क्या गिरफ्तार होंगे राहुल गांधी? बीजेपी ने दर्ज कराया है संज्ञेय अपराध का FIR

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Rahul Gandhi

राहुल गांधी

Rahul Gandhi : विपक्ष के नेता राहुल गांधी एक बार फिर चर्चा में हैं. बीजेपी सांसदों ने उनपर संसद में हाथापाई करने का आरोप लगाया है और भारतीय न्याय संहिता की कुछ धाराओं के तहत एफआईआर भी दर्ज कराया है. इन सेक्शन के तहत आरोप सिद्ध होने पर सात साल तक की अधिकतम सजा का प्रावधान भी है.

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Rahul Gandhi : संसद के शीतकालीन सत्र में गुरुवार 19 जुलाई को खूब हंगामा हुआ और बात इतनी बढ़ी कि हाथापाई की नौबत तक आ गई. कांग्रेस और बीजेपी दोनों एक दूसरे पर धक्कामुक्की का आरोप लगा रहे हैं और बीजेपी के सांसदों ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है. राहुल गांधी पर बीएनएस की छह धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है, कुछ ऐसे सेक्शन भी लगाए गए हैं, जिनके तहत सात साल तक की सजा का प्रावधान है.

संसद में आखिर क्यों आई हाथापाई की नौबत

संसद भवन परिसर में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की अन्य पार्टियों ने गृहमंत्री अमित शाह द्वारा बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर पर की गई टिप्पणी के खिलाफ उनकी प्रतिमा के सामने विरोध मार्च निकाला था. उसके बाद राहुल गांधी और अन्य नेता संसद में प्रवेश की कोशिश कर रहे थे, उनका दावा है कि बीजेपी के सांसदों ने उनका रास्ता रोका और उन्हें धमकाया. राहुल गांधी ने एक वीडियो में बताया है कि वे संसद के मुख्य द्वार से अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें बीजेपी के सांसदों ने रोका और वे अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे.उन्होंने कहा कि धक्कामुक्की से कोई अंतर पड़ता नहीं है. बाद में ऐसी बातें भी सामने आईं कि बीजेपी के सांसदों ने कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे को धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया. दूसरे पक्ष यानी बीजेपी का कहना यह है कि राहुल गांधी ने बीजेपी के सांसद मुकेश राजपूत को धक्का दिया, जिससे वे सांसद प्रताप सिंह सारंगी के ऊपर गिर गए और दोनों की काफी चोट आई. वे दोनों अभी राममनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती हैं.

बीजेपी ने राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज कराई प्राथमिकी

अस्पताल में भर्ती बीजेपी सांसद प्रताप सारंगी

हाथापाई और धक्कामुक्की की घटना के बाद बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर और बांसुरी स्वराज के नेतृत्व में एनडीए के सांसदों ने संसद मार्ग पुलिस स्टेशन जाकर मामला दर्ज कराया. इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार बीजेपी नेताओं ने भारतीय न्याय संहिता की इन धाराओं के अनुसार राहुल गांधी के खिलाफ मामला दर्ज कराया है.

  • धारा 117 (स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना): इस अपराध के लिए सजा सात साल तक की जेल और/या जुर्माना है.
  • धारा 115 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना): इस अपराध के लिए सजा एक साल तक की जेल और/या जुर्माना है.
  • धारा 125 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने का कार्य): इस अपराध के लिए सजा तीन साल तक की जेल और/या 10,000 रुपये तक का जुर्माना है.
  • धारा 131 (हमला या आपराधिक बल का प्रयोग): इस अपराध के लिए तीन महीने तक की जेल की सजा और/या 1,000 रुपये तक का जुर्माना है.
  • धारा 351 (आपराधिक धमकी): इस अपराध के लिए सात साल तक की जेल की सजा और/या जुर्माना है.
  • धारा 3(5) (सामान्य इरादा): यह धारा बस यह स्थापित करती है कि जब कोई आपराधिक कृत्य कई व्यक्तियों द्वारा एक सामान्य इरादे को आगे बढ़ाने के लिए किया जाता है, तो उनमें से प्रत्येक व्यक्ति उस कृत्य के लिए उसी तरह उत्तरदायी है जैसे कि वह अकेले उसके द्वारा किया गया हो.

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कांग्रेस ने किया अमित शाह और मोदी पर पलटवार

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अमित शाह पर किया हमला

कांग्रेस नेता और राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी ने कहा है कि राहुल गांधी पर झूठा आरोप लगाया जा रहा है वे बस संसद में घुसने की कोशिश कर रहे थे और यह उनका हक है. विपक्ष भी इतने दिनों से प्रदर्शन कर रहा है, कभी किसी को आने जाने में परेशानी नहीं हुई. बीजेपी वालों ने एक दिन प्रदर्शन किया तो दूसरे का रास्ता रोकने लगे. राहुल गांधी ने प्रेस काॅन्फ्रेंस कर कहा बीजेपी अदाणी को बचाने के लिए सबकुछ कर रही है. वह नहीं चाहती कि पीएम मोदी के मित्र अदाणी पर संसद में चर्चा हो. गृहमंत्री अमित शाह संविधान निर्माता अमित शाह का अपमान कर रहे हैं, उन्हें अविलंब इस्तीफा देना चाहिए.

क्या राहुल गांधी की गिरफ्तारी हो सकती है?

राहुल गांधी पर जिन सेक्शन के तहत मामला दर्ज कराया गया है उनमें से धारा 117 और 125 संज्ञेय अपराध है, जिसके तहत पुलिस बिना अदालती वारंट के आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है. इस लिहाज से राहुल की गिरफ्तारी की संभावना तो है, लेकिन यहां यह भी ध्यान देने की जरूरत है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में एक आदेश दिया था कि जिस अपराध की सजा सात साल तक की जेल हो सकती है, उसके लिए गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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