वैशाख का पावन महीना आरंभ, सुख-समृद्धि के लिए करें ये शुभ कार्य, भूलकर भी न करें ये गलतियां
Published by : Neha Kumari Updated At : 03 Apr 2026 5:13 PM
भगवान विष्णु
Vaishakh 2026: वैशाख का महीना भगवान विष्णु की आराधना, स्नान और दान समेत अन्य धार्मिक कार्यों के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. लेकिन इस समय की गई छोटी सी गलती भी पुण्य कार्यों के फल को समाप्त कर सकती है. आइए जानते हैं कि इस समय क्या करना चाहिए और क्या नहीं.
Vaishakh 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह की समाप्ति के बाद वर्ष का दूसरा महीना वैशाख शुरू हो गया है. वैशाख माह का आरंभ 3 अप्रैल से हो गया है, जो 1 मई तक चलेगा. भगवान विष्णु को समर्पित इस महीने को माधव मास भी कहा जाता है. स्कंद पुराण के अनुसार, “न माधवसमो मासो” अर्थात् वैशाख (माधव मास) के समान कोई और महीना नहीं है. आइए जानते हैं इस पावन महीने में क्या करना शुभ होता है और किन कार्यों से बचना चाहिए.
वैशाख में क्या करें?
- जल दान का महत्व: वैशाख में गर्मी का प्रभाव बढ़ जाता है, इसलिए जल दान को सबसे बड़ा पुण्य माना गया है. राहगीरों को जल पिलाना, पशु-पक्षियों के लिए पानी रखना और मंदिर में जल से भरा घड़ा दान करना अत्यंत फलदायी होता है.
- सूर्योदय पूर्व स्नान: शास्त्रों के अनुसार, वैशाख में सूर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी, सरोवर या घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है.
- सत्तू और मौसमी फल: इस महीने सत्तू, घड़ा, पंखा, छाता और खरबूजे का दान करना चाहिए. ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को शीतल वस्तुएं भेंट करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है.
- पीपल की पूजा: वैशाख में पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाना और दीपक जलाना शुभ माना जाता है, क्योंकि इसमें देवताओं का वास होता है.
- भगवान विष्णु की पूजा: यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित है. इसलिए इस महीने विधि-विधानपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा और मंत्रों का जाप करना चाहिए.
वैशाख में क्या न करें?
- देर तक न सोएं: वैशाख के महीने में सूर्योदय के बाद तक सोना अशुभ माना गया है. इससे स्वास्थ्य और पुण्य दोनों की हानि होती है.
- तामसिक भोजन से परहेज: इस माह में मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक आहार का त्याग करना चाहिए. इस महीने केवल सात्विक भोजन ग्रहण करें.
- जल की बर्बादी न करें: चूंकि यह महीना जल सेवा के लिए समर्पित है, इसलिए पानी की बर्बादी करना पाप माना जाता है.
- क्रोध से बचें: भक्ति के इस महीने में किसी का अपमान न करें और न ही क्रोध करें. अपनी वाणी में मधुरता बनाए रखें.
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