पीएमसीएच: जूनियर डॉक्टरों ने कहा, मामला वापस लो, तभी टूटेगी हड़ताल

Updated at : 27 Jun 2014 7:43 AM (IST)
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पीएमसीएच: जूनियर डॉक्टरों ने कहा, मामला वापस लो, तभी टूटेगी हड़ताल

पटना: पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही. गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्री से वार्ता विफल रही. जूनियर डॉक्टरों का कहना था कि जिन छात्रों को एसटीएफ ने पीटा, उन्हीं के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है. उनका नाम हटाया जायेगा, तभी काम पर लौटेंगे. मंत्री ने उनकी मांग पर विचार करने […]

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पटना: पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही. गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्री से वार्ता विफल रही. जूनियर डॉक्टरों का कहना था कि जिन छात्रों को एसटीएफ ने पीटा, उन्हीं के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है. उनका नाम हटाया जायेगा, तभी काम पर लौटेंगे. मंत्री ने उनकी मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया, जिससे वे संतुष्ट नहीं हुए और हड़ताल जारी रखने की बात कही.

वार्ता में शामिल पीएमसी प्राचार्य डॉ अमर कांत झा अमर ने कहा कि जूनियरों की एक मांग है जिसको लेकर आश्वासन दिया गया है. ऐसे में लगता है कि देर रात तक या शुक्रवार की सुबह तक हड़ताल खत्म हो जायेगी. जेडीए अध्यक्ष डॉ राकेश कुमार ने बताया कि वार्ता में कुछ साफ आश्वासन नहीं मिला है. जिन छात्रों का नाम मामले में दिया गया है उनको खुद पिटाई लगी है. अगर लगता है कि छात्र व चिकित्सक मामले में दोषी हैं तो पूरे मामले की जांच करा लें, लेकिन इस तरह से किसी को नहीं फंसाया जाना चाहिए.

25 बाहरी डॉक्टरों ने संभाली कमान
हड़ताली जूनियर डॉक्टरों को मनाने की प्रक्रिया लगभग समाप्त होती दिख रही है. इधर मरीजों को हो रही परेशानी को देखते हुए बाहर से डॉक्टर बुलाये गये हैं. गुरुवार की सुबह साढ़े नौ बजे तक पीएमसीएच में विभिन्न जिलों से आये 25 चिकित्सकों ने कार्यभार संभाल लिया है. सभी चिकित्सकों को विभिन्न विभागों में तैनात कर दिया गया है ताकि मरीजों के इलाज में किसी तरह की परेशानी नहीं हो. इलाज में परेशानी होने पर मरीज कंट्रोन रुम, अस्पताल अधीक्षक या अस्पताल के उपाधीक्षक के पास अपनी शिकायत कर सकते हैं. इसके लिए एक अलग सेल का निर्माण किया गया है, जो मरीजों की परेशानी को तुरंत ठीक करेगा. अस्पताल प्रशासन ने मरीज के इलाज को बेहतर करने के लिए सभी विभाध्यक्षों को भी दिशा-निर्देश दिया है, ताकि मरीजों का बेहतर इलाज हो सके. इलाज में कोई कोताही नहीं हो इसके लिए अस्पताल से जुड़े सभी चिकित्सक व कर्मचारी को दिशा-निर्देश दिया दे दिया है.

दवा वितरण की भी हो रही मॉनीटरिंग
हड़ताल में मरीजों को परेशानी नहीं हो, इसके लिए अस्पताल प्रशासन के दिशा-निर्देश के बाद नर्स व वार्ड ब्वॉय भी काम पर पूरी तरह से तैनात हैं. इमरजेंसी व वार्डो में नर्स और चिकित्सक एक-दूसरे के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. मरीजों को अस्पताल में मौजूद सभी दवाइयां मिल रही है कि नहीं इसकी जानकारी भी अस्पताल प्रशासन ले रहा है.

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