Coronavirus : गांव के लोगों में एंटीबॉडी ज्यादा, शहरी की तुलना में ग्रामीण प्लाज्मा दान के लिए ज्यादा उपयुक्त

Author : Pritish Sahay Published by : Prabhat Khabar Updated At : 28 Sep 2020 10:43 AM

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राज्य में एसिम्टोमैटिक (बिना लक्षणवाले) मरीजों की संख्या ज्यादा है. वहीं, गांव की तुलना में शहरी क्षेत्र में सिम्टोमैटिक (लक्षण वाले) मरीजों की संख्या ज्यादा है. कोरोना से स्वस्थ होने के बाद शहरी क्षेत्र की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र के लोग प्लाज्मा दान के लिए ज्यादा उपयुक्त पाये जा रहे हैं.

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राजीव पांडेय, रांची : राज्य में एसिम्टोमैटिक (बिना लक्षणवाले) मरीजों की संख्या ज्यादा है. वहीं, गांव की तुलना में शहरी क्षेत्र में सिम्टोमैटिक (लक्षण वाले) मरीजों की संख्या ज्यादा है. कोरोना से स्वस्थ होने के बाद शहरी क्षेत्र की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र के लोग प्लाज्मा दान के लिए ज्यादा उपयुक्त पाये जा रहे हैं. शहरी क्षेत्र के ज्यादातर लोग अनफिट हो जा रहे हैं. विशेषज्ञों की मानें, तो ऐसा इम्युनिटी के कारण हो रहा है. आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र से आनेवाले लोगों में एंटीबॉडी ज्यादा मिल रही है. ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की इम्युनिटी शहरी लोगों से बेहतर है.

जानकारी के अनुसार, रिम्स ब्लड बैंक में प्लाज्मा दान के लिए अब तक करीब 300 लोगों की आवश्यक जांच की गयी. इसमें 125 लोग प्लाज्मा दान के लिए उपयुक्त पाये गये. उनका प्लाज्मा संग्रहित कर संक्रमितों को चढ़ाया गया है. वहीं, 175 लोगों को प्लाज्मा दान के लिए अयोग्य पाया गया है. आयोग्य मिले लोगों में 70 फीसदी शहरी क्षेत्र और 30 फीसदी ग्रामीण क्षेत्र के हैं. इनका टाइटर रिम्स ब्लड बैंक द्वारा निर्धारित लेवल से काफी नीचे मिला था.

डॉक्टरों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के लोग मेहनती होते हैं, इसलिए उनका इम्युनिटी पावर ज्यादा बेहतर होता है. इनमें वायरल लोड कम होता है. यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश संक्रमित एसिम्टोमैटिक होते हैं. यानी उनमें कोरोना का लक्षण नहीं दिखता है और वह जल्द ठीक हो जाते हैं.

कम वजनवाले का नहीं लिया जा रहा है प्लाज्मा : टाइटर ठीक होने के बावजूद खून की कमी, वजन कम होने व प्लेटलेट्स कम होने के कारण भी लोगों का प्लाज्मा नहीं लिया जा रहा है. वहीं, तीन माह पहले किसी प्रकार का संक्रमण होनेवाले लोगों का प्लाज्मा भी नहीं लिया जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लोगों का प्लाज्मा संक्रमित को नहीं चढ़ाया जा सकता है. रिम्स ब्लड बैंक में प्लाज्मा के लिए अब तक 300 की हुई जांच, अयोग्य पाये गये 175 में 70 फीसदी शहरी लोग

रिम्स में प्लाज्मा दान करने आये 175 लोगों में तय मानक से कम टाइटर मिला था. यह देखा जा रहा है कि आदिवासी क्षेत्र से आनेवाले लोगों का टाइटर लेवल बेहतर है. यह उनकी इम्युनिटी बेहतर होने के कारण हो रही है. शहर के लोगों का टाइटर ग्रामीणों की अपेक्षा कम है.

– डॉ मिथिलेश कुमार,

रिम्स 51 से 70 वर्ष की उम्र वालों पर भारी पड़ रहा है कोरोना संक्रमण : राज्य में कोरोना संक्रमितों की मौत की बात की जाये, तो 51 से 70 साल की उम्र वालों के लिए वायरस भारी पड़ रहा है. इस उम्र में सबसे ज्यादा 335 संक्रमितों की मौत हुई है. इसके बाद 70 से अधिक उम्र वाले 167 संक्रमितों की मौत हुई है. वहीं 31 से 50 साल की उम्र वाले 137 संक्रमितों की मौत हुई है. राहत की बात यह है कि युवा कोरोना वायरस को हराने में आगे हैं. 11 से 30 साल की उम्र वाले 28 संक्रमितों की मौत हुई है. बच्चाें की बात की जाये, तो शून्य से 10 साल की उम्र वाले बच्चों में तीन की मौत हुई है.

मेडिसिन विभागाध्यक्ष की स्थिति में सुधार : रिम्स मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ जेके मित्रा की स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है. उनकाे हाइफ्लो ऑक्सीजन से हटा दिया गया है. सामान्य ऑक्सीजन पर रख कर इलाज करने के लिए सोमवार को निर्णय होगा. वहीं, महंगी एंटीबायोटिक दवाएं भी पहले से कम कर दी गयी है. गौरतलब है कि मेडिसिन विभागाध्यक्ष 10 दिनों पहले कोरोना पॉजिटिव आये थे. रिपोर्ट आने के बाद पेइंग वार्ड में भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा था, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर कोविड आइसीयू में शिफ्ट किया गया.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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