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Jagannath Rath Yatra 2025 से पहले बीमार हुए भगवान जगन्नाथ, जानें क्या है स्नान यात्रा का रहस्य

Updated at : 11 Jun 2025 9:14 PM (IST)
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Jagannath Rath Yatra 2025

Jagannath Rath Yatra 2025

Jagannath Rath Yatra 2025: जगन्नाथ रथ यात्रा 2025 से पहले भगवान जगन्नाथ की वार्षिक 'बीमारी' की परंपरा एक अनूठी धार्मिक आस्था से जुड़ी है. स्नान पूर्णिमा के दिन हुए विशेष जलाभिषेक के बाद भगवान को सर्दी लगने की मान्यता है, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए विश्राम दिया जाता है. जानिए इस रहस्य से जुड़ी कथा.

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Jagannath Rath Yatra 2025: निःस्वार्थ भक्ति और अटूट श्रद्धा का इससे सुंदर उदाहरण और क्या हो सकता है कि भक्त अपने ईश्वर को एक नन्हे बालक की तरह मानकर उनकी सेवा करते हैं, जब वे ‘बीमार’ हो जाते हैं. भगवान जगन्नाथ को स्नान पूर्णिमा के बाद सर्दी लगने की मान्यता है और तभी से शुरू होती है उनकी विशेष सेवा—बिल्कुल एक रोगी शिशु की तरह. उन्हें इस दौरान देसी जड़ी-बूटियों से बना काढ़ा पिलाया जाता है, और भोजन में केवल हल्के मौसमी फल और परवल का रस दिया जाता है.

मंदिर के पट बंद

भक्त मानते हैं कि ज्येष्ठ पूर्णिमा से अमावस्या तक भगवान अस्वस्थ रहते हैं और मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं. इस अवधि में कोई विशेष पकवान नहीं, केवल औषधीय भोग चढ़ाया जाता है. लगभग 15 दिन की इस सेवा और उपचार के बाद, भगवान पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथयात्रा पर निकलते हैं, जहां वे अपनी मौसी रोहिणी देवी से मिलने गुंडीचा मंदिर पहुंचते हैं.

108 कलशों से जलाभिषेक

पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार राजा इंद्रद्युम्न भगवान की मूर्ति बनवा रहे थे. शिल्पकार प्रतिमा को अधूरा छोड़ गए, जिससे राजा दुखी हो उठे. तब भगवान स्वयं प्रकट हुए और कहा कि वे इसी अधूरे रूप में बालस्वरूप में विराजमान होंगे. उन्होंने 108 कलशों से जलाभिषेक का आदेश दिया—जो ज्येष्ठ पूर्णिमा का दिन था. तभी से माना जाता है कि कुंए के ठंडे जल से स्नान के कारण भगवान को जुकाम हो जाता है और वे बीमार पड़ जाते हैं.

इस वर्ष, ज्येष्ठ पूर्णिमा आज 11 जून को थी और तभी से भगवान की आरोग्यता की सेवा आरंभ हुई. 27 जून को, रथयात्रा से एक दिन पूर्व, भगवान को पुनः गर्भगृह में लाया जाएगा. उसी दिन वे अपने भाई-बहन के साथ रथ पर सवार होकर मौसी के घर गुंडीचा मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे, जहां भव्य उत्सव, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विविध भोग अर्पित किए जाएंगे. सात दिन बाद भगवान पुनः अपने मूल मंदिर लौटते हैं.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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