रमजान उल मुबारक का चांद आया नजर, सुबह से होगी रोजा की शुरुआत

रमजान उल मुबारक
Ramzan 2026: मुस्लिम समुदाय के लिए सबसे पवित्र और मुबारक महीना रमजान शुरू हो गया है. यह पाक महीना इबादत, आत्मसंयम, दया और इंसानियत का संदेश लेकर आया है. इस महीने में मुसलमान रोजा रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं और कुरान शरीफ की तिलावत कर आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने की कोशिश करते हैं.
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Ramzan 2026: इस्लामिक कैलेंडर के सबसे पवित्र महीने रमजान उल मुबारक का चांद बुधवार की शाम देश के विभिन्न हिस्सों में नजर आ गया. चांद दिखने की तस्दीक होते ही गुरुवार से रमजान के मुकद्दस महीने की शुरुआत हो गई और गुरुवार की सुबह से पहला रोजा रखा जाएगा. रमजान माह का मुकद्दस चांद बिहार के गया, नवादा, समस्तीपुर के मुसरी घरारी, दरभंगा तथा झारखंड के रांची, लोहरदगा, चतरा सहित असम और देश के विभिन्न हिस्सों में देखे जाने की सूचना मिलने के बाद बिहार, झारखंड और उड़ीसा के मुसलमानों की सबसे बड़ी एदारा इमारत ए शरिया तथा प्रसिद्ध खानकाह मुजीबिया सहित तमाम मुस्लिम एदारों ने ऐलान किया कि रमजान मुबारक का पहला रोजा गुरुवार से शुरू होगा.

इबादत, रहमत और बरकत के पवित्र महीने की शुरुआत
खानकाह मुजीबिया फुलवारी शरीफ के प्रशासक सैयद शाह मिन्हाजुद्दीन कादरी एवं इमारत ए शरिया के काजी मौलाना अंजार आलम कासमी ने चांद नजर आने की पुष्टि करते हुए बताया कि बुधवार को रमजान का चांद दिखाई दे गया है. इसके साथ ही गुरुवार से माह-ए-रमजान का आगाज हो गया है. उन्होंने तमाम मुस्लिम समुदाय से अपील की कि इस पवित्र महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत, तिलावत-ए-कुरआन और जरूरतमंदों की मदद करें. इमारत ए शरिया के नाजिम मौलाना सईदुर रहमान कासमी ने भी मुस्लिम समुदाय को रमजान की मुबारकबाद दी है. रमजान का महीना रहमत, मगफिरत और जहन्नम से निजात का महीना माना जाता है. इस महीने में मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखते हैं.

मस्जिदों में उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़
चांद नजर आने के साथ ही मस्जिदों में रौनक बढ़ गई है. तरावीह की नमाज के लिए अकीदतमंद बड़ी संख्या में मस्जिदों का रुख कर रहे हैं. बाजारों में भी देर रात तक चहल-पहल देखी गई. खजूर, फल, सेवइयां और रोजमर्रा के सामान की खरीदारी को लेकर लोगों में खास उत्साह देखा जा रहा है. उलेमा ने बताया कि रमजान के महीने में एक नेक अमल का सवाब सत्तर गुना तक बढ़ा दिया जाता है. जकात और फितरा अदा कर गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करना इस महीने की खास अहमियत है. रमजान इंसान को आत्मशुद्धि, संयम और सामाजिक सौहार्द का संदेश देता है. मुस्लिम समाज में रमजान का महीना आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मिक शांति का प्रतीक माना जाता है. इबादतों से गुलजार मस्जिदें, सहरी और इफ्तार की रौनक तथा आपसी भाईचारे का माहौल पूरे वातावरण को पाकीजगी से भर देता है.

गुनाहों से निजात पाने का महीना है रमजान
बिहार की राजधानी पटना स्थित प्रसिद्ध खानकाह ए मुजीबिया के प्रबंधक मौलाना मिन्हाजुद्दीन कादरी मुजीबी ने माहे रमजान की फजीलत बयान करते हुए कहा कि रमजान रहमत, बरकत और गुनाहों से माफी का महीना है. उन्होंने कहा कि यह महीना इंसान को अपनी गलतियों से तौबा करने और आगे बेहतर जीवन जीने का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है. उन्होंने कहा कि रोजा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं बल्कि बुरे कामों, गुस्सा, झगड़ा और गलत नजर से बचने का अभ्यास भी है. रमजान इंसान को शारीरिक और मानसिक रूप से संयम रखने की सीख देता है. रमजान कुरान की तिलावत, नमाज की पाबंदी और वक्त की अहमियत समझने का महीना है. रोजेदार को अपने व्यवहार में सच्चाई और ईमानदारी अपनानी चाहिए.
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लेखक के बारे में
By Radheshyam Kushwaha
पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.
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