जाली हस्ताक्षर मामले में बढ़ी शोभनदेव चट्टोपाध्याय की मुश्किलें, सीआईडी ने की तृणमूल विधायक से पूछताछ

Edited byMithilesh Jha
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पूछताछ के बाद मीडिया से बात करते टीएमसी के वरिष्ठ विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय. फोटो : एएनआई

Signature Forgery Case: पश्चिम बंगाल में लगातार 15 साल तक शासन करने वाली ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की एक चिट्ठी की वजह से तृणमूल कांग्रेस के विधायकों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. सीआईडी ने शनिवार को वरिष्ठ विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय से एक घंटे तक उनके आवास पर पूछताछ की. जानें क्या है पूरा मामला.

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Signature Forgery Case: पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति से संबंधित विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गये एक पत्र पर कथित जाली हस्ताक्षर मामले में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय की मुश्किलें बढ़ गयीं हैं. इस मामले की जांच के सिलसिले में क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) ने शनिवार को तृणमूल के वरिष्ठ विधायक से उनके आवास पर पूछताछ की.

भवानीपुर स्थित आवास पर सीआईडी के 2 अधिकारियों ने की पूछताछ

सूत्रों के अनुसार, सीआईडी की 2 सदस्यीय टीम भवानीपुर स्थित शोभनदेव चट्टोपाध्याय के आवास पर पहुंची और उनसे एक घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की. हाल के विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद तृणमूल विधायक दल पर नियंत्रण को लेकर तीखी राजनीतिक खींचतान के बीच सामने आये इस मामले की जांच में यह अब तक का ताजा घटनाक्रम है.

शोभनदेव बोले- आरोप लगाने वाले बैठक में मौजूद थे

चट्टोपाध्याय ने पूछताछ के बाद पत्रकारों से कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं. बालीगंज से विधायक शोभनदेव ने कहा- मैं जांच में 200 प्रतिशत से भी अधिक सहयोग करूंगा. लेकिन जिन लोगों ने हस्ताक्षर जालसाजी के आरोप लगाये हैं, उनसे भी पूछताछ की जानी चाहिए, क्योंकि प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किये जाने के समय सभी लोग मौजूद थे.

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Signature Forgery Case: स्पीकर ने पत्र को स्वीकार करने से कर दिया था इनकार

यह विवाद उस पत्र को लेकर है, जिसे ममता बनर्जी गुट ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस को सौंपा था. इस पत्र में नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए शोभनदेव चट्टोपाध्याय का नाम आगे किया गया था. पत्र पर तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के कथित हस्ताक्षर थे. हालांकि, दस्तावेज पर हस्ताक्षर जाली होने के आरोप सामने आने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने इस पत्र को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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