सोमवार से ही शुरू और सोमवार को ही खत्म होगा पवित्र माह श्रावण
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 Jul 2017 9:03 AM (IST)
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भक्तों पर बरसेगी महादेव की कृपा, पूजन से पूरी होगी कामना विविध योगों से सजे इस श्रवण मास में मिलेंगे पांच-पांच सोमवार भगवान शिव के पूजन का महीना श्रवण 10 जुलाई से शुरू हो रहा है और पहले ही दिन सोमवार है. अमूमन सावन माह में चार ही सोमवार पड़ते हैं. लेकिन इस बार पांच […]
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भक्तों पर बरसेगी महादेव की कृपा, पूजन से पूरी होगी कामना
विविध योगों से सजे इस श्रवण मास में मिलेंगे पांच-पांच सोमवार
भगवान शिव के पूजन का महीना श्रवण 10 जुलाई से शुरू हो रहा है और पहले ही दिन सोमवार है. अमूमन सावन माह में चार ही सोमवार पड़ते हैं. लेकिन इस बार पांच सोमवार का पड़ना भी शुभ संकेत माना जा रहा है. इस बार सावन माह 29 दिनों का होगा. सावन माह की समाप्ति आखिरी सोमवार यानी सात अगस्त को होगी तथा उसी दिन रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जायेगा.
सावन के दूसरे सोमवार का व्रत 17 जुलाई, तीसरे सोमवार का व्रत 24 जुलाई को और चौथे सोमवार का व्रत 31 जुलाई को होगा. सावन के शुरू होने में भले ही अभी दो दिन शेष हो, लेकिन शिव मंदिरों में इसको लेकर तैयारियां शुरू हो गयी हैं. विविध योगों से सजे इस श्रवण मास में भक्तों पर महादेव की कृपा बरसेगी तथा पूजन से भक्तों की मनोकामना पूरी होगी. ऐसा संयोग सालों में एक बार बनता है. इस संयोग में भक्तों को भगवान शिवजी की आराधना करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है.
सावन के पहले दिन ही शहर के सभी शिव मंदिरों में भगवान शिव का जलाभिषेक करने भक्तों की भारी भीड़ उमड़ेगी. श्रवण के मद्देनजर मंदिरों में आनेवाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी करने वाले जलाभिषेक का पूरा इंतजाम किया जा रहा है.
रुद्राभिषेक से पद, प्रतिष्ठा, ऐश्वर्य की प्राप्ति
श्रावण माह में विधिपूर्वक रुद्राभिषेक करने से पद, प्रतिष्ठा तथा ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. जो लोग रु द्राभिषेक नहीं करा सकते है, वे ‘ऊं नम: शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए स्वयं जलाभिषेक करें या दूध, दही, घृत, शहद, चन्दन, चंदन, बेलपत्र, गंगाजल से प्रभु का अभिषेक करें. श्रावण मास में बालू या मिट्टी के शिविलंग का ही अभिषेक उत्तम माना गया है. पार्थिव लिंग की स्थापना खुद ही करें.
सावन में भोले की आराधना का विशेष महत्व
इस माह में भगवान भोलेनाथ की आराधना का विशेष महत्व है. पौराणिक कथाओं के अनुसार सावन माह में ही समुद्र मंथन हुआ था. मंथन के दौरान समुद्र से विष निकला. भगवान शंकर ने इस विष को अपने कंठ में उतारकर सम्पूर्ण सृष्टि की रक्षा की थी. इसलिए इस माह में शिव उपासना से उनकी शेष कृपा प्राप्त होती है.
केसरिया रंग में रंगा शिल्पांचल
सावन महीने के आगमन में महज दो दिन ही शेष बचे हुए हैं. ऐसे में पूरा शिल्पांचल केसरिया रंग से रंगा हुआ नजर आने लगा है. दुर्गापुर शहर की दुकानें केसरिया रंग के वस्त्नों से सजी धजी नजर आ रही है.
बाबाधाम और तारकेश्वर धाम की ओर जाने वाले श्रद्धालु इन कपड़ों की खरीदारी में जुटे हैं. दुकानदारों का कहना है कि सावन महीने को देखते हुए केसरिया रंग के कपड़े तैयार किए जा रहे हैं. इस समय इनकी बेहद मांग है. जहां बड़ों के लिए खरीदारी की जा रही है वहीं बच्चों के लिए भी कपड़े खरीदे जा रहे हैं.
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