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Vivah Panchami 2025: रामचरितमानस की इन शुभ चौपाइयों का जरूर करें पाठ, मिलेगा दांपत्य सुख और सौभाग्य

18 Nov, 2025 12:45 pm
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Vivah Panchami Chaupai path

रामचरितमानस की इन शुभ चौपाइयों का जरूर करें पाठ

Vivah Panchami 2025 इस साल मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि यानि 25 नवंबर 2025 को विवाह पंचमी मनाई जाएगी. आइए जानते हैं ये दिन क्यों खास है, और वह कौन-सी चौपाइयां हैं जिनका पाठ इस दिन अवश्य करना चाहिए.

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Vivah Panchami 2025: यह दिन भगवान श्रीराम और माता सीता के पवित्र विवाह का याद कराने वाला अत्यंत शुभ पर्व है. इसी तिथि को मिथिला में उनका दिव्य विवाह संपन्न हुआ था, इसलिए इस दिन राम–सीता की पूजा करने से मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं. श्रद्धा से की गई प्रार्थना से घर में प्रेम, सामंजस्य, सुख-संतोष और वैवाहिक जीवन में स्थिरता आती है.

चौपाइयों के पाठ का लाभ

विवाह पंचमी के दिन रामचरितमानस की चौपाइयों का पाठ करना अत्यंत मंगलकारी माना गया है. मान्यता है कि इन चौपाइयों के उच्चारण से मन की अशांति दूर होती है, रिश्तों में मधुरता आती है और विवाह संबंधित बाधाएं भी समाप्त होती हैं. जो लोग विवाह योग्य हैं, उनके लिए यह दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है.

विवाह पंचमी क्यों है खास?

हिंदू धर्म में विवाह पंचमी का दिन बेहद खास माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था. इसलिए इसे उनके विवाह दिवस के रूप में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन मंदिरों में भव्य पूजा और उत्सव होते हैं, वहीं कई लोग घर पर भी पूजा और आराधना करते हैं.

विवाह पंचमी तिथि और शुभ मुहूर्त

तारीख: मंगलवार, 25 नवंबर 2025

पंचमी तिथि शुरू: सोमवार, 24 नवंबर 2025, रात 9:22 बजे.

पंचमी तिथि समाप्त: मंगलवार, 25 नवंबर 2025, शाम 10:56 बजे

शुभ मुहूर्त: 25 नवंबर की सुबह का समय विशेष रूप से शुभ माना गया है.

रामचरितमानस की चौपाइयां

हरि अनंत हरि कथा अनंता ।
कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता ॥
रामचंद्र के चरित सुहाए ।
कलप कोटि लगि जाहिं न गाए ॥

जा पर कृपा राम की होई ।
ता पर कृपा करहिं सब कोई ॥
जिनके कपट, दम्भ नहिं माया ।
तिनके हृदय बसहु रघुराया ॥

अगुण सगुण गुण मंदिर सुंदर, भ्रम तम प्रबल प्रताप दिवाकर ।
काम क्रोध मद गज पंचानन, बसहु निरंतर जन मन कानन।।

कहु तात अस मोर प्रनामा ।
सब प्रकार प्रभु पूरनकामा ॥
दीन दयाल बिरिदु संभारी।
हरहु नाथ मम संकट भारी॥

होइहि सोइ जो राम रचि राखा ।
को करि तर्क बढ़ावै साखा ॥
अस कहि लगे जपन हरिनामा ।
गईं सती जहँ प्रभु सुखधामा ॥

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JayshreeAnand

लेखक के बारे में

By JayshreeAnand

कहानियों को पढ़ने और लिखने की रुचि ने मुझे पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. सीखने और समझने की इस यात्रा में मैं लगातार नए अनुभवों को अपनाते हुए खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करती हूं. वर्तमान मे मैं धार्मिक और सामाजिक पहलुओं को नजदीक से समझने और लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हूं.

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