आखिर क्यों विश्वकप 2015 की टीम में नहीं मिली सीनियर्स को जगह?
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Dec 2014 12:03 PM
विश्वकप 2015 का आगाज अगले वर्ष फरवरी में होगा. इससे पहले भारत ने अपनी टीम के संभावित खिलाड़ियों में से 30 का चयन कर लिया है. कल चयनकर्ताओं ने संदीप पाटिल के नेतृत्व में इन खिलाड़ियों का चयन किया. 30 संभावित खिलाड़ियों में उन पांच सीनियर खिलाड़ियों को जगह नहीं मिली है, जो भारतीय क्रिकेट […]
विश्वकप 2015 का आगाज अगले वर्ष फरवरी में होगा. इससे पहले भारत ने अपनी टीम के संभावित खिलाड़ियों में से 30 का चयन कर लिया है. कल चयनकर्ताओं ने संदीप पाटिल के नेतृत्व में इन खिलाड़ियों का चयन किया. 30 संभावित खिलाड़ियों में उन पांच सीनियर खिलाड़ियों को जगह नहीं मिली है, जो भारतीय क्रिकेट के दिग्गज तो माने ही जाते हैं, विश्वकप 2011 जिताने में भी उनकी अहम भूमिका रही थी.
इसमें कोई दो राय नहीं है कि वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, गौतम गंभीर, जहीर खान और हरभजन सिंह का भारतीय क्रिकेट जगत में अमूल्य योगदान है. इनके योगदान को भूल पाना असंभव है. लेकिन क्रिकेट के मैदान में जब एक मैच खेला जाता है, तो वहां पर योगदान नहीं, वर्तमान प्रदर्शन मायने रखता है. खिलाड़ियों के वर्तमान प्रदर्शन के आधार पर ही टीम को जीत या हार मिलती है.
हर खिलाड़ी से यह अपेक्षा होती है कि वह टीम की जीत के लिए खेलेगा, क्योंकि अगर टीम नहीं जीतती है, तो खिलाड़ी का योगदान कोई मायने नहीं रखता है. इस दृष्टिकोण से हमारे पांचों सीनियर खिलाड़ी विगत कुछ वर्षों से प्रदर्शन के आधार पर पिछड़ते जा रहे हैं. घरेलू क्रिकेट में भी उनका प्रदर्शन स्तरीय नहीं रहा है.
लेकिन 36 वर्ष पूरे करने के बाद उनकी गेंदबाजी में वह कौशल नजर नहीं आ रहा है. पिछले दो साल में एक भी वनडे नहीं खेल पाये हैं. फिल्डिंग भी कमजोर है और फिटनेस की समस्या से भी ग्रसित हैं.हरभजन सिंह की उम्र 34 वर्ष हो चुकी है. पिछले वर्ल्डकप के बाद से मात्र तीन मैचों में ही भारतीय टीम का हिस्सा बन पाये हैं. फिटनेस की समस्या तो है ही, प्रदर्शन भी लगातार गिरता जा रहा है. घरेलू क्रिकेट में भी फ्लॉप रहे हैं.
सुनील गावस्कर, कपिल देव, सचिन तेंदुलकर, ब्रायन लारा, रिकी पोंटिंग जैसे खिलाड़ी भी आजीवन नहीं खेल सके. ऐसे में अब हमें यह स्वीकार कर लेना चाहिए कि वीरू, युवी,भज्जी, गंभीर और जहीर का युग अब समाप्त हो गया और युवाओं को मौका देने का वक्त आ गया है. इस स्थिति को सकारात्मक तरीके से लेने की जरूरत है, तभी भारतीय क्रिकेट जीवित रह पायेगा. आज महेंद्र सिंह धौनी का टीम में कोई विकल्प नहीं, लेकिन यह स्थिति और कुछ ही वर्षों के लिए है. धौनी अब टीम के सबसे सीनियर खिलाड़ी बन चुके हैं.
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