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Premanand Ji Maharaj Tips : मंत्रों वाली टी‑शर्ट नहीं, मंत्रों का अर्थ समझो—प्रेमानंद महाराज की सलाह

Updated at : 07 Jul 2025 5:49 PM (IST)
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Premanand Ji Maharaj

प्रेमानंद जी महाराज (फाइल फोटो)

Premanand Ji Maharaj Tips : यदि हम मंत्रों को केवल पहनने की वस्तु न बनाकर जीवन का मार्गदर्शन मानें, तो हमारा मन, कर्म और आत्मा — तीनों ही शुद्ध हो सकते हैं. मंत्रों का वास्तविक अर्थ समझें और उन्हें आत्मसात करें, यही सच्ची भक्ति है.

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Premanand Ji Maharaj Tips : आजकल भक्ति और अध्यात्म का स्वरूप कहीं-कहीं दिखावे में बदलता जा रहा है. लोग मंत्रों को केवल वस्त्रों पर छपवाकर पहनने तक सीमित कर रहे हैं, लेकिन उनका गहरा अर्थ समझने का प्रयास नहीं करते. ऐसे में पूज्य श्री प्रेमानंद जी महाराज ने भक्तों को एक महत्वपूर्ण सीख दी है — “मंत्रों वाली टी-शर्ट नहीं, मंत्रों का अर्थ समझो” आइए जानते हैं उनकी इस सलाह के पीछे की गहन आध्यात्मिक भावना:-

– मंत्र केवल शब्द नहीं, चेतना का स्रोत हैं

प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि मंत्र कोई साधारण शब्द नहीं होते, ये दिव्य ऊर्जा के स्रोत हैं. जब हम किसी मंत्र का उच्चारण श्रद्धा और समझ के साथ करते हैं, तो वह हमारे भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाता है. मात्र टी-शर्ट पर छपा हुआ मंत्र पढ़ लेने या पहन लेने से वह ऊर्जा प्राप्त नहीं होती, जो ध्यानपूर्वक उसका जाप करने से मिलती है.

– मंत्र का अर्थ जानना क्यों जरूरी है?

जैसे शरीर के पोषण के लिए भोजन जरूरी है, वैसे ही आत्मा के पोषण के लिए मंत्रों का ज्ञान आवश्यक है. यदि कोई “ओम नमः शिवाय” का जाप करता है, लेकिन उसे पता ही नहीं कि इसका अर्थ क्या है, तो वह केवल एक यांत्रिक क्रिया बन जाती है. प्रेमानंद जी बताते हैं कि जब हम किसी मंत्र का भावार्थ समझकर उसका जाप करते हैं, तब वह हृदय को छूता है और चेतना को जाग्रत करता है.

– भक्ति दिखावे से नहीं, समर्पण से होती है

आजकल सोशल मीडिया और फैशन के प्रभाव में भक्ति भी एक ट्रेंड बनती जा रही है. टी-शर्ट पर मंत्र छपवाना, ब्रेसलेट पहनना या सोशल मीडिया पर स्टेटस लगाना सच्ची भक्ति नहीं है. महाराज जी समझाते हैं कि भक्ति का असली स्वरूप आंतरिक होता है — विनम्रता, सेवा, त्याग और ध्यान ही सच्ची भक्ति के आधार हैं.

– मंत्रों के प्रति श्रद्धा रखें, बाजार नहीं बनाएं

प्रेमानंद जी का कहना है कि मंत्रों का प्रयोग फैशन या व्यापारिक लाभ के लिए नहीं करना चाहिए. वे पवित्र होते हैं और उनके प्रति आदरभाव आवश्यक है. जब हम किसी मंत्र को शरीर की शोभा के लिए उपयोग करते हैं, तो उसकी दिव्यता का अपमान करते हैं.

– मंत्रों से जीवन में लाएं बदलाव

मंत्रों का सही प्रयोग जीवन में शांति, स्थिरता और साधना की दिशा प्रदान करता है. प्रेमानंद जी महाराज यह प्रेरणा देते हैं कि हर भक्त को चाहिए कि वह मंत्रों को जीवन में उतारे — जाप करें, भाव समझें, और अपने कर्मों को शुद्ध करें. तभी सच्चे अर्थों में आध्यात्मिक उन्नति संभव है.

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प्रेमानंद जी महाराज की यह सीख आज के युग में अत्यंत प्रासंगिक है. यदि हम मंत्रों को केवल पहनने की वस्तु न बनाकर जीवन का मार्गदर्शन मानें, तो हमारा मन, कर्म और आत्मा — तीनों ही शुद्ध हो सकते हैं. मंत्रों का वास्तविक अर्थ समझें और उन्हें आत्मसात करें, यही सच्ची भक्ति है.

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Ashi Goyal

लेखक के बारे में

By Ashi Goyal

Ashi Goyal is a contributor at Prabhat Khabar.

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