Sadhvi Prem Baisa: कौन थीं साध्वी प्रेम बाईसा, श्रीमद् भागवत कथा वाचक के रूप में मिली थी पहचान
Published by : Shaurya Punj Updated At : 29 Jan 2026 1:45 PM
श्रीमद् भागवत कथा वाचक के रूप में कैसे बनीं साध्वी प्रेम बाईसा प्रसिद्ध
Sadhvi Prem Baisa: साध्वी प्रेम बाईसा राजस्थान की प्रसिद्ध कथा वाचक थीं, जिन्होंने श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से सनातन धर्म, भक्ति और भारतीय संस्कृति का व्यापक प्रचार किया।
Sadhvi Prem Baisa: कथा वाचक और साध्वी प्रेम बाईसा (Sadhvi Prem Baisa)का बुधवार को निधन हो गया. जानकारी के मुताबिक, उनके पिता और एक अन्य व्यक्ति उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे थे. उस समय शाम के करीब 5 बजकर 30 मिनट हो रहे थे. अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उनकी जांच की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. अस्पताल के संचालक डॉ. प्रवीण जैन ने पुष्टि की कि साध्वी प्रेम बाईसा की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी.
कौन थीं साध्वी प्रेम बाईसा?
साध्वी प्रेम बाईसा का परिवार मूल रूप से राजस्थान के बाड़मेर जिले के परेऊ गांव से जुड़ा था. वे लंबे समय से संत परंपरा में सक्रिय थीं और पश्चिमी राजस्थान में कथावाचन के जरिए सनातन धर्म का प्रचार कर रही थीं. धार्मिक समाज में वे कोई नया नाम नहीं थीं. संत समाज और श्रद्धालुओं के बीच उन्हें एक प्रसिद्ध कथा वाचक के रूप में जाना जाता था.
मौत के बाद इंस्टाग्राम पोस्ट ने खड़े किए सवाल
अस्पताल के अनुसार, साध्वी प्रेम बाईसा की मौत शाम करीब 5:30 बजे हो चुकी थी. लेकिन इसी दिन उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से रात 9:28 बजे एक पोस्ट सामने आया. इस पोस्ट में लिखा गया था: “मैंने हर एक क्षण सनातन प्रचार के लिए जिया. मैंने आदि गुरु शंकराचार्य और देश के कई महान संतों को पत्र लिखा. अग्नि परीक्षा के लिए निवेदन किया, लेकिन प्रकृति को क्या मंजूर था?” इस भावनात्मक संदेश को देखकर कई लोगों को यह सुसाइड नोट जैसा प्रतीत हुआ. हालांकि, इस पूरे मामले की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं.
कम उम्र में शुरू हुई आध्यात्मिक यात्रा
साध्वी प्रेम बाईसा ने बहुत कम उम्र में आध्यात्मिक जीवन को अपनाया था. उनके जीवन में सबसे बड़ी प्रेरणा उनके गुरु और आध्यात्मिक मार्गदर्शक रहे. उनके प्रमुख गुरु महंत विरमनाथ महाराज गुरु के सान्निध्य में धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन भक्ति मार्ग और सनातन परंपरा को जीवन का आधार बनाया. उन्होंने तय किया कि वे कथाओं के माध्यम से धर्म और संस्कृति को लोगों तक पहुंचाएंगी.
साध्वी प्रेम बाईसा कथा वाचन के रूप में में क्यों थीं खास?
साध्वी प्रेम बाईसा की कथाओं में एक अलग ही प्रभाव देखने को मिलता था. उनकी बातों में न केवल भक्ति होती थी, बल्कि जीवन, नैतिकता और समाज से जुड़े संदेश भी साफ़ झलकते थे.
साध्वी प्रेम बाईसा की खास बातें
सरल भाषा में गहरी बात कहना, हर उम्र के श्रोताओं से जुड़ पाना, धार्मिक कथाओं को जीवन से जोड़कर समझाना. इसी वजह से युवा, बुज़ुर्ग और महिलाएं—सभी उनके प्रवचनों से जुड़ाव महसूस करते थे.
भागवत कथा और भक्ति भजनों का सफर
साध्वी प्रेम बाईसा ने करियर की शुरुआत राजस्थान के छोटे धार्मिक आयोजनों से की. धीरे-धीरे उनकी पहचान बढ़ी और देश के अलग-अलग हिस्सों में उन्हें कथा के लिए आमंत्रित किया जाने लगा. आज भी उनके प्रवचन यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध हैं, जहां लाखों श्रद्धालु उन्हें सुनते हैं.
श्रीमद् भागवत कथा वाचक के रूप में पहचान
साध्वी प्रेम बाईसा (Sadhvi Prem Baisa) को श्रीमद् भागवत कथा के एक प्रभावशाली वाचक के रूप में जाना जाता था. उनकी कथाएं केवल धार्मिक नहीं होती थीं, बल्कि वे जीवन के व्यवहारिक पक्ष को भी छूती थीं. 2021 में जसोल में आयोजित एक कथा के दौरान उन्होंने कहा था “भारत की धरती बहुत पुण्यशाली है. इस भूमि पर जन्म लेना अपने आप में एक आशीर्वाद है.” यह विचार उनके प्रवचनों की आत्मा को दर्शाता है.
साध्वी प्रेम बाईसा एक जानी-मानी कथा वाचक और संत परंपरा से जुड़ी साध्वी थीं. उनका जीवन धर्म, भक्ति और सनातन संस्कृति के प्रचार को समर्पित रहा. उनकी अचानक मौत और उससे जुड़ा सोशल मीडिया पोस्ट कई सवाल खड़े करता है, जिनकी जांच जारी है. उनकी कथाएं और विचार आज भी डिजिटल माध्यमों पर मौजूद हैं, जो उनके कार्य और सोच की गवाही देते हैं.
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By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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