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Rudrabhishek In Sawan 2025: श्रावण मास में क्यों किया जाता है रुद्राभिषेक

Updated at : 15 Jun 2025 9:49 PM (IST)
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Rudrabhishek in Sawan 2025

Rudrabhishek in Sawan 2025

Rudrabhishek In Sawan 2025 : श्रावण मास में रुद्राभिषेक करने की प्राचीन परंपरा भक्तों के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, शांति और समृद्धि लाती है.

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Rudrabhishek In Sawan 2025: श्रावण मास हिन्दू धर्म में भगवान शिव की पूजा-अर्चना का विशेष समय माना जाता है. इस मास में शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद आदि पंचामृत से अभिषेक करने की परंपरा है, जिसे ‘रुद्राभिषेक’ कहा जाता है. रुद्राभिषेक का विधान खासतौर से श्रावण मास में किया जाता है क्योंकि यह मास शिवजी की महिमा और कृपा पाने का श्रेष्ठ अवसर होता है. रुद्राभिषेक से शिवजी प्रसन्न होते हैं और भक्तों को मोक्ष, सुख, समृद्धि प्रदान करते हैं:-

– भगवान शिव की आराधना का सर्वोत्तम मास

श्रावण मास को भगवान शिव का प्रिय मास माना गया है. पुराणों के अनुसार, इस मास में शिवजी के व्रत, पूजा और रुद्राभिषेक करने से पापों का नाश होता है और जीवन में खुशहाली आती है. रुद्राभिषेक से शिवजी की शांति होती है और भक्तों के कष्ट दूर होते हैं.

– रुद्राभिषेक में ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र का महत्त्व

रुद्राभिषेक के दौरान ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र का उच्चारण अत्यंत शुभ माना जाता है. यह मंत्र शिवजी का सर्वशक्तिमान नाम है और इसका जप मन को शुद्ध करता है. श्रावण मास में इस मंत्र के साथ किया गया अभिषेक भक्त के जीवन में पॉजिटिव एनर्जी और आध्यात्मिक शक्ति लाता है.

– पंचामृत से अभिषेक की परंपरा

रुद्राभिषेक में पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद और शक्कर — से शिवलिंग की पूजा की जाती है. ये पंच तत्व भगवान शिव के पांच रूपों का प्रतीक हैं. इस अभिषेक से शिवजी की कृपा सदा बनी रहती है और भक्तों के जीवन में स्वास्थ्य, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति होती है.

– श्रावण मास की विशेष धार्मिक महत्ता

श्रावण मास में रुद्राभिषेक करने से व्यक्ति के मन और शरीर की अशुद्धियाँ दूर होती हैं. यह मास कर्मफलदायक माना जाता है, जब शिवजी की पूजा करने से सांसारिक बाधाएं हटती हैं और व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आती है. रुद्राभिषेक से भक्तों के संकट और कष्ट समाप्त होते हैं.

– रुद्राभिषेक से मोक्ष और पितृ तर्पण का पुण्य

श्रावण मास में किया गया रुद्राभिषेक मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है. साथ ही यह पितृ तर्पण का भी उत्तम विकल्प माना जाता है, जिससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है. इस विधि से श्राद्ध और पितृ कर्मों का पुण्य भी बढ़ जाता है.

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श्रावण मास में रुद्राभिषेक करने की प्राचीन परंपरा भक्तों के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, शांति और समृद्धि लाती है. यह अनुष्ठान शिवजी को अत्यंत प्रिय है और भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करता है. श्रावण 2025 में रुद्राभिषेक से शिवभक्ति और शिव कृपा के द्वार खोलें.

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Ashi Goyal

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By Ashi Goyal

Ashi Goyal is a contributor at Prabhat Khabar.

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