गरुड़ पुराण: क्या परिवार के लोग पहन सकते हैं मृतक के गहने? जानिए शास्त्रों का मत 

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Garud Puran

दिवंगत व्यक्ति के गहनों की सांकेतिक तस्वीर (एआई)

Garud Puran: गरुड़ पुराण में मृतक के गहनों के उपयोग को लेकर कुछ विशेष नियम बताए गए हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नियमों की अनदेखी करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार, पारिवारिक मतभेद, तनाव और कलह बढ़ने की आशंका हो सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि गरुड़ पुराण के अनुसार मृतक के गहनों का क्या करना चाहिए.

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Garud Puran: सनातन धर्म में मृत्यु को एक अटल सत्य माना गया है. किसी प्रियजन के निधन के बाद परिवार के लोग अक्सर उनकी यादों को सहेजने के लिए उनकी उपयोग की गई वस्तुएं, जैसे कपड़े और आभूषण, अपने पास रख लेते हैं. कई लोग मृतक के सोने-चांदी के गहने भी पहनने लगते हैं. लेकिन क्या ऐसा करना उचित है? 18 महापुराणों में से एक गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ के बीच संवाद के माध्यम से मृत्यु, आत्मा और परलोक से जुड़े विषयों का विस्तार से वर्णन किया गया है. इसमें यह भी बताया गया है कि मृत्यु के बाद किसी व्यक्ति की वस्तुओं, विशेषकर उसके आभूषणों, के संबंध में क्या नियम माने गए हैं. आइए जानते हैं शास्त्रों के अनुसार इसके बारे में क्या कहा गया है.

क्या मृतक के गहने पहनने चाहिए?

गरुड़ पुराण के अनुसार, मनुष्य का अपने आभूषणों, विशेषकर सोने और धन-संपत्ति से गहरा भावनात्मक लगाव होता है. मृत्यु के बाद भले ही शरीर नष्ट हो जाता है, लेकिन आत्मा का मोह तुरंत समाप्त नहीं होता. ऐसी मान्यता है कि यदि परिवार का कोई सदस्य मृतक के गहनों को सीधे धारण कर लेता है, तो उन वस्तुओं के प्रति आत्मा का मोह बना रह सकता है. इससे आत्मा की मोक्ष यात्रा में बाधा उत्पन्न होने की संभावना मानी जाती है. साथ ही, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मृतक की ऊर्जा उन वस्तुओं से जुड़ी रह सकती है, जिसका प्रभाव पहनने वाले पर पड़ सकता है. इसी कारण सीधे तौर पर ऐसे गहने पहनने से बचने की सलाह दी जाती है.

किन परिस्थितियों में पहने जा सकते हैं ये गहने?

शास्त्रों में कुछ विशेष परिस्थितियों में इन गहनों के उपयोग की अनुमति बताई गई है.

1. उपहार में मिले आभूषण

यदि किसी व्यक्ति ने अपने जीवनकाल में अपनी इच्छा से प्रेमपूर्वक आपको कोई आभूषण उपहार स्वरूप दिया था, तो उसे पहनने में कोई दोष नहीं माना जाता.

2. पिघलाकर नया रूप देना

यदि आप मृतक के गहनों का उपयोग करना चाहते हैं, तो उन्हें पिघलवाकर नए डिजाइन में बनवाना बेहतर माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे उस आभूषण से जुड़ा पुराना मोह और भावनात्मक संबंध समाप्त हो जाता है.

आत्मा की शांति के लिए क्या करें?

यदि आप अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना करते हैं, तो उनकी प्रिय एवं व्यक्तिगत वस्तुओं को शुद्ध करने के बाद किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को दान करना शुभ माना जाता है. यदि दान करना संभव न हो, तो धार्मिक परंपराओं के अनुसार उन्हें किसी पवित्र नदी में विसर्जित भी किया जा सकता है. मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि बनी रहती है.

यह भी पढ़ें: Garud Puran: मृत्यु के बाद मृतक के पलंग और बिस्तर का क्या करना चाहिए? जानें क्या कहता है गरुड़ पुराण

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

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नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

डिजिटल पत्रकारिता में उन्होंने धर्म, ज्योतिष और भारतीय परंपराओं से जुड़े विषयों पर विशेष अनुभव हासिल किया है. उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सटीक, विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को आसानी से समझ सकें.

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