएनए की बात की थी. इसके जवाब में अपनी राय रखते हुए उन्होंने कहा कि अब भाषण के बाद यह बचाव का प्रयास है. इसके साथ ही उन्होंने एक विडीओ का लिंक भी साझा करते हुए कहा कि आप इसको देखकर व सुनकर सच्चई का पता लगा सकते है.

राजद-जदयू गठबंधन में नहीं कोई समस्या
राजद-जदयू गठबंधन पर पूछे गये एक सवाल के जवाब में नीतीश ने कहा कि गठबंधन को लेकर कोई समस्या नही है. यह एक राजनीतिक प्रक्रि या है और राजद-जदयू गठबंधन भी अन्य गठबंधनों की तरह ही है. गठबंधन को लेकर पूछे गये एक अन्य सवाल के जवाब में सीएम ने कहा कि चिंता करने की जरु रत नहीं है बिहार का भविष्य सुरिक्षत है. चुनाव नही लड़ने का फैसला लिये जाने एवं भाजपा से सीधे मुकाबला करने में संकोच संबंधी एक सवाल के जवाब में नीतीश ने कहा कि महागठबंधन यह चुनाव मेरे नेतृत्व में लड़ रहा है. संकोच तो बीजेपी को है जिन्होंने अभी तक अपना नेता घोषित नहीं किया है.

जाति की राजनीति मैं नही शामिल
जातिगत सम्मेलनों में शामिल होने के संबंध में पूछे गये एक सवाल के जवाब में सीएम ने कहा कि पिछले कई सालों में मंै किसी जातिगत सम्मेलनों में नहीं गया हूं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों में ऐसे सम्मेलनों में कौन शिरकत कर रहा है ये मुझसे ज्यादा बेहतर आप जानते है. जाति आधारित जनगणना को सार्वजनिक करवाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाये जाने संबंधी सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि एइसीसी जिसका मतलब सामाजिक, आर्थिक और जाति जनगणना है, इसकी स्वीकृति सभी दलों ने मिल कर दी थी. अब जब गणना हो चुकी है तो उसे प्रकाशित करने में क्या दिक्कत है? अपने खिलाफ उच्च जातियों के ध्रुवीकरण को लेकर पूछे गये सवाल का जवाब देते हुए नीतीश ने कहा कि वह ऐसा नही मानते है.

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ज्यादा नहीं कुछ कर पाया
नीतीश से जब यह पूछा गया कि ईमानदारी से बताये कि कौन सी एक चीज़ है जो आप दस साल में नहीं कर पाये और फेल हो गये. इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्न में जितना चाहता था उतना नहीं कर पाया. फेल नहीं हुआ हूँ, प्रयास जारी है. शिक्षकों की घोर समस्या का स्थायी समाधान निकाले जाने को लेकर पूछे गये एक सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समस्या का स्थायी समाधान कर दिया गया है. शिक्षकों को वेतनमान दे दिया गया है. वहीं, खुद पर अहंकारी होने का आरोप लगाये जाने को लेकर लेकर किये गये सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ऐसा आरोप लगाने वालों के अहंकार के बारे में देश और दुनिया जानती है.

इसके साथ ही अंत में नीतीश ने ट्वीटर पर सवाल पूछने वाले सभी लोगों को उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस दौरान करीब पांच सवाल पूछे गये जिनमें से कई सवालों के जवाब दे दिये गये है. कुछ सवालों के जवाब आने वाले दिनों में देने का प्रयास किया जाएगा.

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