पापमोचनी एकादशी व्रत कथा को सुनने से जीवन के कष्ट होते हैं दूर

Updated at : 14 Mar 2026 2:54 PM (IST)
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Papmochani Ekadashi 2026

पापमोचनी एकादशी व्रत कथा

Papmochani Ekadashi 2026: पापमोचनी एकादशी 2026 में 15 मार्च को मनाई जाएगी. जानें इस व्रत का धार्मिक महत्व और मेधावी ऋषि व अप्सरा मंजुघोषा से जुड़ी पौराणिक व्रत कथा.

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Papmochani Ekadashi 2026 Vrat Katha: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को बेहद पवित्र और फलदायी माना गया है. साल भर में आने वाली सभी एकादशियों का अपना अलग महत्व होता है. इन्हीं में से एक है पापमोचनी एकादशी, जो चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

साल 2026 में पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च को रखा जाएगा. खास बात यह है कि इसी दिन से खरमास की भी शुरुआत हो रही है. इस पावन दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने के साथ पापमोचनी एकादशी की कथा पढ़ना या सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है. ऐसा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और कई गुना अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है.

पापमोचनी एकादशी का धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पापमोचनी एकादशी का व्रत व्यक्ति को उसके किए गए पापों से मुक्ति दिलाता है. “पापमोचनी” शब्द का अर्थ ही है – पापों से मुक्ति दिलाने वाली.

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, उपवास, दान-पुण्य और भक्ति करने से जीवन में आने वाली परेशानियां कम हो सकती हैं. साथ ही व्यक्ति को मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त होती है. इसलिए इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ व्रत रखने की परंपरा है.

पापमोचनी एकादशी की पौराणिक कथा

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान कृष्ण ने यह कथा अर्जुन को सुनाई थी. यह कथा एक महान तपस्वी मेधावी ऋषि से जुड़ी है. प्राचीन समय में चैत्ररथ नाम का एक सुंदर वन था, जहां हमेशा वसंत ऋतु का आनंद रहता था और विभिन्न प्रकार के फूल खिले रहते थे. उसी वन में मेधावी ऋषि भगवान शिव की कठोर तपस्या किया करते थे. एक दिन गंधर्वों के राजा चित्ररथ अपनी अप्सराओं के साथ उस वन में आए. उन अप्सराओं में मंजुघोषा नाम की एक अत्यंत सुंदर अप्सरा भी थी. उसकी नजर मेधावी ऋषि पर पड़ी और उसने अपनी सुंदरता और मधुर संगीत से उन्हें आकर्षित करने का निश्चय किया.

मंजुघोषा थोड़ी दूरी पर बैठकर वीणा बजाने लगी और मधुर गीत गाने लगी. उसी समय कामदेव ने भी उसकी सहायता की. धीरे-धीरे उसके संगीत और रूप को देखकर मेधावी ऋषि का मन विचलित हो गया और वे अपनी तपस्या भूलकर उसके साथ रहने लगे.

समय बीतता गया और उन्हें इसका अहसास भी नहीं हुआ. जब काफी समय बाद मंजुघोषा ने स्वर्ग लौटने की अनुमति मांगी, तब ऋषि को पता चला कि 57 वर्ष बीत चुके हैं. यह जानकर ऋषि को बहुत क्रोध आया और उन्होंने मंजुघोषा को श्राप दे दिया कि वह पिशाचिनी बन जाएगी. श्राप सुनकर वह अत्यंत दुखी हो गई और ऋषि से क्षमा मांगने लगी. तब ऋषि का क्रोध शांत हुआ और उन्होंने बताया कि यदि वह चैत्र कृष्ण पक्ष की पापमोचनी एकादशी का व्रत करेगी तो उसे इस श्राप से मुक्ति मिल सकती है. इसके बाद मेधावी ऋषि भी अपने पिता च्यवन ऋषि के पास गए और अपने पाप का प्रायश्चित पूछा. उनके पिता ने भी उन्हें यही व्रत करने की सलाह दी. दोनों ने श्रद्धा और नियम के साथ पापमोचनी एकादशी का व्रत किया. व्रत के प्रभाव से मंजुघोषा को पिशाचिनी योनि से मुक्ति मिल गई और वह पुनः अपने दिव्य रूप में स्वर्ग लौट गई. वहीं मेधावी ऋषि के पाप भी नष्ट हो गए.

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व्रत कथा सुनने का महत्व

धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति के साथ पापमोचनी एकादशी का व्रत करता है और इसकी कथा सुनता या पढ़ता है, उसे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है. इससे जीवन के कष्ट कम होते हैं और व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति मिलती है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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