ऋणायन से शरीर का पोषण
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :03 Oct 2015 12:32 AM
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मनुष्य का जीवन सुरक्षित रहे, इसके लिए पेड़-पौधे बनाये गये. उन्हीं से ऋणायन बना है, जो मनुष्यों के स्वास्थ्य की रक्षा करता है. ऋणायन हरे-भरे वृक्ष, पहाड़ की चोटी और समुद्र की लहरों से पैदा होता है. बड़े शहरों के लोग जब बीमार पड़ने लगते हैं, तो डॉक्टर उन्हें किसी हिल स्टेशन पर जाने की […]
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मनुष्य का जीवन सुरक्षित रहे, इसके लिए पेड़-पौधे बनाये गये. उन्हीं से ऋणायन बना है, जो मनुष्यों के स्वास्थ्य की रक्षा करता है. ऋणायन हरे-भरे वृक्ष, पहाड़ की चोटी और समुद्र की लहरों से पैदा होता है. बड़े शहरों के लोग जब बीमार पड़ने लगते हैं, तो डॉक्टर उन्हें किसी हिल स्टेशन पर जाने की सलाह देते हैं, क्योंकि शहरों में हरे-भरे पेड़-पौधे बहुत कम होते हैं.
यही वजह है कि लोग हिल स्टेशनों, जंगलों, पहाड़ों और समुद्र के किनारे स्वास्थ्य लाभ करने के उद्देश्य से विहार करने जाते हैं. हमारा शरीर प्रकृति का एक छोटा अंश है. शरीर में लगभग 20 लाख रोम छिद्र हैं, जो प्रतिक्षण सांस लेते रहते हैं और बाहर के वातावरण से सिग्नल प्राप्त करते हैं. अगर बाहर स्वास्थ्यप्रद वातावरण हो, तो शरीर को स्वस्थ और पौष्टिक वायु प्राप्त होती है और अगर बाहर का वातावरण मरुभूमि सदृश हो, जहां कोई हरियाली न हो, तो वह सूखा वातावरण ऋणायन के अभाव में निष्प्राण हो जाता है. यह हमारे शरीर के लिए हानिकारक है.
इसलिए आज का विज्ञान कहता है कि यदि शरीर स्वस्थ रखना है, तो हरियाली लगाओ, ऋणायन से शरीर का पाेषण करो. यह विडंबना है कि प्रगति के नाम पर हम हरे पेड़ों को काट रहे हैं.
– आचार्य सुदर्शन
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