Hartalika teej aarti in hindi: जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा..., जय पार्वती माता...इन आरती से संपन्न करें हरतालिका तीज की पूजा

Hartalika Teej Puja Aarti, jai parvati mata aarti, om jai shiv omkara aarti : आज महिलाएं हरितालिका तीज का व्रत रखीं है. सभी सुहागन स्त्रियां इस दिन अपने पति की लंबी उम्र और स्वास्थ्य की कामना से व्रत रखती हैं. आज भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. मान्यता है कि भगवान शिव और देवी पार्वती व्रतियों को सुख-संपत्ति, धन-धान्य, पुत्र-पौत्र और स्वस्थ जीवन का वरदान देते हैं. अगर कोई कुंवारी कन्या अपने विवाह की कामना के साथ इस व्रत को करती है तो भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है. आज पूजा के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती जरूर करनी चाहिए. भगवान शिव और माता पार्वती की आरती के बिना पूजा अधूरी रह जाती है...
NHartalika Teej puja Aarti: आज महिलाएं हरितालिका तीज का व्रत रखीं है. सभी सुहागन स्त्रियां इस दिन अपने पति की लंबी उम्र और स्वास्थ्य की कामना से व्रत रखती हैं. आज भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. मान्यता है कि भगवान शिव और देवी पार्वती व्रतियों को सुख-संपत्ति, धन-धान्य, पुत्र-पौत्र और स्वस्थ जीवन का वरदान देते हैं. अगर कोई कुंवारी कन्या अपने विवाह की कामना के साथ इस व्रत को करती है तो भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है. आज पूजा के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती जरूर करनी चाहिए. भगवान शिव और माता पार्वती की आरती के बिना पूजा अधूरी रह जाती है…
जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।
ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता।।
जय पार्वती माता…
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता।
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता।
जय पार्वती माता…
शुम्भ-निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता।
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा।।
जय पार्वती माता…
सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता।
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।
जय पार्वती माता…
https://www.youtube.com/watch?v=05DcNqBbV80&feature=youtu.be
देवन अरज करत हम चित को लाता।
गावत दे दे ताली मन में रंगराता।।
जय पार्वती माता…
श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता।
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।।
जय पार्वती माता…
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव…॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव…॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव…॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव…॥
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
News Posted by: Radheshyam kushwaha
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