पितृपक्ष में तर्पण से दूर होता है पितृदोष

हमारे शास्त्रों में वर्णित है कि देवपूजा से पहले पूर्वजों की पूजा करनी चाहिए. पितरों के प्रसन्न होने पर ही देवता भी प्रसन्न होते हैं. यही कारण है कि हिंदू धर्म में वैदिक परंपरा के अनुसार जीवित रहते घर के बड़े-बुजुर्गों का सम्मान और मृत्योपरांत श्राद्ध अनिवार्य है. मान्यता है कि यदि विधिनुसार पितरों का […]
हमारे शास्त्रों में वर्णित है कि देवपूजा से पहले पूर्वजों की पूजा करनी चाहिए. पितरों के प्रसन्न होने पर ही देवता भी प्रसन्न होते हैं. यही कारण है कि हिंदू धर्म में वैदिक परंपरा के अनुसार जीवित रहते घर के बड़े-बुजुर्गों का सम्मान और मृत्योपरांत श्राद्ध अनिवार्य है. मान्यता है कि यदि विधिनुसार पितरों का तर्पण न किया जाये, तो उन्हें मुक्ति नहीं मिलती. पितृ पक्ष को मनाने का ज्योतिषीय कारण भी है.
ज्योतिषशास्त्र में पितृदोष अहम माना जाता है. जब जातक सफलता के करीब पहुंचकर भी उससे वंचित रह जाता हो, संतान उत्पत्ति में परेशानियां आ रही हों, धन की हानि हो रही हो, तो इसका संबंध पितृदोष से होता है. पितृदोष से मुक्ति के लिए भी पितरों की शांति आवश्यक है. गरुड़ पुराण में वर्णित है कि देह त्यागकर पितृलोक को गये पितर इन 15 दिनों में सूक्ष्म शरीर के साथ पृथ्वी पर आते हैं और परिजनों के बीच रहते हैं. जिन परिवारों में पितरों की पूजा नहीं होती, पितरों के नाम से अन्न, जल और पिंड नहीं दिये जाते, उनके पितर नाराज हो जाते हैं और परिवार को पितृदोष लग जाता है.
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