ग्रहों के भाव तय करते हैं शिक्षा की दिशा-दशा

Published at :03 Aug 2019 7:21 AM (IST)
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ग्रहों के भाव तय करते हैं शिक्षा की दिशा-दशा

पीएन चौबे, ज्योतिषाचार्य हमारे सौरमंडल में नौ ग्रह भ्रमणशील हैं, जिनका नियंत्रण परमपिता परमेश्वर के हाथ में है. उनकी दिव्यसत्ता ही जीवन में हर पल घटने वाली घटनाओं का प्रमुख नियंत्रक है. तुलसी की कालजयी रचना मानस भी इसे अहोभाव से स्वीकार करती है- ‘सबही नचावत राम गोसाईं, नाचत नर मर्कट की नाइ’. आज हर […]

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पीएन चौबे, ज्योतिषाचार्य
हमारे सौरमंडल में नौ ग्रह भ्रमणशील हैं, जिनका नियंत्रण परमपिता परमेश्वर के हाथ में है. उनकी दिव्यसत्ता ही जीवन में हर पल घटने वाली घटनाओं का प्रमुख नियंत्रक है.
तुलसी की कालजयी रचना मानस भी इसे अहोभाव से स्वीकार करती है- ‘सबही नचावत राम गोसाईं, नाचत नर मर्कट की नाइ’. आज हर कोई आगे बढ़ने की होड़ से बच्चों पर अनावश्यक बोझ डाल देते हैं, जो कभी-कभी दुखद रूप ले लेता है. इसके ज्योतिषय पक्ष का अवलोकन करें, तो कुंडली के बारह भावों में दूसरे से पंचम तक शिक्षा के भाव हैं. पंचम भाव उच्च शिक्षा का है, तो चौथा भाव इंटर तक की शिक्षा को निरुपित करता है. कारक ग्रहों में गुरु शिक्षा का नियंत्रक है.
इन चार भावों में जहां कहीं भी पापी ग्रहों क्रमश: शनि, राहू, केतु या अष्टम भाव के स्वामी से युक्त एवं दृष्ट होंगे, उस भाव से संबंधित शिक्षा का ह्रास होगा.
लेकिन आगे चलकर सब ठीक होगा. अगर दूसरा और तीसरा भाव पाप प्रभाव में होगा या पाप ग्रहों की दशा-अंतर्दशा होगी, तो बचपन में संतान पढ़ने में अच्छा नहीं होगी. वहीं अगर इंटर या दशवें वर्ग का भाव चौथे पर पापी ग्रहों की दृष्टि-युति हो, गोचर के ग्रह एवं महादशा शुभ नहीं हो, तो नंबर अच्छे नहीं आयेंगे. लेकिन ग्रहों के योगायोग से वह अच्छी शिक्षा प्राप्त करेगी. कैरियर के चुनाव में सही निर्णय ले सकेगी.
उच्च शिक्षा में ग्रहों का प्रभाव : नौ ग्रहों में गुरु क़ानून शिक्षा, बीएड, एमएड, सूर्य भाषा एवं चिकित्षा, बुध कॉमर्स एवं सिविल इंजीनियरिंग, शुक्र कला, आर्किटेक, नृत्य, फिल्म, मंगल इलेक्ट्रिकल या कंप्यूटर इंजीनियरिंग एवं शनि मैकेनिकल एव माइनिंग की शिक्षा देता है.
पंचम भाव का चंद्रमा या एकादश भाव का बुध यदि दोषरहित एवं उच्च हो, तो वह श्रेष्ठ संस्थान में दाखिला ले शिक्षा पूरी करेगा. राहु, शनि, सूर्य एवं बुध चारों ग्रह का संबंध चिकित्षा से है. छठा भाव रोग का है, द्वादश भाव अस्पताल है.अगर इन ग्रहों का संबंध धन एवं उपरोक्त भाव से हो, तो वह अच्छा डॉक्टर होगा. सूर्य, मंगल, शनि एवं गुरु का प्रभाव सरकार से है. अगर इनमें से कोई भी दो ग्रह उच्च हो, तो वह अच्छे पद पर होगा. मेरी दृष्टि में यदि पंचम भाव में चंद्रमा या लाभ भाव में बुध हो एवं इन पर पाप प्रभाव नहीं हो तो वह विद्यार्थी विलक्षण होगा.
संपर्क-9934557894
विद्या से संबंधित ग्रहों को कैसे ठीक करें
इसे प्रभावित करने वाले पांच ग्रह हैं : सूर्य-आत्मविश्वास, चंद्रमा-मन, बुध बुद्धि, मंगल-उर्जा, गुरु-ज्ञान को निरुपित करते हैं. कुंडली में इनमें से कोई ग्रह कमजोर हो, तो उपायों से इन्हें ठीक करें.
सूर्य के लिए शाकाहार रहें एवं पिता से आशीर्वाद लें. चंद्रमा के लिए मां का आशीर्वाद लें एवं जल को दूषित न करें. बुध के लिए फुआ, मौसी से आशीर्वाद लें, हरे पौधे घर में लगाएं. मंगल के लिए भाई, चाचा से आशीर्वाद लें. हाथ में लाल मौली धारण करें एवं मंगलवार को हनुमान मंदिर जाएं. गुरु के लिए शिक्षकों से आशीर्वाद लें. गले में नेपाली गणेश रुद्राक्ष सोमवार को धारण करें.
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