14 वर्षीय गोकुल के हाथों में है जादू, 29 अक्टूबर को इसकी बनायी प्रतिमा का होगा विसर्जन

Updated at : 28 Oct 2020 8:15 PM (IST)
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14 वर्षीय गोकुल के हाथों में है जादू, 29 अक्टूबर को इसकी बनायी प्रतिमा का होगा विसर्जन

Jharkhand news, Ramgarh news : दुर्गा पूजा खत्म हुए भले ही अभी 2 दिन बीता हो, लेकिन रामगढ़ के गोला में एक 14 वर्षीय गोकुल दास के हाथों बनी मूर्तियों की चर्चा चहुंओर होने लगी है. गोकुल ने अपनी कलाकृति से मां दुर्गा की आकर्षक एवं अद्भुत प्रतिमा को बना कर अपने घर में स्थापित कर पूजा-अर्चना की. गोला के बजरंग संघ (बीएस रोड) में एक अद्भुत मूर्ति कलाकार की प्रतिभा लोगों के बीच उभर कर सामने आयी है. जिसके द्वारा निर्मित प्रतिमाओं को देखकर हर कोई कौतूहल तथा आश्चर्य से भर जाता है.

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Jharkhand news, Ramgarh news : गोला (शंकर पोद्दार) : दुर्गा पूजा खत्म हुए भले ही अभी 2 दिन बीता हो, लेकिन रामगढ़ के गोला में एक 14 वर्षीय गोकुल दास के हाथों बनी मूर्तियों की चर्चा चहुंओर होने लगी है. गोकुल ने अपनी कलाकृति से मां दुर्गा की आकर्षक एवं अद्भुत प्रतिमा को बना कर अपने घर में स्थापित कर पूजा-अर्चना की. गोला के बजरंग संघ (बीएस रोड) में एक अद्भुत मूर्ति कलाकार की प्रतिभा लोगों के बीच उभर कर सामने आयी है. जिसके द्वारा निर्मित प्रतिमाओं को देखकर हर कोई कौतूहल तथा आश्चर्य से भर जाता है.

गोकुल मां दुर्गा के अलावा मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, भगवान गणेश एवं भगवान कार्तिकेय सहित समस्त परिवार के अलावे बाघ एवं महिषासुर की भी प्रतिमा को बनाया है. इसे देखने के लिए आसपास क्षेत्र से काफी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. इस प्रतिमा का विसर्जन त्रयोदशी के दिन गुरुवार (29 अक्टूबर, 2020) को किया जायेगा. गोकुल एसएस प्लस टू हाई स्कूल गोला में 9वीं के छात्र हैं. इसके पिता अमर कुमार दास एवं मां सुमित्रा देवी भी इस कार्य के लिए उसे प्रोत्साहित करते हैं.

बुंडू से मंगवाते हैं सजावट के सामान

गोकुल ने बताया कि मां दुर्गा की प्रतिमा में सजावट की सामान वह बुंडू से मंगवाते हैं. उनके चाचा अनुज कुमार दास बुंडू से सजावट का सामान लेकर यहां आते हैं. उसने कहा कि मां दुर्गा की प्रतिमा बनाने में कम से कम एक माह का समय लग जाता है. गोला क्षेत्र में चारों ओर छात्र के इस कलाकृति की चर्चा एवं सराहना हो रही है.

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8 साल की उम्र से बना रहे हैं प्रतिमा

गोकुल ने अपनी मूर्तिकला के प्रति रुझान के बारे में बताया कि जब वह अपने माता- पिता के साथ दुर्गा पूजा के अवसर पर विभिन्न मंदिर एवं पूजा पंडालों में मां दुर्गा का दर्शन करने जाते थे, तो हूबहू प्रतिमा बनाने की भावना उसके मन में भी जागृत हुई. धीरे-धीरे लगन बढ़ी और मूर्तियों के निर्माण में जुट गये. निरंतर इसी कार्य में लगे रहने से मूर्तियों के निर्माण में निखार आना शुरू हुआ. इसके परिणाम स्वरूप पिछले 6 वर्षों से खुद से मां दुर्गा की मूर्ति बना कर अपने घर में पूजा- अर्चना करते आ रहे हैं.

मां दुर्गा की प्रतिमा को फ्रेमिंग कर घर में सजाया

कोरोना संक्रमण एवं लॉकडाउन के कारण जहां लोग परेशान दिखे, वहीं गोकुल ने अपनी प्रतिभा की बदौलत इस आपदा को अवसर में तब्दील कर दिया. घर में बैठ कर लगातार एक माह तक मां दुर्गा की आकर्षक प्रतिमा का निर्माण किया. छात्र ने 2 फीट की इस प्रतिमा को शीशे से फ्रेमिंग कर अपने घर में सजाया. इस संबंध में गोकुल ने कहा कि गणपति पूजा के समय भगवान गणेश की प्रतिमा का निर्माण किया था. इस प्रतिमा को मोहल्ले के गणपति पूजा पंडाल में स्थापित कर पूजा- अर्चना किया गया था.

अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति करना ही कला है : गोकुल

युवा मूर्तिकार गोकुल दास ने कहा है कि अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति करना ही कला है. हमारा माध्यम चाहे कुछ भी हो. कला में यदि हम स्वतंत्र रूप से सृजन करते हैं, तो निश्चय ही अपनी कला के माध्यम से एक सच्चाई दुनिया के सामने रख सकते हैं, क्योंकि कला सब पर आधारित होती है.

Posted By : Samir Ranjan.

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