चैत्र नवरात्रि 2026: किस दिन होगी किस देवी की पूजा? जानें 9 दिनों का पूरा पूजा कैलेंडर

Updated at : 13 Mar 2026 3:51 PM (IST)
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Chaitra Navratri

मां दुर्गा के नौ स्वरूप

Chaitra Navratri 2026: 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होने जा रही है. इस दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. अगर आप भी यह जानना चाहते हैं कि किस दिन मां के किस स्वरूप की पूजा की जाएगी, तो यह खबर आपके लिए है. आइए, ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा से जानते हैं कि चैत्र नवरात्रि 2026 में किस दिन मां दुर्गा के किस स्वरूप की पूजा की जाएगी.

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Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि को बहुत ही पवित्र और शुभ पर्व माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के इन नौ दिनों में माता दुर्गा स्वयं पृथ्वी पर अपने भक्तों के बीच विराजमान होती हैं. कहा जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से इन नौ दिनों तक माता की पूजा-अर्चना करता है, उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. साल 2026 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है और इसका समापन 27 मार्च को रामनवमी के साथ होगा. इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से नवदुर्गा कहा जाता है. 

पहला दिन (19 मार्च 2026): मां शैलपुत्री की पूजा

नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है. देवी भागवत और मार्कंडेय पुराण के अनुसार, मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और इन्हें देवी सती का अगला जन्म माना जाता है. मां शैलपुत्री को शक्ति का मूल स्वरूप कहा गया है. नवरात्रि की शुरुआत इन्हीं की पूजा से होती है और इसी दिन घरों में घटस्थापना या कलश स्थापना भी की जाती है. मान्यता है कि मां शैलपुत्री की पूजा से जीवन में स्थिरता और शक्ति मिलती है.

द्वितीया (20 मार्च 2026): मां ब्रह्मचारिणी की आराधना

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. यह देवी तप, त्याग और साधना का प्रतीक मानी जाती हैं. पौराणिक मान्यता के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था. जो भक्त इस दिन श्रद्धा से व्रत और पूजा करते हैं, उन्हें धैर्य, संयम और आत्मबल की प्राप्ति होती है.

तृतीया (21 मार्च 2026): मां चंद्रघंटा की पूजा

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विधान है. उनके मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घंटी होने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है. मां चंद्रघंटा को साहस और युद्ध की देवी माना जाता है. कहा जाता है कि उनकी पूजा से भय, नकारात्मक शक्तियों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है.

चतुर्थी (22 मार्च 2026): मां कुष्मांडा की पूजा

नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि जब सृष्टि में चारों ओर अंधकार था, तब मां कुष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी. इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति भी कहा जाता है. उनकी पूजा से घर में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है.

पंचमी (23 मार्च 2026): मां स्कंदमाता की आराधना

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है. यह भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं, इसलिए इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है. मान्यता है कि जो भक्त इस दिन मां स्कंदमाता की भक्ति करता है, उसे संतान सुख, ज्ञान और मोक्ष का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

षष्ठी (24 मार्च 2026): मां कात्यायनी की पूजा

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विधान है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन के तप से देवी ने जन्म लिया था, इसलिए उनका नाम कात्यायनी पड़ा. मां कात्यायनी को साहस और शक्ति का प्रतीक माना जाता है. उनकी पूजा से जीवन की कठिनाइयों और शत्रुओं से रक्षा होती है.

सप्तमी (25 मार्च 2026): मां कालरात्रि की आराधना

नवरात्रि का सातवां दिन मां कालरात्रि को समर्पित होता है. उनका स्वरूप भले ही उग्र और भयावह दिखता हो, लेकिन वे अपने भक्तों को हर प्रकार के भय से मुक्त करती हैं. शास्त्रों में कहा गया है कि मां कालरात्रि की पूजा से नकारात्मक ऊर्जा, बाधाएं और संकट दूर होते हैं.

अष्टमी (26 मार्च 2026): मां महागौरी की पूजा

नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की पूजा की जाती है. यह देवी शांति, करुणा और पवित्रता का प्रतीक मानी जाती हैं. अष्टमी के दिन कई घरों में कन्या पूजन भी किया जाता है. माना जाता है कि मां महागौरी की आराधना से जीवन के सभी पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं.

नवमी (27 मार्च 2026): मां सिद्धिदात्री और रामनवमी

नवरात्रि का अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित होता है. देवी सिद्धिदात्री को सभी प्रकार की सिद्धियां और आध्यात्मिक शक्तियां प्रदान करने वाली देवी माना जाता है. इसी दिन रामनवमी भी मनाई जाती है, जो भगवान राम के जन्मोत्सव का पर्व है. नवरात्रि के नौ दिनों की साधना का समापन इसी दिन हवन, पूजा और कन्या पूजन के साथ किया जाता है.

चैत्र नवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि आत्मशक्ति, भक्ति और साधना का उत्सव भी है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद मिलता है. इसलिए 2026 की चैत्र नवरात्रि में यदि आप व्रत और पूजा करने की सोच रहे हैं, तो इस पूजा कैलेंडर के अनुसार हर दिन मां के अलग स्वरूप की श्रद्धा से आराधना करें.

ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
ज्योतिष, वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
8080426594 / 9545290847

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.

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