Saraswati Puja 2026: कल होगी वीणापाणि की पूजा, जानिए मां सरस्वती के नाम में छिपा ज्ञान

Published by : Shaurya Punj Updated At : 22 Jan 2026 12:56 PM

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सरस्वती पूजा जानें सरस्वती नाम का अर्थ

Saraswati Puja 2026: कल 23 जनवरी 2026 को वीणापाणि की पूजा होगी . जानिए बुद्धि, विद्या और सुबुद्धि की देवी मां सरस्वती के नाम में छिपा ज्ञान, धार्मिक महत्व और पौराणिक अर्थ.

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डॉ राकेश कुमार सिन्हा ‘रवि’

Saraswati Puja 2026: भारतीय धर्म और संस्कृति में आदि काल से ही मां सरस्वती को विद्या, बुद्धि, ज्ञान, कला, संस्कार और वाणी की देवी माना गया है. वे सदा उच्च आसन पर विराजमान रहती हैं और मनुष्य को सही दिशा देती हैं. धार्मिक मान्यताओं में देवी के तीन प्रमुख रूप माने गए हैं—महाकाली, महालक्ष्मी और महा सरस्वती. यहां हम बताने जा रहे हैं बसंत पंचमी के शुभ मुहूर्त के अलावा उनके नाम का अर्थ.

बसंत पंचमी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026 को रात 2 बजकर 28 मिनट से शुरू होगी और 24 जनवरी को रात 1 बजकर 46 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि को मानते हुए बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा. बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा के लिए सबसे अच्छा समय 23 जनवरी को सुबह 7 बजकर 15 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा. इसी दौरान पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति मानी जाती है.

मां सरस्वती के नाम और स्वरूप

मां सरस्वती को पूरे संसार में अलग-अलग नामों और रूपों में पूजा जाता है. उनके सतनाम, द्वादश नाम, शतनाम और सहस्त्र नाम विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं.

मां सरस्वती के सात प्रमुख नाम

  • वेदवती
  • अन्नवती
  • उदकवती
  • वागदेवी
  • भारती
  • प्लाक्ष्वती
  • वेदस्मृति

मां सरस्वती के द्वादश (12) नाम- भारती, वीणापाणी, हंसवाहिनी, शुक्लवर्ण, वाणी, वीणापुस्तकधारिणी, शारदा, श्वेतपद्मासना, वागेश्वरी, वेदमाता, शुक्लाम्बरा और वागदेवी.

‘सरस्वती’ शब्द में गहरा अर्थ छिपा है—

  • स से ज्ञान का प्रकट होना
  • र से अमृत समान रस
  • स्व से सुंदर स्वर
  • ती से तीनों लोकों को मोहित करने वाली

श्री दुर्गा चालीसा में भी कहा गया है—

“रूप सरस्वती का तुम धारा।
दे सुबुद्धि ऋषि-मुनिन उबारा॥”

अर्थात मां सरस्वती ने अपने स्वरूप से सभी को विद्या और सुबुद्धि देकर उद्धार किया.

मां सरस्वती का अन्य देवताओं से संबंध

मां सरस्वती का संबंध ब्रह्मा जी से तो है ही, साथ ही भगवान विष्णु और भगवान शिव से भी उनका गहरा नाता माना जाता है। वे देवी रूप के साथ-साथ नदी रूप में भी पूजित हैं.

सरस्वती नदी : पवित्र और प्राचीन

भारत की सात पवित्र नदियों में गंगा, यमुना, गोदावरी, कावेरी, नर्मदा, सिंधु के साथ सरस्वती नदी का भी स्थान है. ऋग्वेद, रामायण, महाभारत और अनेक पुराणों में सरस्वती नदी का वर्णन मिलता है. कहा जाता है कि सरस्वती नदी के तट पर कई वेद, पुराण, उपनिषद और अन्य ग्रंथों की रचना हुई। हर संध्या उसका तट वेद मंत्रों के उच्चारण से गूंज उठता था.

इतिहास और शोध की मान्यताएं

शोध बताते हैं कि सरस्वती भारत की सबसे प्राचीन नदियों में से एक थी, जो लगभग 6000 वर्ष से भी अधिक पुरानी मानी जाती है. प्राचीन समय में यह नदी अरब सागर में गिरती थी. सिंधु घाटी सभ्यता के कई प्रमुख स्थल—कालीबंगा, राखीगढ़ी, भिराणा और बनावली—सरस्वती नदी के किनारे बसे थे.

सरस्वती नदी की सात धाराएं

मान्यताओं के अनुसार सरस्वती नदी सात धाराओं में प्रवाहित होती है—

  • पुष्कर में सुप्रभा
  • नैमिषारण्य में कांचनाक्षी
  • गया में विशाला
  • उत्तर कौशल में मनोरमा
  • कुरुक्षेत्र में ओघवती
  • हरिद्वार में सुरेणु
  • हिमालय में विमलोदका

गुप्त सरस्वती और वर्तमान स्वरूप

प्रयागराज में गंगा और यमुना के साथ सरस्वती का गुप्त संगम माना जाता है। मान्यता है कि कलियुग में श्राप के कारण सरस्वती उत्तराखंड के माणा गांव के पास अलकनंदा में मिलकर भूमिगत हो गईं. आज अलकनंदा की एक सहायक नदी को छोटी सरस्वती कहा जाता है. वहीं हरियाणा-राजस्थान क्षेत्र में बहने वाली घग्गर-हकरा नदी को प्राचीन सरस्वती माना जाता है.

देश के अन्य हिस्सों में सरस्वती

ओडिशा के राउरकेला के पास वेदव्यास तीर्थ में ब्राह्मणी और शंख नदी के साथ सरस्वती का भी उल्लेख मिलता है. यहां भी सरस्वती को गुप्त रूप में विराजमान माना गया है. इसके अलावा रामेश्वरम जैसे दक्षिणी तीर्थ में भी मां सरस्वती के नाम का कुंड मौजूद है. मां सरस्वती केवल विद्या की देवी ही नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना की आधारशिला हैं. देवी और नदी—दोनों रूपों में वे युगों से मानवता का मार्गदर्शन करती आ रही हैं.

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शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.

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