सारण के 1078 सरकारी स्कूल बच्चों के लिए असुरक्षित, जानिये कितने स्कूलों में हैं खेल का मैदान है और लाइब्रेरी

Updated at : 16 Nov 2021 9:18 PM (IST)
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सारण के 1078 सरकारी स्कूल बच्चों के लिए असुरक्षित, जानिये कितने स्कूलों में हैं खेल का मैदान है और लाइब्रेरी

स्कूलों में कोई भी प्रवेश कर सकता है उसके लिए कोई रोक-टोक नहीं है. सीधा सीधी बात है कि इन स्कूलों में चहारदीवारी की सुविधा ही नहीं है चार दिवारी के सुविधा नहीं होने से असामाजिक तत्व या कोई भी अनजान व्यक्ति के साथ पशु भी प्रवेश कर सकते हैं ऐसे में बच्चों का जीवन असुरक्षित है.

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छपरा. सारण के 1000 से अधिक सरकारी स्कूल बच्चों के लिए असुरक्षित है. यानी इन स्कूलों में कोई भी प्रवेश कर सकता है उसके लिए कोई रोक-टोक नहीं है. सीधा सीधी बात है कि इन स्कूलों में चहारदीवारी की सुविधा ही नहीं है चार दिवारी के सुविधा नहीं होने से असामाजिक तत्व या कोई भी अनजान व्यक्ति के साथ पशु भी प्रवेश कर सकते हैं ऐसे में बच्चों का जीवन असुरक्षित है.

बिहार सरकार की ओर से पूरे बिहार के लिए जारी किये गये एक पत्र में यह बताया गया है कि राज्य में कितने स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं अभी तक नहीं है इतना ही नहीं बच्चों के क्रिएटिविटी को बढ़ाने के लिए होने वाली सुविधाएं भी नदारद है.

एक नजर में रिपोर्ट,जहां यह सुविधाएं नहीं है

  • -पुस्तकालय-1945 स्कूलों में नहीं है

  • -खेल का मैदान 1815 स्कूलों में नहीं है

  • -चहरदिवारी 1078 स्कूलों में नहीं है

  • -रैंप की सुविधा 426 स्कूलों में नहीं है

  • -बिजली की सुविधा 13 स्कूलों में नहीं है

  • -बालिका शौचालय 35 स्कूलों में नहीं है

  • -बालक शौचालय 75 स्कूलों में नहीं है

  • -पेयजल सुविधा 01 स्कूल में नहीं है

क्रियेटिविटी के साधन नदारद

स्कूलों में बच्चे पढ़ने के साथ साथ खेलते हैं इससे बच्चों की फिजिकल एक्सरसाइज तो होती ही है साथ ही साथ शिक्षकों द्वारा कई गेम भी सिखाये जाते हैं लेकिन बड़ी बात यह कि 1815 सरकारी स्कूलों में खेल के मैदान ही गायब हैं. इतना ही नहीं बच्चों को शैक्षणिक गुणवत्ता में वृद्धि लाने के लिए पुस्तकालय के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं.

हर स्कूल को हजारों रुपए दिए जाते हैं ताकि पुस्तक खरीद ले और पुस्तकालय का निर्माण करें. लेकिन सारण के 1945 सरकारी स्कूलों में पुस्तकालय नहीं है. सारण के 1078 स्कूलों में चारदीवारी की सुविधा नहीं है. ऐसे में बच्चे अपने आप को असुरक्षित महसूस करते हैं. बच्चों के साथ-साथ अभिभावक भी टेंशन में रहते हैं कि कहीं स्कूल परिसर में असामाजिक तत्व या अनजान व्यक्ति के अलावा पशु ना प्रवेश कर जाए और बच्चों को नुकसान न पहुंचा दें.

स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के रूप में शौचालय तक नहीं है 75 स्कूलों में बालक शौचालय नहीं है तो 35 स्कूलों में बालिका शौचालय नहीं है. 13 स्कूलों में बिजली की सुविधा नहीं है. और एक स्कूल में पेयजल की सुविधा नहीं है.यह तो इसके आंकड़े के आधार पर तैयार हुए रिपोर्ट है वास्तविकता कुछ और हो सकती है या तो इससे बदतर स्थिति हो सकती है या फिर कुछ हद तक ठीक हो सकता है जैसा कि सरकारी रिपोर्ट में कहा गया है.

क्या कहते हैं डीईओ

सारण शिक्षा पदाधिकारी अजय कुमार सिंह ने कहा कि 160 स्कूलों के बेंच डेस्क के लिए राशि की डिमांड की गई है जबकि ढाई सौ स्कूल जो कि सड़क के किनारे हैं उनके लिए चहारदीवारी निर्माण की राशि की डिमांड की गयी है. सभी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए रिपोर्ट बनाकर भेज दी गयी है.

Posted by Ashish Jha

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