आज है वैशाख संकष्टी चतुर्थी व्रत, जानिए शुभ मुहूर्त पूजा विधि और व्रत नियम
Published by : Radheshyam Kushwaha Updated At : 05 Apr 2026 6:10 AM
गणेश जी की पूजा
Sankashti Chaturthi April 2026: वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को “विकट संकष्टी चतुर्थी” के नाम से भी जाना जाता है, जो भगवान गणेश के विकट स्वरूप को समर्पित है. इस दिन व्रत करने पर सभी कष्ट, बाधाएं और संकट दूर होते हैं
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Sankashti Chaturthi April 2026: वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का दिन अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है. इस वर्ष यह पावन व्रत आज 5 अप्रैल दिन रविवार को रखा जाएगा. इस दिन भक्तगण संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत रखकर विघ्नहर्ता प्रथम पूज्य भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत को करने से जीवन के सभी कष्ट, बाधाएं और संकट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है.
विकट संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रमा का वृश्चिक राशि में गोचर
विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रमा का वृश्चिक राशि में गोचर विशेष ज्योतिषीय महत्व रखता है, इस दिन चंद्रमा तुला राशि से निकलकर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे. वृश्चिक राशि में चंद्रमा को नीच का माना जाता है, इसलिए इस दिन भावनात्मक उतार-चढ़ाव, मानसिक अस्थिरता और संवेदनशीलता बढ़ सकती है.
विकट संकष्टी चतुर्थी पर चंद्र दर्शन के बाद व्रत पारण
वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को “विकट संकष्टी चतुर्थी” के नाम से भी जाना जाता है, जो भगवान गणेश के विकट स्वरूप को समर्पित है. व्रतधारी दिनभर उपवास रखकर रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद अर्घ्य अर्पित करते हैं और फिर व्रत का पारण करते हैं. यह व्रत मनोकामना पूर्ति और कष्ट निवारण के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है.
विकट संकष्टी तिथि 2026
- वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पारंभ: 5 अप्रैल 2026 दिन रविवार को सुबह 10 बजकर 04 मिनट पर
- वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि समाप्त: 6 अप्रैल 2026 दिन सोमवार को दोपहर 02 बजकर 59 मिनट पर
- व्रत की तारीख: चंद्रोदय के अनुसार, विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 अप्रैल 2026 दिन रविवार को रखा जाएगा
संकष्टी चतुर्थी व्रत पारण का सही समय
महावीर पंचांग के अनुसार, 5 अप्रैल 2026 को संकष्टी गणेश चतुर्थी का व्रत कर चंद्रमा को अर्घ्य रात 9 बजकर 21 मिनट पर दिया जाएगा, इसके बाद विधिपूर्वक व्रत का पारण किया जाएगा, जिससे भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है.
विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व
विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत विशेष रूप से संकटों को दूर करने के लिए किया जाता है. “संकष्टी” का अर्थ ही होता है संकटों का नाश करने वाला, इसलिए इस दिन गणपति बप्पा की आराधना करने से व्यक्ति के जीवन में आ रही परेशानियां कम होती हैं. इस व्रत को करने से बुद्धि, ज्ञान और सफलता की प्राप्ति होती है.
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By Radheshyam Kushwaha
राधेश्याम कुशवाहा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से MJ (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत भोपाल से प्रकाशित राज एक्सप्रेस समाचार पत्र से की. इसके बाद उन्होंने समय जगत, राजस्थान पत्रिका और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं. वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म, अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 13 वर्षों का अनुभव रखने वाले राधेश्याम कुशवाहा को ज्योतिष शास्त्र, पंचांग गणना, ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, व्रत-त्योहारों की तिथियों तथा शुभ मुहूर्तों का गहन ज्ञान है. अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वे धर्म-अध्यात्म और राशिफल से जुड़ी सटीक, तथ्यपरक एवं विश्वसनीय खबरें लिखते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि है. इसके अलावा राजनीति, अपराध और प्रेरणादायक (पॉजिटिव) विषयों पर लेखन में भी उनकी गहरी रुचि है.
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