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Vipreet Raj Yoga 2025: शनि होंगे मार्गी, बनेगा विपरीत राजयोग, जानें कैसे चमक सकती है किस्मत

Updated at : 18 Nov 2025 9:55 AM (IST)
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Vipreet Raj Yoga 2025

बनने वाला है विपरीत राजयोग

Vipreet Raj Yoga 2025: शनि के मार्गी होने के साथ ही आने वाले दिनों में विपरीत राजयोग का शुभ संयोग बन रहा है. ज्योतिष के अनुसार यह योग कई लोगों की किस्मत चमका सकता है, खासकर उन राशियों के लिए जिन्हें लंबे समय से संघर्षों का सामना करना पड़ रहा है. जानिए इसका सीधा प्रभाव आपके जीवन पर कैसा पड़ेगा.

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Vipreet Raj Yoga 2025: ज्योतिष शास्त्र में ग्रह, राशियाँ, नक्षत्र और ग्रहण का बहुत खास महत्व माना जाता है. इनमें भी शनि को न्याय और दंड का देवता कहा गया है, इसलिए ज्योतिष में इनकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती है. शनि एक राशि से दूसरी राशि में जाने में करीब ढाई साल लेते हैं, और इसी वजह से किसी एक राशि में दोबारा आने में लगभग 30 साल लग जाते हैं.

कब लगेगा विपरीत राजयोग ?

इस समय शनि मीन राशि में गोचर कर रहे हैं और 28 नवंबर 2025 को मीन में ही वक्री होंगे. शनि का यह परिवर्तन एक खास योग—महा विपरीत राजयोग—का निर्माण करेगा, जिसे ज्योतिष में बहुत प्रभावशाली और दुर्लभ माना गया है.

विपरीत राजयोग क्या होता है ?

किसी व्यक्ति की कुंडली में विपरीत राजयोग का बनना बेहद शुभ माना जाता है. आमतौर पर कुंडली के छठे, आठवें और बारहवें भाव को अशुभ समझा जाता है. लेकिन जब ये अशुभ भाव आपस में जुड़ जाएँ, द्दष्टि संबंध बना लें या इनके स्वामी ग्रह एक साथ बैठें, तब उल्टा प्रभाव शुभ हो जाता है. यही स्थिति विपरीत राजयोग कहलाती है. ज्योतिष के अनुसार, जब छठे, आठवें और बारहवें भाव के स्वामी ग्रह युति करें या आपसी द्दष्टि बनाएं, तो यह योग बनता है. इससे व्यक्ति को जीवन में कई कठिन परिस्थितियों के बावजूद सफलता और सम्मान मिलता है.

सरल विपरीत राजयोग

जब छठे या बारहवें भाव का स्वामी ग्रह आठवें भाव में बैठ जाए, या आठवें भाव का स्वामी छठे या बारहवें भाव में स्थित हो, तो सरल विपरीत राजयोग बनता है. यह योग व्यक्ति को बेहद मजबूत, मेहनती और संघर्षों से न हारने वाला बनाता है. ऐसे लोग मुश्किल हालात में भी रास्ता निकाल लेते हैं और अपने पराक्रम से धन, यश और मान-सम्मान हासिल करते हैं.

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विमल विपरीत राजयोग

विमल विपरीत राजयोग तब बनता है जब छठे, आठवें या बारहवें भाव का स्वामी ग्रह बारहवें भाव में बैठा हो, या बारहवें भाव का स्वामी छठे या आठवें भाव में स्थित हो. यह योग व्यक्ति को जीवन में सुख, शांति और संपन्नता प्रदान करता है. ऐसे जातक अक्सर मानसिक रूप से मजबूत होते हैं और जीवन में स्थिरता प्राप्त करते हैं.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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