गरुड़ पुराण: क्या परिवार के लोग पहन सकते हैं मृतक के गहने? जानिए शास्त्रों का मत 

Published by : Neha Kumari Updated At : 07 Jun 2026 12:06 PM

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दिवंगत व्यक्ति के गहनों की सांकेतिक तस्वीर (एआई)

Garud Puran: गरुड़ पुराण में मृतक के गहनों के उपयोग को लेकर कुछ विशेष नियम बताए गए हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नियमों की अनदेखी करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार, पारिवारिक मतभेद, तनाव और कलह बढ़ने की आशंका हो सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि गरुड़ पुराण के अनुसार मृतक के गहनों का क्या करना चाहिए.

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Garud Puran: सनातन धर्म में मृत्यु को एक अटल सत्य माना गया है. किसी प्रियजन के निधन के बाद परिवार के लोग अक्सर उनकी यादों को सहेजने के लिए उनकी उपयोग की गई वस्तुएं, जैसे कपड़े और आभूषण, अपने पास रख लेते हैं. कई लोग मृतक के सोने-चांदी के गहने भी पहनने लगते हैं. लेकिन क्या ऐसा करना उचित है? 18 महापुराणों में से एक गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ के बीच संवाद के माध्यम से मृत्यु, आत्मा और परलोक से जुड़े विषयों का विस्तार से वर्णन किया गया है. इसमें यह भी बताया गया है कि मृत्यु के बाद किसी व्यक्ति की वस्तुओं, विशेषकर उसके आभूषणों, के संबंध में क्या नियम माने गए हैं. आइए जानते हैं शास्त्रों के अनुसार इसके बारे में क्या कहा गया है.

क्या मृतक के गहने पहनने चाहिए?

गरुड़ पुराण के अनुसार, मनुष्य का अपने आभूषणों, विशेषकर सोने और धन-संपत्ति से गहरा भावनात्मक लगाव होता है. मृत्यु के बाद भले ही शरीर नष्ट हो जाता है, लेकिन आत्मा का मोह तुरंत समाप्त नहीं होता. ऐसी मान्यता है कि यदि परिवार का कोई सदस्य मृतक के गहनों को सीधे धारण कर लेता है, तो उन वस्तुओं के प्रति आत्मा का मोह बना रह सकता है. इससे आत्मा की मोक्ष यात्रा में बाधा उत्पन्न होने की संभावना मानी जाती है. साथ ही, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मृतक की ऊर्जा उन वस्तुओं से जुड़ी रह सकती है, जिसका प्रभाव पहनने वाले पर पड़ सकता है. इसी कारण सीधे तौर पर ऐसे गहने पहनने से बचने की सलाह दी जाती है.

किन परिस्थितियों में पहने जा सकते हैं ये गहने?

शास्त्रों में कुछ विशेष परिस्थितियों में इन गहनों के उपयोग की अनुमति बताई गई है.

1. उपहार में मिले आभूषण

यदि किसी व्यक्ति ने अपने जीवनकाल में अपनी इच्छा से प्रेमपूर्वक आपको कोई आभूषण उपहार स्वरूप दिया था, तो उसे पहनने में कोई दोष नहीं माना जाता.

2. पिघलाकर नया रूप देना

यदि आप मृतक के गहनों का उपयोग करना चाहते हैं, तो उन्हें पिघलवाकर नए डिजाइन में बनवाना बेहतर माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे उस आभूषण से जुड़ा पुराना मोह और भावनात्मक संबंध समाप्त हो जाता है.

आत्मा की शांति के लिए क्या करें?

यदि आप अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना करते हैं, तो उनकी प्रिय एवं व्यक्तिगत वस्तुओं को शुद्ध करने के बाद किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को दान करना शुभ माना जाता है. यदि दान करना संभव न हो, तो धार्मिक परंपराओं के अनुसार उन्हें किसी पवित्र नदी में विसर्जित भी किया जा सकता है. मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि बनी रहती है.

यह भी पढ़ें: Garud Puran: मृत्यु के बाद मृतक के पलंग और बिस्तर का क्या करना चाहिए? जानें क्या कहता है गरुड़ पुराण

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.

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