ePaper

Vat Savitri Vrat Katha: वट सावित्री व्रत के शुभ दिन पर जानें सावित्री और सत्यवान की प्रेरणादायक कथा

Updated at : 26 May 2025 4:45 AM (IST)
विज्ञापन
Vat Savitri Vrat Katha in Hindi

Vat Savitri Vrat Katha

Vat Savitri Vrat Katha: वट सावित्री व्रत के अवसर पर सुनाई जाने वाली सावित्री और सत्यवान की कहानी महिलाओं के दृढ़ संकल्प, प्रेम और साहस का प्रतीक है. इस प्रेरणादायक कहानी में सावित्री अपने तप, भक्ति और बुद्धिमत्ता के माध्यम से यमराज से अपने पति का जीवन पुनः प्राप्त कर लेती है. जानिए इस व्रत की संपूर्ण पौराणिक कथा.

विज्ञापन

Vat Savitri Vrat Katha: वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण व्रत है. आज 26 मई 2025 दिन सोमवार को ये व्रत रखा जा रहा है. इस दिन महिलाएं वट (बरगद) के पेड़ की पूजा करती हैं, वट सावित्री व्रत कथा का पाठ करती हैं और अपने पति की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. वट सावित्री व्रत कथा में सावित्री द्वारा अपने तप, भक्ति और दृढ़ संकल्प के माध्यम से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाने की कथा इस व्रत को विशेष महत्व प्रदान करती है.

वट वृक्ष दीर्घायु, स्थायित्व और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. यह व्रत वैवाहिक जीवन में प्रेम, समर्पण और विश्वास को मजबूत करने वाला माना जाता है. आइए वट सावित्री व्रत कथा का पाठ करें.

वट सावित्री व्रत की इस आरती से मिलेगा दांपत्य जीवन में सुख और समृद्धि

एक समय मद देश में अश्वपति नामक एक राजा थे. उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए सावित्री देवी के साथ व्रत और पूजा की और पुत्री होने का वर मांगा. इस पूजा के उपरांत उनके यहाँ एक सर्वगुण संपन्न कन्या हुई, जिसका नाम सावित्री रखा गया. जब सावित्री विवाह के योग्य हुई, तो राजा ने उससे अपने वर का चयन करने को कहा. एक दिन महर्षि नारद और अश्वपति वहाँ थे, तभी सावित्री अपने वर का चयन करके लौटी. नारद जी ने वर के बारे में पूछा तो सावित्री ने बताया कि राजा द्यमृत्य सेन, जिनका राज्य छिन लिया गया था, अपनी पत्नी और पुत्र के साथ वन में भटक रहे थे, उनके पुत्र सत्यवान को मैंने अपने वर के रूप में चुना है. नारद जी ने ग्रहों की गणनाएँ करके कहा कि राजा, आपकी पुत्री ने एक योग्य वर का चयन किया है. सत्यवान धर्मात्मा और गुणी है. लेकिन उसमें एक बड़ा दोष है, वह अल्पायु है और एक वर्ष के बाद उसकी मृत्यु हो जाएगी.

 कैसे करें वट सावित्री व्रत की पूजा? जानिए संपूर्ण विधि

नारद जी की ऐसी भविष्यवाणी सुनकर उन्होंने अपनी कन्या से दूसरा वर चुनने के लिए कहा. इस पर सावित्री ने कहा कि आर्य कन्या एक बार अपने वर का चयन करती हैं और मैं सत्यवान का चयन कर चुकी हूं और किसी और को अपने ह्दय में स्थान नहीं दे सकती हूं.

Vat Savitri Vrat 2025 आज, इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, बन रहा है दुर्लभ संयोग

सावित्री ने आगे कहा-पिताजी अब मैं सत्यवान को अपना पति मान चुकी हूं. सावित्री ने सत्यवान की मत्यु का समय जान लिया. राजा ने सत्यवान के साथ सावित्री का विवाह कर दिया. वह वन में अपने सास ससुर की सेवा करते हुए रहने लगी. जब सावित्री 12 साल की हुई तो उसे नारद जी का वचन परेशान करने लगा. वह उपवास करने लगी और पितरों का पूजन किया. वह रोज की तरह सत्यवान के साथ लकड़ियां काटने वन में गई.

सत्यवान जैसे ही लकड़ी काटने के लिए पेड़ पर गया, उसके सिर में दर्द होने लगा. वह नीचे उतर आया और सावित्री ने उसका सिर अपनी गोद में रख लिया. सावित्री का मन भय से कांप रहा था, तभी उसने यमराज को सामने आते देखा. यमराज सत्यवान की आत्मा को लेकर चल दिए और सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चल पड़ी. यमराज ने उसे वापस जाने के लिए कहा. लेकिन सावित्री ने कहा कि पत्नी की सार्थकता इसी में है कि वह पति की छाया की तरह सेवा करे. उसने कहा कि उनके पीछे जाना ही मेरा स्त्रीधर्म है. सावित्री के धर्मयुक्त वचनों को सुनकर यमराज प्रसन्न हो गए.

यमराज ने पीछे मुड़कर देखा और सावित्री से कहा-आगे मत बढ़ो, मैंने तुम्हें मुंह मांगा वर दे दिया है. यमराज ने कहा कि तुम अपने पति के प्राणों के अलावा कुछ भी वरदान मांग सकती हो. इस पर सावित्री ने कहा कि मुझे मेरे सास-ससुर की आंखों की ज्योति दे दो. इसके बाद भी उसने हार नहीं मानी और फिर यमराज के साथ चल दी. यमराज के समझाने पर उसने कहा कि पति के बिना नारी जीवन की कोई सार्थकता नहीं है? पति के साथ जाना ही मेरा कर्तव्य है. सावित्री की निष्ठा को देखकर यमराज ने कहा, तुम कुछ भी वर मांग सकती हो, लेकिन यह विधि का विधान है. इस पर सावित्री ने उत्तर दिया कि महाराज, आप मुझे 100 पुत्रों की मां बनने का वरदान दें. यमराज ने तथास्तु कहकर आगे बढ़ने का निर्णय लिया. फिर यमराज ने सावित्री से कहा कि अब आगे मत बढ़ो, मैंने तुम्हें मुंहमागा वरदान दे दिया है. इस पर सावित्री ने कहा, आपने मुझे वरदान तो दे दिया, लेकिन आप मुझे बताएं कि बिना पति के मैं 100 संतानों की मां कैसे बनूंगी. मुझे मेरा पति वापस मिलना चाहिए. यमराज ने सावित्री की निष्ठा, पति भक्ति और शक्तिशाली वचनों के कारण सत्यवान के प्राण वापस कर दिए.

इसके बाद सावित्री उसी वटवृक्ष के पास गई, उसकी परिक्रमा की और उसके पति के प्राण वापस आ गए हैं. उसके सास-ससुर की आंखें भी वापस आ गईं. यमराज के आशीर्वाद से सावित्री सौ पुत्रों की मां बनी. जैसे सावित्री ने यमराज से अपने पति के प्राणों की रक्षा की, वैसे सभी के पति के प्राणों की रक्षा हो और सभी का सुहाग अमर रहे. बोलो सत्यवान सावित्री की जय

विज्ञापन
Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola