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Kumbh Mela 2021: वृंदावन के यमुनातट पर श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगी हठयोगियों की साधना, दिखेगा अनूठा दृश्य...

Updated at : 03 Feb 2021 9:46 AM (IST)
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Kumbh Mela 2021: वृंदावन के यमुनातट पर श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगी हठयोगियों की साधना, दिखेगा अनूठा दृश्य...

Kumbh Mela 2021: उत्तराखंड में शुरू होने वाले महाकुंभ को लेकर तैयारिया जोरो पर है. महाकुंभ के दौरान वृंदावन के यमुनातट पर जगह-जगह साधना करते हुए हठयोगियों का अनूठा दृश्य देखने को मिलेगा. श्रीराधाकृष्ण की लीला स्थली पर यमुना नदी किनारे चतुर्संप्रदाय संतों का अद्भुत संगम श्रद्धालुओं के लिए वृंदावन कुंभ मेला बैठक को आकर्षण का केंद्र बनाएगा.

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Kumbh Mela 2021: उत्तराखंड में शुरू होने वाले महाकुंभ को लेकर तैयारिया जोरो पर है. महाकुंभ के दौरान वृंदावन के यमुनातट पर जगह-जगह साधना करते हुए हठयोगियों का अनूठा दृश्य देखने को मिलेगा. श्रीराधाकृष्ण की लीला स्थली पर यमुना नदी किनारे चतुर्संप्रदाय संतों का अद्भुत संगम श्रद्धालुओं के लिए वृंदावन कुंभ मेला बैठक को आकर्षण का केंद्र बनाएगा. यह धार्मिक आयोजन 16 फरवरी से 25 मार्च तक चलेगा. कुंभ मेला की भव्य शोभायात्रा यही से निकलेगी. शोभायात्रा में हाथी, घोड़ा और ऊंटों की सवारी के साथ ठाकुर जी का डोला, संत-महंत, महामंडलेश्वर और भक्तों की टोलियां शामिल होंगी.

कुंभ मेला के दौरान वृंदावन में संतों का संगम बनता है. यहां हठयोगियों के दर्शन सहजता से हो जाते हैं. वृंदावन कुंभ मेला बैठक में एक पैर पर खड़े होकर साधना करते हुए हठयोगियों को देखा जा सकता है. संपूर्ण धड़ को बालू के अंदर दबाकर और चारों ओर प्रज्ज्वलित कंडों की धूनी रमाकर आराधना भी करते हुए देखने को मिलते हैं. यहां पर अनेक प्रकार से साधना कर इष्ट को रिझाने का अनूठा दृश्य भी इस कुंभ मेला बैठक की विशेषताओं में शामिल रहा है.

पौराणिक व ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार वैष्णव कुंभ मेला बैठक वैष्णवीय परंपरा के साधुओं की तपोस्थली माना गया है. राधाकृष्ण की लीलाभूमि को विभिन्न संप्रदाय के वैष्णव साधकों ने अपनी तपोस्थली बनाया है, जो राम-श्याम की उपासना को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं. मध्ययुग में संत बालानंद द्वारा स्थापित तीन अनी के अठारह अखाड़ों में श्रीराम और श्रीश्याम उपासना के भेद से इनकी स्थापना की थी.

सात अखाड़े रामोपासना व ग्यारह अखाड़े श्यामोपासना प्रधान हैं. इन अखाड़ों से जुड़े निम्बार्क, श्रीमाध्वगोडिय, रामानन्दी, रामानुजी, वल्लभकुली संप्रदाय में वैष्णव उपासना पद्धति को प्रधानता दी गई है, जो सहजयोग से प्रभु को रिझाने में विश्वास करते हैं. यमुनातट पर हठयोगियों की साधना का साक्षात्कार भी श्रद्धालुओं को होता है. मान्यता है कि हठ योगी एकांत स्थान को अपनी साधना स्थली के रूप में चयनित करते हैं, लेकिन यमुनातट पर साधना का पुण्य अवसर उन्हें भी आकर्षित करता है.

ब्रजविदेही चतु:संप्रदायी श्रीमहंत रासविहारी दास काठिया बाबा के अनुसार यह उनके लिए चौथा वृंदावन कुंभ मेला है, जिसकी ध्वजा लेकर वह आश्रम से जाएंगे. इससे पहले इस आश्रम की गुरु परंपरा इसे निभाती आ रही है. छपी खबर के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन कुंभ मेला बैठक की ध्वजा भव्य शोभायात्रा के साथ नगर भ्रमण करते हुए मेला स्थल पहुंचेगी. इसमें दो हाथी, 11 घोड़े और चार ऊंटों की भी सवारी होंगी.

Posted by: Radheshyam Kushwaha

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