Shiv Puran के अनुसार त्रिलोचन शिव की कृपा पाने का रहस्य

Published by : Ashi Goyal Updated At : 14 Jul 2025 8:24 PM

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Shiv Puran

Shiv Puran : उपरोक्त पंच साधनाएं त्रिलोचन शिव की कृपा पाने के प्रभावशाली उपाय हैं, जो जीवन को आध्यात्मिक, शांत और समृद्ध बना सकती हैं.

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Shiv Puran : शिव पुराण में महादेव को “त्रिलोचन” यानी तीन नेत्रों वाले शिव कहा गया है. उनके तीसरे नेत्र का संबंध केवल विनाश नहीं, बल्कि जागरण, विवेक और चेतना से भी है. त्रिलोचन रूप में शिव समस्त ब्रह्मांड के ज्ञाता हैं, और उनकी कृपा प्राप्त करना साधक को संसार के बंधनों से मुक्त करता है. आइए जानते हैं शिव पुराण के अनुसार त्रिलोचन शिव की कृपा पाने के दिव्य रहस्य, जिन्हें अपनाकर कोई भी साधक शिव के निकट पहुंच सकता है:-

– ब्रह्म मुहूर्त में ध्यान- त्रिनेत्र की ऊर्जा से जुड़ने का समय

शिव पुराण में बताया गया है कि त्रिलोचन शिव का तीसरा नेत्र ज्ञान और ध्यान का प्रतीक है.
“प्रत्यह ब्रह्म मुहूर्ते शिवं ध्यानं समाचरेत्”
– इसका अर्थ है कि हर दिन प्रातः 4 बजे से 6 बजे के बीच शिव का ध्यान करने से साधक की आत्मा शिव के त्रिनेत्र से जुड़ जाती है. यह समय ब्रह्मांडीय ऊर्जा को ग्रहण करने के लिए सर्वोत्तम होता है.

– त्रयंबक मंत्र का जाप

महामृत्युंजय मंत्र को शिव के त्रिनेत्र की शक्ति का प्रतीक माना गया है:
“ओम त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्…”
इस मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करने से शिव की कृपा साधक पर होती है और रोग, भय, मृत्यु जैसी बाधाओं से मुक्ति मिलती है.

– तीन तत्वों का संयम – शरीर, वाणी और मन

त्रिलोचन शिव केवल तीसरे नेत्र से नहीं, बल्कि शरीर (कर्म), वाणी (भाषा) और मन (विचार) के संतुलन से प्रसन्न होते हैं. शिव पुराण में कहा गया है:
“त्रिधा शुद्धिः शिवाराधनस्य मूलम्।”
शिव आराधना तब सफल होती है जब साधक के कर्म, वचन और चित्त शुद्ध हों। यह त्रिगुणों का संतुलन ही शिव को प्रिय होता है.

– शिवलिंग पर त्रिधातु से अभिषेक

शिव पुराण में उल्लेख है कि त्रिलोचन शिव की कृपा पाने हेतु तीन चीजों से अभिषेक करना विशेष फलदायक है:
शुद्ध गंगाजल

गाय का दूध

तीन बेलपत्र (त्रिपत्री)

इन तीनों का संयम शिवलिंग पर अर्पित करने से शिव के तीनों नेत्रों से कृपा प्राप्त होती है.

– मौन व्रत और संयम

शिव को “मौन का अधिपति” कहा गया है. त्रिलोचन शिव की कृपा के लिए सप्ताह में एक दिन मौन व्रत रखने की परंपरा का वर्णन शिव पुराण में मिलता है.
“मौनं सर्वार्थसिद्धये”
मौन साधना से साधक का मन शिव से एकाकार होता है, और तीसरे नेत्र की चेतना जाग्रत होती है.

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शिव के त्रिलोचन रूप को समझना केवल एक रूप की पूजा नहीं है, बल्कि यह आत्मा, चेतना और विवेक की ऊंचाईयों तक पहुंचने का मार्ग है. उपरोक्त पंच साधनाएं त्रिलोचन शिव की कृपा पाने के प्रभावशाली उपाय हैं, जो जीवन को आध्यात्मिक, शांत और समृद्ध बना सकती हैं.

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