ज्योतिषीय समाधान : क्या जनवरी में जन्में लोग पत्थरदिल होते हैं ? जानें क्या कहते हैं सद्‌गुरु स्वामी आनंद जी

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date

सद्‌गुरु स्वामी आनंद जी एक आधुनिक सन्यासी हैं, जो पाखंड के धुरविरोधी हैं और संपूर्ण विश्व में भारतीय आध्यात्म व दर्शन के तार्किक तथा वैज्ञानिक पक्ष को उजागर कर रहे हैं. सद्‌गुरुश्री के नाम से प्रख्यात कार्पोरेट सेक्टर से अध्यात्म में क़दम रखने वाले यह आध्यात्मिक गुरु नक्षत्रीय गणनाओं तथा गूढ़ विधाओं में पारंगत हैं तथा मनुष्य के आध्यात्मिक, सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक व्यवहार की गहरी पकड़ रखते हैं. आप भी इनसे अपनी समस्याओं को लेकर सवाल पूछ सकते हैं. इसके लिए आप इन समस्याओं के संबंध में लोगों के द्वारा किये गये सवाल के अंत में पता देख सकते हैं....

सवाल- क्या जनवरी में जन्में लोग पत्थरदिल होते हैं ?
मेरी जन्म तिथि 23 जनवरी 1992 है.
-अनन्या सक्सेना
जवाब- नहीं, हर्ग़िज़ नहीं. सदगुरु श्री कहते हैं कि जनवरी में जन्मे लोग कर्मठ होते हैं। इनके स्वभाव में ज़िद शुमार है. उन्हें जो सही लगता है, वो दूसरों की परवाह किए बिना उस पर क़ायम रहते हैं और हर सुझावों को ठुकरा कर स्वयं को ही सही मानते हैं. शायद इसीलिए इस माह में जन्म लेने वालों को संवेदनहीन मान लिया जाता है. ये लोग अपने प्रेम को प्रदर्शित करने के लिए अक्सर मौलिक विचारों को अपनाते हैं, जो इनके साथी को हज़म नहीं होता। हां, ये प्रत्यक्ष रूप से रोमांटिक नहीं होते, इसलिए प्रेम के प्रति उदासीन घोषित कर दिए जाते हैं. सच तो ये है कि ये लोग पत्थरदिल नहीं, बल्कि बेहद भावुक, कोमल मन, प्रेमी ह्रदय और संवेदनशील होते है. अपने अपमान और जीवन की अप्रिय घटनाओं को ये आसानी से भूल नहीं पाते.
सवाल- कुंडली में देह भाव क्या होता है.
- नीता शर्मा
जवाब- सदगुरुश्री कहते हैं कि ज्योतिष में देह भाव से आशय लग्न यानि प्रथम भाव से है, जिसे अंग्रेज़ी में Ascendant कहते हैं. इसे उदय भाव, जन्म भाव, वपु भाव, तनु भाव, कल्प भाव और विलग्न भाव भी कहा जाता है. इससे व्यक्ति के व्यक्तित्व का आकलन किया जाता है. यह भाव आत्मा और उसकी नवीन देह का सम्पर्क सूत्र है. लग्न का निर्धारण जन्म के समय पूर्वी क्षितिज में उदित होने वाली राशि के अनुसार होता है. आकाश मण्डल को 360 डिग्री मान कर उसे 12 भागों में विभक्त किया जाये तो पूर्व के 30 डिग्री की राशि उदय भाव या लग्न कहलाती है.
सवाल- मेरा बेटा गाली गलौज करने लगा है. किसी ने इसे अनर्थकारी बताया है.
जन्मतिथि- 09.10.2001, समय- 20.05, स्थान-पटना.
- दीपक पाण्डेय
