Sunil Chhetri Retires: 'कैप्टन फैंटास्टिक' सुनील छेत्री ने की संन्यास की घोषणा, देखें वीडियो...

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 16 May 2024 12:51 PM

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भारतीय फुटबाॅल के हीरो सुनील छेत्री ने संन्यास की घोषणा कर दी है. उन्होंने इस बात की जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी.

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Sunil Chhetri : भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान और फुटबाॅल के हीरो सुनील छेत्री ने संन्यास की घोषणा कर दी है. वे अपने करियर का अंतिम मैच छह जून को कुवैत के खिलाफ विश्व कप ‘क्वालीफाइंग मैच’ के दौरान खेलेंगे. उन्होंने अपने एक्स हैंडिल पर एक वीडियो पोस्ट कर इसकी जानकारी दी है. 39 साल के सुनील छेत्री ने अपने करियर की शुरुआत 2005 में की थी और तब से आज तक उन्होंने अपने देश के नाम कई उपलब्धियां दर्ज कराई हैं. छेत्री ने एक इमोशनल पोस्ट में यह बताया कि वे छह जून को विश्व कप के क्वालीफाइंग मैच के बाद संन्यास ले लेंगे. उनका करियर 19 साल का रहा है.

कैप्टन फैंटास्टिक के रूप में है पहचान

सुनील छेत्री को फुटबाॅल जगत में कैप्टन फैंटास्टिक के नाम से जाना जाता है. उन्होंने अपने करियर में रोनाल्डो और मेस्सी के बाद सबसे ज्यादा गोल किए हैं. 2002 में उन्होंने पहली बार मोहन बगान के लिए फुटबाॅल खेला था.देश के लिए अभी तक उन्होंने 94 गोल किए हैं और 150 मैच खेला है.

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काफी भावुक नजर आए सुनील छेत्री

सुनील छेत्री ने अपने वीडियो में कहा कि मेरे लिए वह पल अविस्मरणीय है, जब मैंने अपने देश की जर्सी पहनी थी. मैं उस गेम को भूल नहीं सकता, जब मैंने पहली बार गोल किया था. सुखी सर ने मुझे बताया था कि मैं देश के लिए खेल रहा हूं, मैं कुछ भी नहीं भूल सकता. देश के लिए खेलना मेरे लिए गौरवान्वित करने वाला पल था. मेरे लिए फुटबाॅल को छोड़ना आसान नहीं है. अपने कोच, अपने ग्राउंड, प्रेशर गेम को छोड़ना आसान नहीं है. मैंने सबसे पहले खुद को इसके लिए मनाया-हां मैं अब अपने गेम को अलविदा कहना चाहता हूं. उसके बाद मैंने अपने माता-पिता और पत्नी को बताया. मेरी पत्नी मेरे संन्यास के बारे में सुनकर रो पड़ी. वह इस बात को स्वीकार ही नहीं कर पा रही थी कि मैं अब अपने देश के लिए नहीं खेलूंगा. मैं सौभाग्यशाली हूं कि इतने वर्षों तक मैंने देश की सेवा की. मैंने हर पल को इंज्वाॅय किया है. इस गेम में प्रेशर है, लेकिन मैंने हमेशा उन चीजों को इंज्वाॅय किया है. मुझे अपने प्रशंसकों से जो प्यार मिला वह अनमोल है और वही मेरी पूंजी है. सुनील छेत्री ने अपने वीडियो पोस्ट की शुरुआत मुझे कुछ कहना है से की थी और अंत उन्होंने यह कहते हुए किया कि छह जून को वे अपने करियर का अंतिम मैच खेल रहे हैं और उम्मीद है, ये शानदार गेम होगा. इस मैच के साथ ही मैं विदा लूंगा.

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लेखक के बारे में

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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