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Hariyali Teej 2025: हरियाली तीज आज, जानें पूजा विधि

Updated at : 27 Aug 2025 8:24 AM (IST)
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Hariyali Teej 2025

Hariyali Teej 2025

Hariyali Teej 2025 : इस दिन वे माता पार्वती की भांति अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं. हरे वस्त्र, हरी चूड़ियां, मेहंदी और झूले का विशेष महत्त्व होता है, जो हरियाली और नवजीवन का प्रतीक हैं

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Hariyali Teej 2025: हरियाली तीज का पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है. यह व्रत विशेष रूप से विवाहित स्त्रियों द्वारा पति की लंबी उम्र और सौभाग्य की कामना से किया जाता है. 2025 में यह पावन व्रत आज 27 जुलाई, रविवार को मनाया जा रहा है:-

– हरियाली तीज का धार्मिक महत्त्व

हरियाली तीज का संबंध माता पार्वती और भगवान शिव से है. मान्यता है कि इस दिन देवी पार्वती ने कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था. यह व्रत स्त्रियों के अखंड सौभाग्य, सुख-शांति और वैवाहिक जीवन की सफलता का प्रतीक है. हरियाली तीज, प्रेम, समर्पण और तपस्या का अद्भुत संगम है.

– व्रत एवं पूजा विधि

  • प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ हरे वस्त्र धारण करें.
  • पूजन स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर, भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें.
  • देवी को सिंदूर, चूड़ियां, मेहंदी, वस्त्र, फल, फूल व श्रृंगार सामग्री अर्पित करें.
  • हरियाली तीज व्रत कथा का श्रद्धापूर्वक पाठ करें.
  • निर्जल व्रत करना श्रेष्ठ माना गया है, परंतु स्वास्थ्य अनुसार फलाहार किया जा सकता है.
  • शाम को दीपक जलाकर शिव-पार्वती की आरती करें और मनोकामना हेतु प्रार्थना करें.

– सुहागिनों के लिए विशेष पर्व

यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए शुभ माना जाता है. इस दिन वे माता पार्वती की भांति अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं. हरे वस्त्र, हरी चूड़ियां, मेहंदी और झूले का विशेष महत्त्व होता है, जो हरियाली और नवजीवन का प्रतीक हैं.

– हरियाली तीज की कथा का महत्त्व

हरियाली तीज व्रत के दिन व्रती महिलाओं को माता पार्वती की तपस्या और भगवान शिव से विवाह की कथा सुननी चाहिए. इस कथा से जीवन में धैर्य, प्रेम और आत्मविश्वास की प्रेरणा मिलती है. कथा का श्रवण व वाचन व्रत को पूर्णता प्रदान करता है.

– पारंपरिक सांस्कृतिक उत्सव

ग्रामीण क्षेत्रों में हरियाली तीज के दिन महिलाएं झूला झूलती हैं, लोकगीत गाती हैं और पारंपरिक नृत्य करती हैं. यह पर्व प्राकृतिक सौंदर्य, हरियाली और स्त्री शक्ति का उत्सव भी है, जो हमारे सांस्कृतिक मूल्यों को जीवंत करता है.

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हरियाली तीज केवल व्रत नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक साधना है. यह दिन माँ पार्वती के आदर्शों को आत्मसात करने, प्रेम और संयम से जीवन को सजाने का अवसर है. इस पावन दिन पर विधिपूर्वक पूजा कर, देवी का आशीर्वाद प्राप्त करें.

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Ashi Goyal

लेखक के बारे में

By Ashi Goyal

Ashi Goyal is a contributor at Prabhat Khabar.

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