परमहंस योगानंद की जयंती आज, जानें उनकी स्थायी विरासत के बारे में

Author :Shaurya Punj
Published by :Shaurya Punj
Updated at :05 Jan 2025 11:35 AM
विज्ञापन
Paramahansa Yogananda Jayanti 2025

Paramahansa Yogananda Jayanti 2025

Paramahansa Yogananda Jayanti 2025: परमहंस योगानंद का जन्म 5 जनवरी 1893 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुआ था. 1910 में, जब वे केवल सत्रह वर्ष के थे, उन्होंने ईश्वर की खोज के लिए अपनी आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत की. यह यात्रा उन्हें उनके गुरु स्वामी श्रीयुक्तेश्वरजी के पास ले गई.

विज्ञापन

Paramahansa Yogananda Jayanti 2025: श्री श्री परमहंस योगानन्द प्रायः कहा करते थे कि मानव जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य ईश्वर की खोज करना है.अन्य सब कुछ प्रतीक्षा कर सकता है परन्तु ईश्वर की खोज नहीं.

योगानन्दजी का जन्म 5 जनवरी 1893 को गोरखपुर में धर्मनिष्ठ बंगाली माता-पिता ज्ञानप्रभा और भगवतीचरण घोष के परिवार में हुआ था.उनका बचपन का नाम मुकुन्दलाल घोष था.जब ज्ञानप्रभा अपने गुरु लाहिड़ी महाशय के पास अपनी गोद में शिशु मुकुन्द को लेकर गईं, तो महान् सन्त ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा, “छोटी मां, तुम्हारा पुत्र एक योगी होगा.एक आध्यात्मिक इंजन की भांति वह अनेक आत्माओं को ईश्वर के राज्य में ले जाएगा.” कालान्तर में यह पवित्र भविष्यवाणी सत्य सिद्ध हुई.

मां काली का ध्यान करते थे परमहंस योगानंद

बचपन में मुकुन्द मां काली से गहन प्रार्थना और ध्यान किया करते थे.ऐसे ही एक अवसर पर, वे एक गहन दिवास्वप्न में डूब गए और उनकी अन्तर्दृष्टि के सामने एक प्रखर प्रकाश कौंध गया.वे इस दिव्य प्रकाश को देखकर आश्चर्यचकित हो गए और उन्होंने पूछा, “यह अद्भुत् आलोक क्या है?” उन्हें इस प्रश्न का एक दैवी प्रत्युत्तर प्राप्त हुआ, “मैं ईश्वर हूं.मैं प्रकाश हूँ.” योगानन्दजी ने अपनी पुस्तक “योगी कथामृत” में इस अलौकिक अनुभव का वर्णन किया है, “वह ईश्वरीय आनन्द क्रमशः क्षीण होता गया पर मुझे उससे ब्रह्म की खोज करने की प्रेरणा की स्थायी विरासत प्राप्त हुई.”

सत्रह वर्ष की आयु में अपनी ईश्वर की खोज की

सन् 1910 में, सत्रह वर्ष की आयु में, उन्होंने अपनी ईश्वर की खोज की आध्यात्मिक यात्रा प्रारम्भ की.यह खोज उन्हें उनके पूज्य गुरुदेव स्वामी श्रीयुक्तेश्वरजी के पास ले गई.अपने गुरु के प्रेमपूर्ण परन्तु कठोर मार्गदर्शन में, उन्होंने स्वामी परम्परा के अन्तर्गत पवित्र संन्यास का आलिंगन किया.वे अपने सन्यासी नाम परमहंस योगानन्द से प्रसिद्ध हुए, जो ईश्वर के साथ एकत्व के माध्यम से सर्वोच्च आनन्द की प्राप्ति का प्रतीक है.

उन्होंने सन् 1917 में रांची में योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इण्डिया (वाईएसएस) और सन् 1920 में लॉस एंजेलिस में सेल्फ-रियलाइजेशन फेलोशिप (एसआरएफ़) की स्थापना की. इन दोनों संगठनों का प्राथमिक उद्देश्य है जीवन के परम उद्देश्य—अर्थात् आत्मा का परमात्मा से साथ एकत्व—को साकार करने के लिए “क्रियायोग” ध्यान प्रविधियों के प्राचीन आध्यात्मिक विज्ञान का प्रसार करना.आकांक्षी साधक योगदा सत्संग आश्रमों से अनुरोध करके गृह-अध्ययन पाठमाला के रूप में स्वयं महान् गुरुदेव द्वारा प्रदान की गयी. इन पवित्र शिक्षाओं को प्राप्त कर सकते हैं.

योगानन्दजी ने अमेरिका में रहते हुए उपरोक्त भारतीय आध्यात्मिक साधना के ज्ञान के प्रसार के लिए अथक प्रयत्न किया, जिसका अत्यधिक स्वागत किया गया और सराहना की गयी.ईश्वर की अपनी खोज को सबके साथ साझा करने की लालसा से प्रेरित होकर उन्होंने अत्यन्त प्रसिद्ध एवं अति उत्कृष्ट आध्यात्मिक पुस्तक, “योगी कथामृत” लिखने का निर्णय किया, जिसने सम्पूर्ण विश्व में असंख्य व्यक्तियों को गहनता से प्रभावित किया है और इस पुस्तक का 50 से अधिक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है.

उनकी अतिव्यापक शिक्षाओं ने लाखों लोगों को गहनता से प्रभावित किया है.उनकी शिक्षाओं में विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला सम्मिलित है तथा वे विशेष रूप से निम्न विषयों पर केन्द्रित हैं :

“क्रियायोग” ध्यान विज्ञान, जो मनुष्य की चेतना को अनुभूति के उच्चतर स्तरों तक ले जाने वाली राजयोग की एक उन्नत प्रविधि है. सभी सच्चे धर्मों में विद्यमान गहन एकता, शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कल्याण को एक साथ ध्यान में रखते हुए सन्तुलित जीवन जीने के उपाय

पूज्य जगद्गुरु की गिनती अब सम्पूर्ण विश्व में प्राचीन भारतीय शिक्षाओं के सबसे प्रभावशाली दूतों में की जाती है.उनका जीवन और शिक्षाएं सभी क्षेत्रों तथा सभी जातियों, संस्कृतियों, और मतों के व्यक्तियों के लिए प्रेरणा एवं उत्साह का एक शाश्वत स्रोत हैं.

लेखिका: रेणु सिंह परमार

विज्ञापन
Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola