Diwali 2025: कैसे हुई दिवाली मनाने की परंपरा की शुरुआत? जानें त्रेतायुग और सतयुग से जुड़ी इस पर्व की कथा

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Diwali 2025: दिवाली को रोशनी का त्योहार भी कहा जाता है. हर साल इस त्योहार को बड़े ही धुमधाम के साथ पूरे देशभर में मनाया जाता है. इस पर्व को कार्तिक मास से आमवस्या तिथि को मानया जाता है. भारत के कई राज्यों में इस दिन काली पूजा मनाने की भी पंरपरा है. इस साल यह पर्व 20 अक्टुबर को मनाई जाएगी. इस दिन लोग घरों को नई नवेली दुल्हन की तरह सजाते है और पूरे घर में दिपक जलाते है. माना जाता है ऐसा करने के माता लक्ष्मी घर में खुशिया लेकर आती है. लेकिन आपने सोचा है भारत में दिवाली मनाने की पंरपरा की शुरूआत कैसे हुए? चलिए दिवाली शूरुआत के पिछे के इतिहास को आसान शब्दों में जानने की कोशिश करते है .

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Diwali 2025: दिवाली को रोशनी का त्योहार भी कहा जाता है. हर साल यह त्योहार बड़े ही धूमधाम के साथ पूरे देशभर में मनाया जाता है. इस पर्व को कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. भारत के कई राज्यों में इस दिन काली पूजा मनाने की भी परंपरा है. इस साल यह पर्व 20 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा. इस दिन लोग घरों को नई नवेली दुल्हन की तरह सजाते हैं और पूरे घर में दीपक जलाते हैं. माना जाता है कि ऐसा करने से माता लक्ष्मी घर में खुशियां लेकर आती हैं.लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भारत में दिवाली मनाने की परंपरा की शुरुआत कैसे हुई? चलिए, दिवाली की शुरुआत के पीछे के इतिहास को आसान शब्दों में जानने की कोशिश करते हैं.

दिवाली पर्व की शुरुआत कैसे हुई?

धार्मिक मान्यताओं और कहानियों के अनुसार, सतयुग में देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था. इस समय कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान धनवंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. वहीं, इसके दो दिन बाद माता लक्ष्मी कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को कमल पर विराजमान होकर प्रकट हुई थीं. तभी से माता लक्ष्मी के प्रकटोत्सव के रूप में हर साल इस तिथि पर दीपक जलाकर उनकी पूजा की जाती है.

क्या है त्रेतायुग से जुड़ी दिवाली की शुरुआत की कहानी?

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान राम 14 वर्षों के वनवास के बाद माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अपनी जन्मभूमि अयोध्या लौटे थे. भगवान राम के आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दुल्हन की तरह सजाया और रात में दीपक जलाकर उत्सव मनाया. यह दिन संयोग से कार्तिक मास की अमावस्या तिथि का था. तभी से इस दिन दीपक जलाकर दिवाली मनाने की परंपरा शुरू हुई.

दिवाली 2025 पूजा का शुभ मुहूर्त कितने बजे से शुरू होगा?

दिवाली पूजा का शुभ मुहूर्त 20 अक्टुबर की शाम 7 बजकर 8 मिनट से लेकर 8 बजकर 18 मिनट तक रहेगा.

दिवाली के दिन किन मंत्रों का जांप करें?

दिवाली के दिन माता लक्ष्मी , भगवान गणेश और भगवान के कुवेड़ के मंत्रो का जाप करना चाहिए.

माता लक्ष्मी मंत्र 

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः॥

भगवान गणेश के लिए मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः॥

कुबेर देव के लिए मंत्र

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये नमः॥

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. प्रभात खबर किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.

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नेहा कुमारी

लेखक के बारे में

By नेहा कुमारी

नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

डिजिटल पत्रकारिता में उन्होंने धर्म, ज्योतिष और भारतीय परंपराओं से जुड़े विषयों पर विशेष अनुभव हासिल किया है. उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सटीक, विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को आसानी से समझ सकें.

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Frequently Asked Questions

धार्मिक मान्यताओं और कहानियों के अनुसार, सतयुग में देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था. इस समय कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान धनवंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे. वहीं, इसके दो दिन बाद माता लक्ष्मी कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को कमल पर विराजमान होकर प्रकट हुई थीं. तभी से माता लक्ष्मी के प्रकटोत्सव के रूप में हर साल इस तिथि पर दीपक जलाकर उनकी पूजा की जाती है.