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IPL मनी लॉन्ड्रिंग मामला : प्रवर्तन निदेशालय ने सिंगापुर, मॉरीशस के लिए मांगे अनुरोध पत्र

Updated at : 30 Jun 2015 4:46 PM (IST)
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IPL मनी लॉन्ड्रिंग मामला : प्रवर्तन निदेशालय ने सिंगापुर, मॉरीशस के लिए मांगे अनुरोध पत्र

नयी दिल्ली : इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) टूर्नामेंट में कथित आर्थिक अनियमितताओं और इसके पूर्व अध्यक्ष ललित मोदी के खिलाफ जांच को आगे बढ़ाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय ने सिंगापुर और मॉरिशस से कानूनी मदद मांगी है. अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी ने अदालत से दो अनुरोध पत्र (एलआर) प्राप्त करने के लिए कानूनी प्रक्रियाएं […]

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नयी दिल्ली : इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) टूर्नामेंट में कथित आर्थिक अनियमितताओं और इसके पूर्व अध्यक्ष ललित मोदी के खिलाफ जांच को आगे बढ़ाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय ने सिंगापुर और मॉरिशस से कानूनी मदद मांगी है.

अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी ने अदालत से दो अनुरोध पत्र (एलआर) प्राप्त करने के लिए कानूनी प्रक्रियाएं आरंभ कर दी हैं ताकि इन्हें 2009 में हुए आईपीएल क्रिकेट टूर्नामेंट के मीडिया अधिकार देने में कथित धन शोधन की जांच के तहत दोनों देशों को भेजा जा सके. ईडी ने मुंबई जोनल कार्यालय से अपने एक दल को भी सिंगापुर भेजा है लेकिन अधिकारियों ने संकेत दिया कि वे धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक अन्य मामले की जांच का हिस्सा हैं.

हालांकि ऐसा समझा जाता है कि यह दल इस मामले के संबंध में भी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्र कर सकता है जहां ईडी ने विदेशी मुद्रा उल्लंघन कानूनों के तहत हाल में मोदी और बीसीसीआई – इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के अन्य अधिकारियों और अन्य निजी संस्थाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. इस मामले में दो आरोपी कंपनियां इन देशों में स्थित हैं और इसलिए अनुरोध पत्र भेजे जाने से ईडी को आईपीएल के संबंध में उन कंपनियों के लेन देन और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय करारों की अधिक जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी.
पूर्व बीसीसीआई प्रमुख एन श्रीनिवासन ने 2010 में चेन्नई पुलिस में इस समझौते के संबंध में मोदी और अन्य के खिलाफ प्रसारण अधिकार देने में धन का गबन करने और बीसीसीआई को धोखा देने का आरोप लगाया था. ईडी ने इस वर्ष शुरुआत में पीएमएलए के तहत अपना अलग आपराधिक मामला दर्ज किया था और इस करार की जांच के लिए बाद में गुडगांव और दिल्ली में छापे मारे थे.
एजेंसी के सूत्रों ने शुरुआत में संकेत दिए थे कि आईपीएल-बीसीसीआई और मोदी के खिलाफ एकमात्र आपराधिक मामला होने के कारण ऐसी संभावना जताई जा रही है कि ईडी के अधिकारी इस जांच की सकारात्मक प्रगति के आधार पर आईपीएल के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की दिशा में काम कर सकते हैं ताकि ललित मोदी को ब्रिटेन में उनके मौजूदा पते से प्रत्यर्पित करके यहां जांच के लिए लाया जा सके.
ललित मोदी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के जरिए यात्रा संबंधी लाभ प्राप्त करने और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से भी इसी प्रकार की मदद लेने के मामले में इस समय विवादों में घिरे हुए हैं. ईडी ने इस मामले में इस वर्ष विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत फरवरी में जारी कारण बताओ नोटिस में ललित मोदी पर फर्जी ईमेल भेजने और 125 करोड़ रुपये के अवैध फंडों के एक संदिग्ध लाभार्थी होने का आरोप लगाया है. ईडी ने 2009 में आयोजित टी-20 टूर्नामेंट के मीडिया अधिकार देने में 425 करोड रपए के विदेशी मुद्रा उल्लंघन की जांच के संबंध में ये आरोप लगाए हैं.
केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में छह वर्ष पुरानी फेमा जांच पूरी करने के बाद 14 लोगों और कंपनियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया था. इस करार को लागू करने में फेमा के प्रावधानों के प्रथम दृष्टया उल्लंघन के लिए ललित मोदी, श्रीनिवासन, आईपीएल के सीओओ सुंदर रमन, आईएमजी के उपाध्यक्ष और बीसीसीआई आईपीएल के कानूनी सलाहकार पॉल मैनिंग, वर्ल्ड स्पोर्ट्स ग्रुप (मॉरीशस) के अधिकारी, मल्टी स्क्रीन मीडिया सैटेलाइट (सिंगापुर) और अन्य कंपनियों के खिलाफ यह नोटिस जारी किया गया था. यह मामला हवाला और धनशोधन के उन दो दर्जन महत्वपूर्ण मामलों में से एक है जिनकी आईपीएल के विभिन्न संस्करणों के आयोजन के संबंध में ईडी जांच कर रहा है.
यह करार 2008 में किया गया था जब बीसीसीआई ने डब्ल्यूएसजी को 91 करोड़ 80 लाख डॉलर के भुगतान पर 10 वर्ष के लिए मीडिया अधिकार दिए थे. इसी वर्ष डब्ल्यूएसजी ने सोनी को आधिकारिक प्रसारणकर्ता बनाने के लिए एमएसएम के साथ भी करार किया था. इस करार को एक वर्ष बाद नौ वर्षों के एक करार में बदल दिया गया था जिसके लिए मल्टी स्क्रीन ने एक अरब 63 करोड़ डॉलर दिए थे.
इसके बाद ईडी ने 2009 में इन आरोपों की जांच शुरु की थी कि एमएसएम सिंगापुर ने डब्ल्यूएसजी मॉरीशस को 425 करोड का भुगतान कथित रुप से अनधिकृत तरीके से किया था जिससे विदेशी जमीन पर कथित अवैध पूंजी सृजित हुई जो कि इस संबंध में आरबीआई द्वारा जारी दिशा निर्देशों का उल्लंघन है.
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