सूर्पणखा कौन थी? जानें पूर्व जन्म से लेकर राक्षसी रूप तक की पूरी कहानी

सूर्पणखा (एआई तस्वीर)
Surpanakha: सूर्पणखा रावण की बहन थी, जिसका उल्लेख रामायण में मिलता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार वह पूर्व जन्म में अप्सरा नयनतारा थी. श्राप के कारण उसे राक्षसी रूप मिला. उसकी कथा भगवान श्रीराम के वनवास काल की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जाती है.
आचार्य विनोद त्रिपाठी
Surpanakha: सूर्पणखा पूर्व जन्म में इन्द्र की प्रिय “नयनतारा” नामक अप्सरा थी. पृथ्वी पर “वज्रा” नामक एक ऋषि घोर तपस्या कर रहे थे. तब नयनतारा पर प्रसन्न होकर इन्द्र ने उसे ऋषि की तपस्या भंग करने हेतु पृथ्वी पर भेजा, परंतु वज्रा ऋषि की तपस्या भंग होने पर उन्होंने उसे राक्षसी होने का श्राप दे दिया.
भगवान प्राप्ति का संकल्प
ऋषि से क्षमा-याचना करने पर वज्रा ऋषि ने कहा कि राक्षस जन्म में ही तुम्हें प्रभु के दर्शन होंगे. नयनतारा ने मन में संकल्प किया कि यदि भगवान के दर्शन होंगे तो वह उन्हें प्राप्त कर लेगी, परंतु ऐसा नहीं हो सका. इसके बाद वही अप्सरा देह त्याग के पश्चात शूर्पणखा के रूप में राक्षसी बनी.
कुब्जा रूप में पुनर्जन्म
भगवान को प्राप्त करने की तीव्र इच्छा के कारण अगले जन्म में सूर्पणखा मथुरा नगरी में कुब्जा के रूप में जन्मी और भगवान श्रीकृष्ण को प्राप्त किया. उनके स्पर्श से उसे पुनः पूर्व जैसा लावण्य प्राप्त हुआ.
“सूर्पणखा रावण की बहन थी.
दुष्ट हृदय और कठोर स्वभाव वाली थी॥”
“पंचवटी में एक दिन वह वहां पहुंची.
दोनों कुमारों को देखकर विचलित हो गई॥”
गोस्वामी तुलसीदास जी के अनुसार पूर्व जन्म में सूर्पणखा अहिनी अर्थात सर्पिणी थी तथा शेषनाग की पत्नी थी. लक्ष्मण जी पूर्व जन्म में शेषनाग (सर्प) थे. इसी कारण श्रीराम ने सूर्पणखा को लक्ष्मण जी के पास भेजा, क्योंकि दोनों पूर्व जन्म में पति-पत्नी थे.
पंचवटी में आगमन
रामचरितमानस कथा के अनुसार पंचवटी के आश्रम में श्रीराम सीता के साथ सुखपूर्वक निवास कर रहे थे. एक दिन राम और लक्ष्मण वार्तालाप कर रहे थे, तभी अकस्मात रावण की बहन शूर्पणखा नामक राक्षसी वहां आ पहुंची. वह श्रीराम के तेजस्वी मुखमंडल, कमल-नयन और नीलकमल समान शरीर की कान्ति को देखकर मोहित हो गई.
राम का मुख सुन्दर था, जबकि शूर्पणखा का मुख अत्यंत कुरूप था. राम का शरीर सुडौल और आकर्षक था, जबकि शूर्पणखा का शरीर बेडौल और विकृत था. राम के नेत्र मनोहर थे, जबकि शूर्पणखा की आंखें डरावनी थीं. राम की वाणी मधुर थी, जबकि शूर्पणखा की वाणी कठोर और भयानक थी.
उसे देखकर उसके हृदय में वासना का भाव जागृत हो गया. इच्छानुसार रूप धारण करने वाली वह राक्षसी सुंदर रूप बनाकर राम के पास पहुंची और बोली “तुम कौन हो? राक्षसों के इस वन में तुम कैसे आ गए हो? तुम्हारा वेश तपस्वियों जैसा है, किन्तु हाथों में धनुष-बाण भी है और साथ में स्त्री भी है. ये बातें परस्पर विरोधी हैं. तुम अपना परिचय दो.”
राम ने सरल भाव से कहा “हे देवि! मैं अयोध्या के चक्रवर्ती महाराज दशरथ का ज्येष्ठ पुत्र राम हूं. मेरे साथ मेरा छोटा भाई लक्ष्मण और जनकपुरी के राजा जनक की पुत्री तथा मेरी पत्नी सीता हैं. पिता की आज्ञा से हम चौदह वर्ष के लिए वनवास में आए हैं.”
राम से विवाह प्रस्ताव
राम का परिचय सुनकर शूर्पणखा बोली “मेरा नाम शूर्पणखा है. मैं लंका के महाराज रावण की बहन हूँहूं कुम्भकर्ण और विभीषण मेरे भाई हैं. खर और दूषण भी मेरे भाई हैं. मैं सर्व प्रकार से सम्पन्न हूं और इच्छानुसार विचरण कर सकती हूँ. तुम्हारी पत्नी सीता मेरे योग्य नहीं है. तुम मुझसे विवाह कर लो.”
राम मुस्कराकर बोले “भद्रे! मैं विवाहित हूं. मेरा भाई लक्ष्मण अविवाहित है, यदि तुम चाहो तो उससे विवाह कर सकती हो.”
लक्ष्मण के पास जाकर शूर्पणखा ने विवाह का प्रस्ताव रखा. लक्ष्मण ने व्यंग्य करते हुए कहा “मैं तो राम का सेवक हूं. यदि तुम मुझसे विवाह करोगी तो दासी कहलाओगी. अच्छा यही होगा कि तुम राम से ही विवाह कर लो.”
लक्ष्मण का व्यंग्य
लक्ष्मण के व्यंग्य को न समझकर शूर्पणखा ने उसे प्रशंसा समझ लिया. वह पुनः राम के पास गई और क्रोध में बोली “तुम इस कुरूपा सीता के कारण मेरा अपमान कर रहे हो. पहले मैं इसे समाप्त कर देती हूँ, फिर तुमसे विवाह करूंगी.”
सीता पर आक्रमण
इतना कहकर वह सीता पर आक्रमण करने दौड़ी. तब राम ने लक्ष्मण से कहा “हे वीर! इस दुष्टा से अधिक वाद-विवाद उचित नहीं है. इसे इसके किसी अंग से विहीन कर दो.” राम की आज्ञा पाकर लक्ष्मण ने तुरंत खड्ग निकाला और शूर्पणखा के नाक-कान काट दिए.
घोर पीड़ा और अपमान से वह रोती हुई अपने भाइयों खर और दूषण के पास पहुंची और पूरी घटना उन्हें सुनाई तथा उनके सामने गिर पड़ी.
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By Neha Kumari
प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.
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