गुरु प्रदोष व्रत 2025 में इस दुर्लभ संयोग में शिव आराधना का मिलेगा दोगुना फल

Guru Pradosh Vrat March 2025 (GI Generated Image)
Guru Pradosh Vrat March 2025: धार्मिक परंपरा के अनुसार, त्रयोदशी तिथि पर विधिपूर्वक प्रदोष व्रत करने से साधक को जीवन में नए दिशा-निर्देश प्राप्त होते हैं. इसके साथ ही, महादेव की कृपा से सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है.
Guru Pradosh Vrat March 2025: आने वाले 27 मार्च 2025 को एक विशेष संयोग उत्पन्न होने जा रहा है. इस दिन प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि एक साथ आ रहे हैं, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. इस विशेष दिन को ‘गुरु प्रदोष व्रत’ के नाम से जाना जाएगा, क्योंकि यह गुरुवार को पड़ता है और यह दिन भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन शिवलिंग में स्वयं भगवान शिव का निवास होता है, इसलिए जो भक्त सच्चे मन से पूजा करते हैं, उन्हें विशेष कृपा प्राप्त होती है.
प्रदोष व्रत क्या है?
भगवान शिव को प्रसन्न करने का यह दिन विशेष महत्व रखता है. इस दिन उपवास करने से जीवन की सभी कठिनाइयाँ समाप्त होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है. स्कंद पुराण के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब हलाहल विष निकला, तो न देवताओं ने इसे ग्रहण किया और न ही असुरों ने. तब भगवान शिव ने इसे अपने कंठ में धारण किया, जिसके कारण उनका गला नीला हो गया और वे ‘नीलकंठ’ के नाम से जाने गए. इसी कारण यह दिन प्रदोष व्रत के रूप में मनाया जाता है.
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मासिक शिवरात्रि का महत्व
- हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को यह व्रत किया जाता है.
- यह दिन शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक माना जाता है.
- यह अमावस्या से एक दिन पहले आता है, जब चंद्रमा नहीं होता, जो मन की शुद्धि और आत्मचिंतन के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है.
- इस दिन रात्रि जागरण, उपवास और शिवलिंग पर जल अर्पित करने से विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है.
गुरु प्रदोष व्रत 2025: इस दिन कैसे करें पूजा?
प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि 2025 की तिथियां और शुभ मुहूर्त
तारीख: 27 मार्च 2025
तिथि आरंभ: 1:42 रात्रि (27 मार्च)
तिथि समाप्त: 11:03 रात्रि (27 मार्च)
पूजा मुहूर्त: 6:36 संध्या – 8:56 संध्या
मासिक शिवरात्रि
तारीख: 27 मार्च 2025
तिथि आरंभ: 11: 03 रात्रि (27 मार्च)
तिथि समाप्त: 7:55 रात्रि (28 मार्च)
शिव पूजा का शुभ समय: 12:03 रात्रि – 12: 49 (मध्यरात्रि)
इस दिन क्यों है पूजा का विशेष महत्व?
चूंकि प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि एक ही दिन मनाए जा रहे हैं, इसलिए यह दिन भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. शिव भक्तों के लिए यह विशेष अवसर बहुत ही शुभ हो सकता है. इस दिन यदि श्रद्धा और भक्ति के साथ शिवजी की पूजा की जाए, तो सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और जीवन में शांति तथा समृद्धि का आगमन होता है.
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ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
ज्योतिष वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
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लेखक के बारे में
By Shaurya Punj
मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.
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