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झारखंड के कथाकार जयनंदन को 2022 का श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान, कहा-पुरस्कार पाकर खुश हूं

Updated at : 11 Nov 2022 6:28 PM (IST)
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झारखंड के कथाकार जयनंदन को 2022 का श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान, कहा-पुरस्कार पाकर खुश हूं

जयनंदन ने कहा कि चूंकि यह पुरस्कार खेती-किसानी और इससे जुड़े मुद्दों पर लिखी गयी रचनाओं को ही मिलता है और मेरी कई रचनाएं इस पृष्ठभूमि की हैं, इसलिए यह मेरे लिए प्रतीक्षित था, घोषणा होने पर खुशी होना स्वाभाविक है.

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श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान देश के प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक है. यह पुरस्कार मिलना गौरव की बात है, इससे देश में आपको मान्यता मिलती है और लोग आपकी रचनाओं के बारे में जानते हैं, तो निश्चय ही खुशी हो रही है. उक्त बातें देश के जाने-माने कथाकार जयनंदन ने श्रीलाल शुक्ल स्मृति पुरस्कार की घोषणा होने के बाद प्रभात खबर के साथ बातचीत में कही.

जयनंदन ने कहा-सम्मान पाकर खुश हूं 

जयनंदन ने कहा कि चूंकि यह पुरस्कार खेती-किसानी और इससे जुड़े मुद्दों पर लिखी गयी रचनाओं को ही मिलता है और मेरी कई रचनाएं इस पृष्ठभूमि की हैं, इसलिए यह मेरे लिए प्रतीक्षित था, घोषणा होने पर खुशी होना स्वाभाविक है. पुरस्कार की घोषणा होने पर लेखक को मान्यता मिलती है.

पुरस्कार में मिलेंगे ग्यारह लाख रुपये

गौरतलब है कि उर्वरक क्षेत्र की अग्रणी सहकारी संस्था इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको) ने वर्ष 2022 के ‘श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य’ सम्मान के लिए कथाकार जयनंदन के नाम की घोषणा की गयी है. जयनंदन का चयन चित्रा मुद्गल की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय चयन समिति ने किया है. जयनंदन को पुरस्कार स्वरूप एक प्रतीक चिह्न, प्रशस्ति पत्र तथा ग्यारह लाख रुपये की राशि का चेक प्रदान किया जायेगा. 31 जनवरी, 2023 को पुरस्कार प्रदान किया जायेगा.

बिहार के नवादा में जन्मे हैं जयनंदन

जयनंदन का जन्म 26 फरवरी 1956 में बिहार के नवादा जिले के मिलकी गांव में हुआ था. इनकी शिक्षा रांची में हुई थी और ये जमशेदपुर में रहते हैं. जयनंदन की दो दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें ‘श्रम एव जयते’, ‘ऐसी नगरिया में केहि विधि रहना’, ‘सल्तनत को सुनो गांववालो’, ‘विघटन’, ‘चौधराहट’, ‘मिल्कियत की बागडोर’, ‘रहमतों की बारिश’ जैसे उपन्यास तथा ‘सन्नाटा भंग’, ‘विश्व बाजार का ऊंट’, ‘एक अकेले गान्ही जी’, ‘कस्तूरी पहचानो वत्स’, ‘दाल नहीं गलेगी अब’, ‘घर फूंक तमाशा’, ‘सूखते स्रोत’, ‘गुहार’, ‘गांव की सिसकियां’, ‘भितरघात’, ‘मेरी प्रिय कथायें’, ‘मेरी प्रिय कहानियां’, ‘सेराज बैंड बाजा’, ‘संकलित कहानियां’, चुनी हुई कहानियां’, ‘गोड़पोछना’, ‘चुनिंदा कहानियां’ आदि कहानी संग्रह प्रमुख हैं. इसके अलावा उन्होंने नाटक और निबंध भी लिखे हैं. बिहार सरकार राजभाषा विभाग सहित अनेक साहित्यिक, सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया है.

मूर्धन्य कथाशिल्पी श्रीलाल शुक्ल की स्मृति में दिया जाता है सम्मान

गौरतलब है कि मूर्धन्य कथाशिल्पी श्रीलाल शुक्ल की स्मृति में वर्ष 2011 में इस पुरस्कार की शुरुआत हुई थी. यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष ऐसे हिंदी लेखक को दिया जाता है जिसकी रचनाओं में मुख्यतः ग्रामीण व कृषि जीवन का चित्रण किया गया हो. इससे पहले यह सम्मान विद्यासागर नौटियाल, शेखर जोशी, संजीव, मिथिलेश्वर, अष्टभुजा शुक्ल, कमलाकांत त्रिपाठी, रामदेव धुरंधर, रामधारी सिंह दिवाकर, महेश कटारे, रणेंद्र और शिवमूर्ति को दिया जा चुका है.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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