विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन करें इस व्रत कथा का पाठ, पूरी होगी हर मनोकामना

Published by : Neha Kumari Updated At : 04 Apr 2026 8:53 AM

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भगवान गणेश

Vikata Sankashti Chaturthi Vrat Katha: विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा के साथ व्रत कथा का पाठ अवश्य करें. मान्यता है कि व्रत कथा के पाठ से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं. साथ ही फल भी दोगुना प्राप्त होता है.

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Vikata Sankashti Chaturthi Vrat Katha: विकट संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है. हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह की चतुर्थी तिथि को यह व्रत रखा जाता है. वैशाख मास में पड़ने वाली इस चतुर्थी को विकट संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से आराधना करने और व्रत रखने से जीवन के सभी विकट, यानी बाधाएँ और संकट दूर हो जाते हैं.

विकट संकष्टी व्रत कथा

प्राचीन काल में धर्मकेतु नाम का एक ब्राह्मण रहता था. उसकी दो पत्नियां थीं- सुशीला और चंचला. सुशीला स्वभाव से अत्यंत धार्मिक और सरल थी, जो अपना अधिकतर समय व्रत और उपवास में व्यतीत करती थी, जबकि चंचला का धर्म-कर्म में कोई मन नहीं था और वह सांसारिक सुखों में मग्न रहती थी.

समय के साथ सुशीला को एक पुत्री और चंचला को एक पुत्र प्राप्त हुआ. इस पर चंचला ने सुशीला को ताना देते हुए कहा कि इतने व्रत करने के बाद भी उसे केवल एक पुत्री मिली, जबकि बिना किसी पूजा-पाठ के उसे पुत्र की प्राप्ति हुई है. चंचला की कड़वी बातें सुनकर सुशीला को बुरा लगा, लेकिन उसने पूरे श्रद्धा भाव से विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया. उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान गणेश ने उसे एक तेजस्वी पुत्र का वरदान दिया.

कुछ समय बाद पति की मृत्यु हो जाने पर दोनों पत्नियां अलग-अलग रहने लगीं. सुशीला का पुत्र बड़ा होकर अत्यंत विद्वान बना, जिससे उनके घर में सुख-समृद्धि आ गई. इसके विपरीत, चंचला का पुत्र आलसी और गुणहीन निकला. सुशीला की उन्नति देखकर चंचला के मन में जलन उत्पन्न हो गई. एक दिन अवसर पाकर उसने सुशीला के पुत्र को कुएँ में धकेल दिया. लेकिन सुशीला की भक्ति और व्रत के प्रभाव से स्वयं भगवान गणेश ने उसके पुत्र के प्राणों की रक्षा की.

जब चंचला ने देखा कि भगवान स्वयं सुशीला के परिवार की रक्षा कर रहे हैं, तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ. उसने सुशीला से माफी मांगी. सुशीला के मार्गदर्शन में चंचला ने भी संकष्टी चतुर्थी का व्रत करना शुरू किया, जिससे उसका जीवन सुधर गया और उसके पुत्र को भी सद्बुद्धि प्राप्त हुई.

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लेखक के बारे में

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नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.

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