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इस दिन रखा जाएगा शीतला अष्टमी व्रत, खाया जाता है बासी भोजन

Updated at : 06 Mar 2026 8:07 AM (IST)
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Sheetala Ashtami 2026

शीतला अष्टमी 2026

Sheetala Ashtami 2026: होली के आठवें दिन मनाई जाने वाली शीतला अष्टमी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है. यह पावन दिन माता शीतला को समर्पित होता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ माता शीतला की पूजा करने से परिवार को रोगों से सुरक्षा मिलती है और घर […]

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Sheetala Ashtami 2026: होली के आठवें दिन मनाई जाने वाली शीतला अष्टमी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है. यह पावन दिन माता शीतला को समर्पित होता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ माता शीतला की पूजा करने से परिवार को रोगों से सुरक्षा मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है. साल 2026 में शीतला अष्टमी का पर्व 11 मार्च, बुधवार को मनाया जाएगा. कई जगहों पर इसे बसोड़ा पूजा के नाम से भी जाना जाता है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शीतला माता को शक्ति का स्वरूप माना जाता है. इसलिए इस दिन माता शीतला की पूजा के साथ-साथ मां पार्वती की स्तुति करना भी बहुत फलदायी माना जाता है. भक्त इस दिन पार्वती चालीसा, दुर्गा स्तुति या शक्ति मंत्रों का पाठ करते हैं. ऐसा करने से जीवन में आने वाली शारीरिक परेशानियां दूर होती हैं और मानसिक शांति भी प्राप्त होती है. साथ ही परिवार में खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.

शीतला अष्टमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी का व्रत रखा जाता है. साल 2026 में अष्टमी तिथि 11 मार्च को पूर्वाह्न 01 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर अगले दिन भोर 04 बजकर 19 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर यह व्रत 11 मार्च 2026, बुधवार को रखा जाएगा.

इस दिन माता शीतला की पूजा के लिए सबसे शुभ समय सुबह 06 बजकर 36 मिनट से शाम 06 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. भक्त इस समय के दौरान माता की पूजा, व्रत और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं.

क्यों खाया जाता है एक दिन पहले बना भोजन

शीतला अष्टमी से जुड़ी एक खास परंपरा है, जो इसे अन्य व्रत-त्योहारों से अलग बनाती है. इस दिन घरों में ताजा भोजन नहीं बनाया जाता. व्रत रखने वाली महिलाएं सप्तमी तिथि के दिन ही पूरा भोजन तैयार कर लेती हैं. अगले दिन यानी अष्टमी को वही ठंडा या एक दिन पहले बना भोजन माता शीतला को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में खाया जाता है. इस परंपरा को बसोड़ा कहा जाता है. कई घरों में पूड़ी, कढ़ी, मीठे चावल, गुड़ और अन्य व्यंजन एक दिन पहले ही बना लिए जाते हैं.

शीतला अष्टमी का धार्मिक महत्व

शीतला अष्टमी का संबंध स्वास्थ्य और रोगों से सुरक्षा से जुड़ा हुआ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि माता शीतला की पूजा करने से चेचक, त्वचा रोग और अन्य बीमारियों से रक्षा होती है. ‘शीतला’ शब्द का अर्थ होता है शीतलता देने वाली. लोक विश्वास के अनुसार, माता शीतला अपने भक्तों को रोग-शोक से बचाती हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनाए रखती हैं. इसलिए इस दिन भक्त श्रद्धा के साथ माता की पूजा करते हैं और अपने परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करते हैं.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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