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Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी पर मां सरस्वती को क्यों चढ़ाई जाती है पीली बूंदी? जानिए इसका महत्त्व

Updated at : 16 Jan 2026 5:55 AM (IST)
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Basant Panchami 2026 boondi importance in hindi

बसंत पंचमी पर पीली बूंदी का महत्व

Basant Panchami 2026: इस बार बसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी. जानिए क्यों इस दिन मां सरस्वती को पीली बूंदी चढ़ाई जाती है और क्या है इसका धार्मिक महत्व और शुभ संकेत

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Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो ज्ञान, विद्या और वाणी की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है. यह पर्व माघ शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है और इसी दिन से ऋतुओं के राजा बसंत का आगमन माना जाता है. चारों ओर पीले फूल, सरसों की बहार और प्रकृति में नई ऊर्जा दिखाई देती है, जो इस पर्व के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती है.

मां सरस्वती और पीले रंग का संबंध

मां सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि और विवेक की देवी माना जाता है. पीला रंग बुद्धि, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक होता है. बसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र धारण करने और पीले रंग के व्यंजन अर्पित करने की परंपरा इसी कारण से जुड़ी है. पीला रंग मन को एकाग्र करता है और सीखने की क्षमता को बढ़ाता है.

पीली बूंदी चढ़ाने की धार्मिक मान्यता

बसंत पंचमी पर मां सरस्वती को पीली बूंदी का भोग लगाने की विशेष परंपरा है. मान्यता है कि पीली बूंदी शुद्धता, मधुरता और सात्त्विक गुणों का प्रतीक होती है. बेसन, घी और केसर से बनी पीली बूंदी देवी को अत्यंत प्रिय मानी जाती है. इसका भोग लगाने से विद्या, स्मरण शक्ति और वाणी में मधुरता का आशीर्वाद मिलता है.

शास्त्रीय और लोक परंपराओं में उल्लेख

शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी से ही शैक्षणिक कार्य, लेखन और विद्यारंभ की शुरुआत शुभ मानी जाती है. इस दिन मां सरस्वती को मीठा पीला प्रसाद अर्पित करने से पढ़ाई में आ रही बाधाएं दूर होती हैं. विशेष रूप से छात्र, शिक्षक और कलाकार इस दिन पीली बूंदी का भोग लगाते हैं.

बसंत ऋतु और पीली मिठाइयों का महत्व

बसंत ऋतु में फसलों में पकने वाली सरसों और चने का रंग भी पीला होता है. पीली बूंदी में प्रयोग होने वाला बेसन नई फसल का प्रतीक माना जाता है. इससे देवी को अर्पित भोग प्रकृति और मानव के सामंजस्य को दर्शाता है.

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श्रद्धा और आस्था का प्रतीक

बसंत पंचमी पर मां सरस्वती को पीली बूंदी चढ़ाना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक है. यह भोग देवी को प्रसन्न करने के साथ-साथ जीवन में ज्ञान, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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