जवाब- सदगुरुश्री कहते हैं कि हमारे मुख से निकलने वाले प्रत्येक शब्द एक मंत्र की तरह हैं, जो किसी निर्देश की तरह कार्य करता है. मंत्रों या मुख से निकलने वाले प्रत्येक शब्दों को आप वॉयस कमांड भी कह सकते हैं, जो हमारे आभामण्डल के साथ हमारे भविष्य की भी रचना करते हैं. लिहाज़ा सुशब्द अच्छे फल और अपशब्द अशुभ परिणाम का सृजन करते हैं. अपशब्द अनजाने में ही सही पर निःसंदेह हमारे उलटे जीवन की पटकथा के रचनाकार है. सुखद भविष्य के लिए मीठी वाणी, मधुर व सुवचनों का ही इस्तेमाल अनिवार्य शर्त है. मीठे वचन सहजता से हमारे संघर्ष में कमी कर देते हैं. आपके सुपुत्र की राशि मिथुन और लग्न वृष है. उसकी कुण्डली में वाणी का मालिक बुध जहां षष्ठ भाव में विराज कर वाणी को प्रभावित कर रहा कर रहा है, वहीं सुखेश सूर्य पंचम में बैठ कर उसके स्वभाव में रूखापन और नाटकीयता के साथ क्षणिक रूप से विवेकहीनता का समावेश कर रहा है. लग्न में शनि, नकारात्मक चिंतक और हठी भी बना कर और उलटी वाणी के द्वारा यश को भी नष्ट कर रहा है. नियमित रूप से गुड़ और गेहूँ के साथ हरी सब्ज़ियों का दान व भोजन के प्रथम ग्रास अग्नि को अर्पित करने से लाभ होगा, ऐसा ज्योतिषिय मान्यतायें कहती हैं.
सवाल- मैं अपने जीजाजी से बहुत प्यार करती हूं. किसी भी तरह उनसे विवाह करना चाहती हूँ।जीजाजी तलाक़ लेने में हिचक रहे हैं। पर मुझे बहन की भी बहुत चिन्ता होती है. मुझे क्या करना चाहिए। जन्म तिथि- 16.06.1992, जन्म समय-20.19, जन्म स्थान -धनबाद.
- निराली सिन्हा
जवाब- सदगुरुश्री कहते हैं कि आपकी राशि और लग्न दोनों कुंभ है. आपके पति भाव में षष्ठेश व लाभेश शुक्र, भाग्येश सूर्य और सप्तमेश तथा कर्मेश बुध विराज कर आपको बेमेल संबंधों के प्रति सतर्क रहने की ताक़ीद कर रहे हैं. लग्न में राहु बैठ कर उलटे फ़ैसलों से क्षति का संकेत दे रहे हैं. बिना तलाक़ के, बहन के पति से विवाह के विचार के लिए आपको ज्योतिष से पहले नैतिक, सामाजिक और क़ानूनी सलाह की दरकार है. एक पंक्ति में कहा जाय तो रिश्तों को उलझाने का ख़याल सुखी जीवन के लिए बहुत उत्तम नहीं है. मैं आपको अपने इस फ़ैसले पर पुनर्विचार करने की अनुशंसा करता हूं.
सवाल- मेरे घर में इशान्य कोण कटा है। किसी ने इसे गम्भीर वास्तु दोष बता कर इसके निवारण के लिए कई तरह के महंगे उपायों की अनुशंसा की है. आपका क्या परामर्श है?
- अजय दुबे
जवाब- सदगुरु श्री कहते हैं कि वास्तु के नियमों के अनुसार उत्तर-पूर्व कोण, जिसे इशान्य भी कहते हैं का कटना ही नहीं, बल्कि किसी भी कोण का विच्छेद शुभ फलों में कुछ कमी करता है. पर इसके लिए बहुत चिंतित होने या भारी ख़र्च के चक्करों में फंसने की ज़रूरत हर्ग़िज़ नहीं है. आप इशान्य कोण पर बड़े दर्पण स्थापित कर दें. राहत मिल जाएगी.
( अगर आपके पास भी कोई ऐसी समस्या हो, जिसका आप तार्किक और वैज्ञानिक समाधान चाहते हों, तो कृपया प्रभात खबर के माध्यम से सद्‌गुरु स्वामी आनंद जी से सवाल पूछ सकते हैं. इसके लिए आपको बस इतना ही करना है कि आप अपने सवाल उन्हें सीधे saddgurushri@gmail.com पर भेज सकते हैं. चुनिंदा प्रश्नों के उत्तर प्रकाशित किये जायेंगे. मेल में Subject में प्रभात ख़बर अवश्य लिखें. )
Share Via :
Published Date
Comments (0)
metype

संबंधित खबरें

अन्य खबरें