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Hariyali Teej 2025 : हरियाली तीज का महत्व कुंवारी कन्याओं के लिए, मिलेगा मनचाहा वर

Updated at : 12 Jul 2025 7:40 PM (IST)
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Hariyali Teej 2025

Hariyali Teej 2025

Hariyali Teej 2025 : हरियाली तीज 2025 न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह कुंवारी कन्याओं के लिए आत्मिक शुद्धता और वर प्राप्ति का मार्ग भी है.

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Hariyali Teej 2025 : हरियाली तीज, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है. यह पर्व मुख्य रूप से सुहागन स्त्रियों और कुंवारी कन्याओं के लिए अत्यंत पावन माना गया है. विशेष रूप से कुंवारी कन्याएं इस दिन व्रत रखकर माता पार्वती से मनचाहा वर प्राप्त करने की कामना करती हैं. यह पर्व शिव-पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक है और कन्याओं के लिए यह एक आध्यात्मिक उपासना का अवसर भी होता है, जहां वे धार्मिक नियमों का पालन करते हुए सात्त्विक जीवन शैली की ओर बढ़ती हैं:-

– मनचाहा वर प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ दिन

हरियाली तीज को “कन्याओं के सौभाग्य पर्व” के रूप में भी जाना जाता है. इस दिन व्रत करने से माता पार्वती की कृपा से कन्याओं को सात्विक, चरित्रवान और इच्छानुसार वर की प्राप्ति होती है. यह दिन शिव-पार्वती के पवित्र विवाह की स्मृति में मनाया जाता है.

– जीवनसाथी के रूप में शिव जैसा पति पाने की प्रार्थना

माता पार्वती ने वर्षों की कठिन तपस्या के बाद भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था. कुंवारी कन्याएं हरियाली तीज पर उसी भाव से व्रत करती हैं, जिससे उन्हें शिव के समान आदर्श और समर्थ जीवनसाथी प्राप्त हो.

– कन्याओं में संयम, श्रद्धा और भक्ति का विकास

यह व्रत न केवल इच्छित वर की प्राप्ति के लिए किया जाता है, बल्कि इसके द्वारा कन्याओं में धार्मिक अनुशासन, आध्यात्मिक सोच, और शारीरिक संयम का विकास होता है. यह उन्हें आत्मबल और धैर्य की ओर प्रेरित करता है.

– कुंडली दोष और विवाह में आने वाली रुकावटें होंगी दूर

हरियाली तीज पर किया गया व्रत और पूजन कई बार मंगल दोष, ग्रह दोष या विवाह में देरी जैसी समस्याओं को शांत करता है. कन्याएं माता गौरी की पूजा कर अपने वैवाहिक जीवन को सुखद बनाने की कामना करती हैं.

– सांस्कृतिक और पारिवारिक जुड़ाव का अवसर

इस दिन झूला झूलने, गीत गाने और सुहाग की परंपराओं में भाग लेने से कन्याओं को भारतीय संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों की गहराई से समझ होती है. यह उनके व्यक्तित्व में सामाजिक संतुलन और भावनात्मक परिपक्वता को बढ़ाता है.

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हरियाली तीज 2025 न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह कुंवारी कन्याओं के लिए आत्मिक शुद्धता और वर प्राप्ति का मार्ग भी है. माता पार्वती की कृपा से यदि यह व्रत श्रद्धा और नियम से किया जाए, तो जीवन में सुख, प्रेम और सौभाग्य अवश्य प्राप्त होता है.

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Ashi Goyal

लेखक के बारे में

By Ashi Goyal

Ashi Goyal is a contributor at Prabhat Khabar.

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