Ahoi Ashtami Syau Mala: अहोई अष्टमी के दिन पहनी जाती है स्याहु की माला, जानें इसका महत्व

Published by : Shaurya Punj Updated At : 23 Oct 2024 11:18 AM

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Ahoi ashtami 2024 syahu mala importance

Ahoi ashtami 2024: अहोई अष्टमी व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन अहोई माता की आराधना की जाती है और महिलाएं स्याहु माला धारण करती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्याहु माला क्या है और अहोई अष्टमी के अवसर पर इसे पहनने का महत्व क्या है?

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Ahoi Ashtami 2024 Syau Mala Importance: हिंदू धर्म में प्रत्येक व्रत का विशेष महत्व होता है, क्योंकि हर व्रत किसी न किसी इच्छा या मनोकामना की पूर्ति के लिए किया जाता है. कार्तिक माह व्रत और पूजा के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. इस माह में कई व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं, जिनमें से एक प्रमुख व्रत अहोई अष्टमी है. यह व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आयोजित किया जाता है. महिलाएं इस व्रत को संतान प्राप्ति और संतान की दीर्घायु की कामना के लिए करती हैं. इस दिन अहोई माता की पूजा की जाती है और महिलाएं स्याहु माला पहनती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्याहु माला क्या होती है और अहोई अष्टमी के दिन इसे क्यों पहना जाता है?

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स्याहु माला पहनने के नियम

स्याहु लॉकेट चांदी से निर्मित होता है और इसे अहोई अष्टमी के दिन रोली का टीका लगाकर पूजन करने के पश्चात ही धारण किया जाता है. इसे कलावा या मौली में पिरोकर पहना जाता है. कहा जाता है कि यह धागा रक्षा सूत्र के समान कार्य करता है. इसके अतिरिक्त, माला में हर वर्ष एक चांदी का मोती जोड़ने का नियम है. इस मोती को बच्चों की उम्र के अनुसार बढ़ाया जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से संतान को दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

स्याहु माला की पूजा का विधि

अहोई अष्टमी के अवसर पर महिलाएं निर्जला व्रत का पालन करती हैं और अहोई माता की पूजा करती हैं. इस दिन पूजा के लिए मंदिर में अहोई माता की तस्वीर स्थापित करें और मिट्टी के घड़े में पानी भरकर रखें. अहोई माता की तस्वीर पर स्याहु माला चढ़ाएं और पूजा करें. यह ध्यान रखना आवश्यक है कि इस पूजा में संतान को साथ बैठाना शुभ माना जाता है. सबसे पहले अहोई माता को तिलक करें और फिर स्याहु माता के लॉकेट पर तिलक करें. इसके बाद, वह माला अपने गले में पहन लें. दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद, शाम को तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें. यह माला दिवाली तक पहनी जाती है और उसके बाद इसे सुरक्षित रख लिया जाता है. पूजा में रखे गए मिट्टी के घड़े का पानी दिवाली के दिन संतान को स्नान कराने के लिए उपयोग किया जाता है. कहा जाता है कि यह स्याहु माता का आशीर्वाद है, जो संतान को लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य का वरदान देता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

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शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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