कोसी बराज पर उगा खतरा: पुल के स्लैबों में जमे पीपल के पेड़, भविष्य में बन सकते हैं बड़े हादसे की वजह
पुल के स्लैबों में जमे पीपल के पेड़
Kosi Barrage Structure Risk: वर्ष 2008 की कुसहा त्रासदी झेल चुके कोसी बराज के स्लैबों में पीपल के पेड़ उगने से इसके ढांचे पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है.
मुख्य बातें:
वीरपुर (सुपौल) से प्रमोद कुमार की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
Kosi Barrage Structure Risk: वर्ष 2008 की भयावह कुसहा त्रासदी और वर्ष 2024 में 6.61 लाख क्यूसेक के रिकॉर्ड जलप्रवाह जैसी विकट परिस्थितियों का सामना कर चुके कोसी बराज पर एक नया संरचनात्मक खतरा सामने आया है. बराज के लगभग सभी फाटकों के डाउन स्ट्रीम हिस्से में पुल के स्लैबों के बीच से पीपल के पौधे उग आए हैं, जो अब धीरे-धीरे पेड़ का रूप ले रहे हैं. स्थानीय नागरिकों और तकनीकी जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते इन्हें कंक्रीट से पूरी तरह साफ नहीं किया गया, तो भविष्य में यह बराज की मुख्य संरचना के लिए बेहद घातक साबित हो सकते हैं.
स्लैबों के नीचे जड़ें जमा रहे पेड़, कंक्रीट टूटने का डर

- दरारों का खतरा: विशेषज्ञों के अनुसार, पीपल की जड़ें अत्यंत मजबूत होती हैं जो कंक्रीट और भारी पत्थरों की संरचनाओं में भी आसानी से दरार पैदा कर देती हैं. लंबे समय से सफाई न होने के कारण ये पौधे बराज को अंदर से कमजोर कर रहे हैं.
- 2018 में भी आई थी ऐसी नौबत: यह पहली बार नहीं है जब बराज पर ऐसा संकट दिखा हो. वर्ष 2018 में भी ऐसी ही स्थिति बनी थी, तब तत्कालीन कार्यपालक अभियंता विजय सिंह ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी पेड़ों को कटवाकर संभावित खतरे को टाल दिया था.
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में कोसी नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया था कि पानी बराज के ऊपर से बहने (ओवरटॉप) लगा था. उस दौरान बराज के सभी 56 फाटक खोल दिए गए थे और प्रशासन को स्थिति संभालने में करीब 48 घंटे की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी.
Kosi Barrage Structure Risk: नियमित सफाई का दावा, ग्रामीणों में बढ़ी चिंता
लगातार बढ़ते जलस्तर और हर साल आने वाले भारी दबाव के कारण कोसी बराज का ढांचा पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है. यही वजह है कि इलाके में नए बराज के निर्माण की मांग भी समय-समय पर उठती रही है.
इस पूरे मामले पर जल संसाधन विभाग के शीर्ष कार्य प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता बबन पांडे ने बताया कि बराज की नियमित रूप से साफ-सफाई कराई जाती है. समय-समय पर कंक्रीट में उग आए पौधों और झाड़ियों की कटाई भी की जाती है. बराज के रखरखाव की प्रक्रिया निरंतर जारी है और इसकी सुरक्षा को लेकर विभाग पूरी तरह सतर्क है.
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि कोसी बराज केवल एक पुल नहीं, बल्कि कोसी क्षेत्र के लाखों लोगों की सुरक्षा और जीवनरेखा से जुड़ा तंत्र है. ऐसे में इसके स्लैबों की नियमित विधिक और तकनीकी निगरानी होनी चाहिए ताकि छोटे दिखने वाले ये पेड़ भविष्य में किसी बड़े हादसे की वजह न बन जाएं.
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लेखक के बारे में
By Divyanshu Prashant
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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