ePaper

मैथिली के मूर्धन्य आलोचक मोहन भारद्वाज नहीं रहे

Updated at : 24 Jul 2018 9:42 PM (IST)
विज्ञापन
मैथिली के मूर्धन्य आलोचक मोहन भारद्वाज नहीं रहे

मैथिली के नामवर सिंह के रूप में जाने जाते थे मोहन भारद्वाज मैथिली के मूर्धन्य आलोचक व मैथिली साहित्य के नामवर सिंह माने जाने वाले मोहन भारद्वाज का मंगलवार को तड़के निधन हो गया. वह नौ जुलाई से राजधानी रांची के राज अस्पताल में भरती थे. साहित्य अकादमी परामर्शदात्री समिति के सदस्य रहे मोहन भारद्वाज […]

विज्ञापन

मैथिली के नामवर सिंह के रूप में जाने जाते थे मोहन भारद्वाज

मैथिली के मूर्धन्य आलोचक व मैथिली साहित्य के नामवर सिंह माने जाने वाले मोहन भारद्वाज का मंगलवार को तड़के निधन हो गया. वह नौ जुलाई से राजधानी रांची के राज अस्पताल में भरती थे. साहित्य अकादमी परामर्शदात्री समिति के सदस्य रहे मोहन भारद्वाज को प्रबोध साहित्य सम्मान, विदेह सम्मान से सम्मानित किया गया था.

उनका मूल नाम आनंद मोहन झा था. वह तीन पुस्तकों के अनुवादक व सहयोगी अनुवादक रहे. उन्‍होंने पांच पत्रिकाओं का संपादन किया. उन्‍होंने मैथिली को आलोचना की नयी भाषा और अर्थ दिया. पठनीयता के साथ दृष्टि, विवेचन-शैली, सहज और सरल आयाम दिया. वह विगत 40 वर्षों से मैथिली भाषा और साहित्य की सेवा में लगे थे. इस क्रम में उन्होंने कई उल्लेखनीय कार्य किये.

मैथिली आलोचना, सन्निपात, जिज्ञासा आदि पत्रिकाओं का संपादन करते हुए साहित्य को उत्कृष्टता दी. वह महालेखाकार कार्यालय रांची से सेवानिवृत्त हुए थे. पिछले एक वर्षों से बीमार चल रहे थे. इनके बड़े पुत्र मधुकर भारद्वाज झारखंड विधानसभा में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत है. बुधवार की सुबह धुर्वा सीटीओ मुक्तिधाम पर दिवंगत भारद्वाज का अंतिम संस्कार किया जायेगा.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola