कब है भूतड़ी अमावस्या, जानें कैसे पड़ा ये नाम

Updated at : 13 Mar 2026 6:00 PM (IST)
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Bhootdi Amavasya meaning

भूतड़ी अमावस्या क्या है

Bhutdi Amavasya 2026: चैत्र अमावस्या 2026 को कई जगह भूतड़ी अमावस्या कहा जाता है. जानें इसकी सही तिथि, धार्मिक महत्व, पितरों के तर्पण की परंपरा और क्यों जुड़ा है इस दिन का भूतड़ी नाम.

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Bhutdi Amavasya 2026: हिंदू धर्म में हर अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व होता है, लेकिन चैत्र महीने की अमावस्या को खास रूप से पितरों की शांति और आशीर्वाद से जोड़ा जाता है. इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों, तर्पण और दान-पुण्य से पितृ दोष कम होने और जीवन में सुख-शांति आने की मान्यता है. कई क्षेत्रों में इसे भूतड़ी अमावस्या भी कहा जाता है. इस दिन पितरों का स्मरण, स्नान, दान और मंत्र जाप करने की परंपरा प्रचलित है.

चैत्र अमावस्या 2026 की तिथि

पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 18 मार्च बुधवार को सुबह 8:25 बजे से शुरू होगी. यह तिथि 19 मार्च गुरुवार को सुबह 6:52 बजे समाप्त होगी.

हिंदू धर्म में ज्यादातर व्रत और पर्व उदयातिथि के आधार पर मनाए जाते हैं. इसलिए इस साल भूतड़ी या चैत्र अमावस्या 19 मार्च 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी. इस दिन स्नान, तर्पण और दान करने का विशेष महत्व बताया गया है.

क्यों कहा जाता है इसे भूतड़ी अमावस्या

चैत्र अमावस्या को कई स्थानों पर भूतड़ी अमावस्या के नाम से जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या के दिन वातावरण में सूक्ष्म और अदृश्य शक्तियों का प्रभाव अधिक माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन पितृ लोक के द्वार खुलते हैं, जिससे पूर्वजों को धरती पर आने और अपने वंशजों से जुड़ने का अवसर मिलता है. इसी कारण इसे भूत-प्रेत या अदृश्य शक्तियों से जुड़ी अमावस्या मानकर भूतड़ी अमावस्या कहा जाने लगा. हालांकि इसका मुख्य उद्देश्य पितरों का स्मरण और उनके लिए तर्पण करना है.

चैत्र अमावस्या पर स्नान और तर्पण का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन सुबह स्नान करते समय पानी में काले तिल डालकर स्नान करना शुभ माना जाता है. अगर संभव हो तो किसी तीर्थ स्थान या गंगाजल से स्नान करना और पितरों का तर्पण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. कहा जाता है कि इस दिन पितरों को तर्पण करने से अतृप्त पूर्वज संतुष्ट होते हैं और उनके आशीर्वाद से जीवन की कई समस्याएं दूर होने लगती हैं.

नकारात्मक ऊर्जा से बचने के उपाय

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार भूतड़ी अमावस्या के दिन नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ सकता है. इससे बचने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना लाभकारी माना गया है. इससे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.

इस दिन दान का विशेष महत्व

चैत्र अमावस्या के दिन जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना बेहद पुण्यकारी माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया दान पितृ दोष और ग्रह दोष को कम करने में सहायक होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग खोलता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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