चैत्र अमावस्या को क्यों कहते हैं भूतड़ी? जानें इसका रहस्य

भूतड़ी अमावस्या की सांकेतिक तस्वीर (एआई निर्मित)
Chaitra Amavasya 2026: चैत्र अमावस्या को "भूतड़ी अमावस्या" क्यों कहा जाता है? क्या आपके मन में कभी यह सवाल आया है? अगर हां, तो यह आर्टिकल आपके लिए है. आइए आसान भाषा में इस नाम के पीछे छिपे रहस्य को विस्तार से समझते हैं.
Chaitra Amavasya 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास की अमावस्या वर्ष की अंतिम अमावस्या होती है. साल 2026 में यह 19 मार्च को पड़ रही है. यह हिंदू नववर्ष के ठीक एक दिन पहले आती है. यह दिन पितरों के तर्पण, पूजा-पाठ, मंत्र जाप और स्नान-दान के लिए बेहद शुभ माना जाता है. आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से यह दिन जितना खास है, उतना ही रहस्यमय भी माना जाता है.
‘भूतड़ी अमावस्या’ का रहस्य
माना जाता है कि चैत्र अमावस्या के दिन ब्रह्मांड में नकारात्मक ऊर्जाएं और अतृप्त आत्माएं (पिशाच या भूत तत्व) अधिक सक्रिय हो जाती हैं. हिंदू वर्ष का अंतिम दिन होने के कारण यह एक संधिकाल (बदलाव का समय) माना जाता है. इस दिन ऊपरी बाधाओं, मानसिक तनाव या नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ने की संभावना रहती है.
ऐसे में लोग इन बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और विशेष धार्मिक अनुष्ठान करते हैं. तांत्रिक साधनाओं के लिए भी यह रात अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है. इसी कारण इसे “भूतड़ी अमावस्या”, यानी भूतों या नकारात्मक तत्वों से जुड़ी अमावस्या कहा जाता है.
चैत्र अमावस्या 2026: तिथि और मुहूर्त
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 18 मार्च, सुबह 08:26 बजे
- अमावस्या तिथि समाप्त: 19 मार्च, सुबह 06:53 बजे
क्या करें इस दिन?
दान-पुण्य: काले तिल, अनाज, वस्त्र और गुड़ का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है.
पीपल की पूजा: अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि दोष और पितृ दोष शांत होते हैं.
सात्विक भोजन: इस दिन तामसिक भोजन और मदिरा से दूर रहना चाहिए, ताकि मन शांत रहे और नकारात्मकता हावी न हो.
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By Neha Kumari
प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.
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